
केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज गोयल ने मुंबई में लिज्जत पापड़ की महिला कारीगरों को संबोधित किया और 80 रुपये से शुरू हुए इस संगठन के वैश्विक सफलता के सफर की सराहना की।
मुख्य बातें
- लिज्जत पापड़ की शुरुआत 15 मार्च 1959 को 7 महिलाओं और 80 रुपये से हुई थी।
- वर्तमान में 16 राज्यों की 83 शाखाओं में 45,000 से अधिक महिला कारीगर जुड़ी हैं।
- संगठन के उत्पाद अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया सहित 30 से अधिक देशों में निर्यात होते हैं।
- केवीआईसी क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों में कारीगरों के मेहनताने में 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
- खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र की कुल बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है।
लिज्जत पापड़ बनाने वाली महिला कारीगरों के काम और उनके आत्मनिर्भरता के मॉडल की खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने सराहना की है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के तहत आने वाले केवीआईसी के चेयरमैन मनोज गोयल ने मुंबई के सायन स्थित श्री षणमुखानंद चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती ऑडिटोरियम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में महिला कारीगरों को संबोधित किया। केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा कि यह संस्थान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को जमीन पर उतारने का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता है।
लिज्जत पापड़ का इतिहास और सफलता का मॉडल
लिज्जत पापड़ महिला सशक्तिकरण का एक ऐसा मॉडल है जो महज 80 रुपये की पूंजी और 7 महिलाओं के साथ वर्ष 1959 में शुरू हुआ था। आज इस संगठन से 16 राज्यों की 83 शाखाओं में 45,000 से अधिक महिलाएं जुड़कर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन चुकी हैं और इसके उत्पाद दुनिया के 30 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।
केवीआईसी के अनुसार, ‘श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़’ की नींव 15 मार्च 1959 को मुंबई की एक इमारत की छत पर रखी गई थी। उस समय सात महिलाओं ने मिलकर अपने पैरों पर खड़े होने और सम्मान के साथ जीने के उद्देश्य से पापड़ बनाने की शुरुआत की थी। इस संस्था को खादी और ग्रामोद्योग आयोग से बड़ा सहारा मिला, जब 1966 में केवीआईसी ने इसे औपचारिक रूप से ‘ग्रामोद्योग’ के रूप में मान्यता प्रदान की। इस मान्यता के बाद संगठन को उत्पादन और विपणन में नई दिशा मिली।
80 रुपये की पूंजी से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक की यात्रा
शुरुआती दौर में केवल पापड़ बनाने वाले इस संगठन ने समय के साथ अपनी उत्पाद श्रृंखला का विस्तार किया। आज यह गृह उद्योग पापड़ के अलावा मसाले, आटा, डिटर्जेंट पाउडर और लिक्विड सोप का भी निर्माण करता है। गुणवत्ता और कड़ी मेहनत के दम पर लिज्जत के बनाए सामान अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं।
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण अफ्रीका समेत दुनिया के 30 से ज्यादा देशों में लिज्जत के उत्पादों की भारी मांग है। केवीआईसी चेयरमैन मनोज गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि अनुशासन और सख्त गुणवत्ता नियंत्रण ही इस संगठन की मुख्य ताकत है। यह संस्था न केवल सामान बेचती है, बल्कि ग्रामीण और शहरी महिलाओं के बीच आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संचार करती है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान और पुरस्कार
लिज्जत पापड़ के अनुकरणीय योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार सराहा गया है। संगठन को प्राप्त प्रमुख सम्मान इस प्रकार हैं:
- 2003: उत्कृष्ट कार्य के लिए ‘बेस्ट विलेज इंडस्ट्री अवॉर्ड’ (सर्वश्रेष्ठ ग्रामोद्योग पुरस्कार) प्रदान किया गया।
- 2005: व्यावसायिक सफलता और साख के लिए ‘ब्रांड इक्विटी अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।
- 2017: महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए ‘महिला विकास पुरस्कार’ मिला।
इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थानों और वैश्विक मीडिया मंचों ने लिज्जत पापड़ के प्रबंधन मॉडल को एक केस स्टडी के रूप में दुनिया के सामने रखा है।
केवीआईसी और खादी क्षेत्र के नए आंकड़े
कार्यक्रम के दौरान केवीआईसी के चेयरमैन मनोज गोयल ने खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र की समग्र प्रगति के आंकड़े भी जारी किए। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के जरिए देशभर में लगभग 5 लाख कारीगरों को रोजगार मिला हुआ है। इनमें से 80 प्रतिशत कारीगर महिलाएं हैं, जो देशभर में फैली लगभग 3,000 खादी संस्थाओं से जुड़कर काम कर रही हैं।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में खादी कारीगरों के मेहनताने (मजदूरी) में 275 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खादी और ग्रामोद्योग का कुल उत्पादन बढ़कर लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि कुल बिक्री का आंकड़ा 1.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
ग्राम उद्योग विकास योजना और पीएमईजीपी का योगदान
केवीआईसी चेयरमैन ने भारत सरकार की रोजगार सृजन योजनाओं का ब्योरा देते हुए बताया कि ग्राम उद्योग विकास योजना के तहत बीते 12 सालों में 3.23 लाख से अधिक मशीनें और टूलकिट कारीगरों के बीच बांटे गए हैं। इससे मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों, मधुमक्खी पालकों और चमड़ा कारीगरों की उत्पादकता बढ़ी है।
इसी तरह प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत देश भर में अब तक लगभग 11 लाख नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित किए गए हैं। इन परियोजनाओं के लिए सरकार की तरफ से 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी जारी की गई, जिससे कुल मिलाकर करीब 1 करोड़ लोगों के लिए आजीविका और रोजगार के नए रास्ते खुले हैं।
इसका असर: महिला सशक्तिकरण और ‘लोकल टू ग्लोबल’
लिज्जत पापड़ का मॉडल यह सिद्ध करता है कि अगर महिलाओं को सही दिशा और अवसर मिले, तो वे बिना किसी बड़े कॉरपोरेट निवेश के भी एक सफल व्यावसायिक साम्राज्य खड़ा कर सकती हैं। यह संस्था प्रधानमंत्री के ‘लोकल टू ग्लोबल’ आह्वान की सबसे सटीक मिसाल है, जहां गांव-शहर के साधारण घरों की महिलाएं अपनी मेहनत के बल पर वैश्विक बाजार में भारत का नाम रोशन कर रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: लिज्जत पापड़ की शुरुआत कब और कितने पैसों से हुई थी?
उत्तर: लिज्जत पापड़ की शुरुआत 15 मार्च 1959 को केवल 7 महिलाओं ने 80 रुपये की उधार पूंजी से की थी।
प्रश्न: वर्तमान में लिज्जत पापड़ से कितनी महिलाएं जुड़ी हुई हैं?
उत्तर: वर्तमान में 16 राज्यों की 83 शाखाओं के माध्यम से 45,000 से अधिक महिलाएं इस संस्था से जुड़कर काम कर रही हैं।
प्रश्न: केवीआईसी ने लिज्जत पापड़ को ग्रामोद्योग का दर्जा कब दिया था?
उत्तर: खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने लिज्जत पापड़ को वर्ष 1966 में औपचारिक रूप से ‘ग्रामोद्योग’ का दर्जा दिया था।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






