
राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (NRIDA) और आईआईएम कलकत्ता पीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन के तहत बनी ग्रामीण सड़कों के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का 4 साल तक अध्ययन करेंगे।
मुख्य बातें
- NRIDA और IIM कलकत्ता ने 4 साल के दीर्घकालिक प्रभाव अध्ययन के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
- अध्ययन में 10 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 50 जिलों, 150 ब्लॉकों और 250 सड़कों को शामिल किया जाएगा।
- सामाजिक-आर्थिक बदलाव और आवाजाही की जांच के लिए लगभग 5,000 ग्रामीण परिवारों का सर्वे होगा।
- यह अध्ययन पीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन योजनाओं के तहत निर्मित सड़कों पर केंद्रित है।
- सर्वेक्षण तीन चरणों में होगा: 14 माह बेसलाइन, 12 माह ट्रांजिशन और 22 माह एंडलाइन।
ग्रामीण सड़क प्रभाव अध्ययन क्या है?
ग्रामीण सड़क प्रभाव का व्यापक और दीर्घकालिक मूल्यांकन करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (NRIDA) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कलकत्ता (IIM Calcutta) के बीच चार साल का एक विशेष समझौता हुआ है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) और पीएम-जनमन (PM-JANMAN) योजना के तहत बनाई जा रही सड़कों का ग्रामीण जनजीवन पर पड़ने वाले दूरगामी असर का साक्ष्य-आधारित अध्ययन करना है।
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की पहल पर हुए इस समझौते के तहत विशेषज्ञ टीम देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर जमीनी स्तर पर डेटा जुटाएगी। इस चार वर्षीय विस्तृत अध्ययन से यह स्पष्ट हो सकेगा कि पक्की सड़कों के निर्माण से ग्रामीण इलाकों में आवागमन, आजीविका और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तक लोगों की पहुंच में कितना सुधार दर्ज किया गया है।
अध्ययन का दायरा और प्रमुख आंकड़े
इस चार साल के दीर्घकालिक प्रभाव आकलन अध्ययन के तहत देश के 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया जाएगा। अनुसंधान के दौरान 50 जिलों, 150 ब्लॉकों और 250 से अधिक ग्रामीण सड़कों को सर्वेक्षण के लिए चुना गया है। इस दौरान लगभग 5,000 ग्रामीण परिवारों से सीधे बातचीत कर उनका विस्तृत डेटा दर्ज किया जाएगा।
अध्ययन के अंतर्गत शामिल किए जाने वाले प्रमुख बिंदु और भौगोलिक दायरा इस प्रकार है:
- शामिल राज्य व केंद्र शासित प्रदेश: आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम और उत्तराखंड।
- सर्वेक्षण का दायरा: 10 राज्यों के 50 जिलों, 150 ब्लॉकों और 250 ग्रामीण सड़कों का संपूर्ण कवरेज।
- परिवारों का चयन: सामाजिक-आर्थिक बदलाव जांचने के लिए लगभग 5,000 ग्रामीण परिवारों का व्यापक सर्वे।
- हस्ताक्षरकर्ता: NRIDA की महानिदेशक अदिति सिंह (आईएएस) और IIM कलकत्ता के निदेशक प्रोफेसर आलोक कुमार राय।
- वरिष्ठ उपस्थिति: ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में करार।
अध्ययन की समयसीमा और तीन मुख्य चरण
शोधकर्ताओं द्वारा इस अध्ययन को तीन स्पष्ट चरणों में पूरा किया जाएगा ताकि समय के साथ होने वाले क्रमिक परिवर्तनों का सटीक रिकॉर्ड रखा जा सके। इसके लिए बेसलाइन सर्वे और एंडलाइन सर्वे का वैज्ञानिक ढांचा तैयार किया गया है।
प्रथम चरण में सड़क निर्माण से पूर्व की स्थिति दर्ज करने के लिए 14 महीने का बेसलाइन सर्वेक्षण आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 12 महीने की परिवर्तन अवधि होगी जिसमें सड़क निर्माण और शुरुआती उपयोग का अवलोकन किया जाएगा। अंतिम चरण में 22 महीनों का एंडलाइन सर्वेक्षण किया जाएगा, जिससे सड़क बनने के बाद आए स्थायी बदलावों की तुलनात्मक समीक्षा संभव हो सके।
ग्रामीण सड़क प्रभाव से सामाजिक-आर्थिक बदलाव
ग्रामीण सड़क प्रभाव केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे ग्रामीण अर्थशास्त्र को नया रूप देता है। इस अध्ययन के माध्यम से यह जांचा जाएगा कि बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से ग्रामीण परिवारों की आय, आजीविका के साधन और दैनिक जीवन की गुणवत्ता में किस तरह का बदलाव आया है।
पक्की सड़कों के निर्माण से कृषि उत्पादों को नजदीकी मंडियों तक समय पर पहुंचाना आसान हो जाता है, जिससे किसानों को उपज का बेहतर दाम मिलता है। इसके अतिरिक्त, गैर-कृषि गतिविधियों, छोटे व्यापार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। इस अध्ययन में यह भी देखा जाएगा कि पक्की सड़कें बनने से ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर होने वाले अनियोजित पलायन में कितनी कमी दर्ज की गई है।
इसके अलावा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच पर पड़ने वाले असर का भी गहन मूल्यांकन होगा। पक्की सड़कें होने से बच्चे, विशेषकर लड़कियां, उच्च शिक्षा के लिए आसानी से बड़े कस्बों तक जा सकती हैं। आपातकालीन स्थिति में गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना संभव हो पाता है, जिससे ग्रामीण मृत्यु दर पर सकारात्मक नियंत्रण मिलता है।
पीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन का महत्व
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का चौथा चरण (PMGSY-IV) और पीएम-जनमन (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) केंद्र सरकार की प्रमुख विकास योजनाएं हैं। पीएमजीएसवाई का उद्देश्य देश की असंबद्ध बसावटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ना है। चौथे चरण के तहत दुर्गम ग्रामीण इलाकों में संपर्क मार्गों को और मजबूत बनाया जा रहा है।
वहीं पीएम-जनमन योजना विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूहों (PVTG) की बसावटों तक बुनियादी ढांचा पहुंचाने के लिए काम कर रही है। इन दोनों योजनाओं का समन्वित अध्ययन यह समझने में मदद करेगा कि सबसे पिछड़े और दूरदराज के क्षेत्रों तक विकास के लाभ किस हद तक पहुंचे हैं। NRIDA और IIM कलकत्ता का यह साझा प्रयास भविष्य में नीति निर्धारण और बजट आवंटन को अधिक व्यावहारिक बनाएगा।
यह भी जानें: ग्रामीण अवसंरचना का भविष्य
भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी गांवों में निवास करता है। जब तक ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं बनाया जाएगा, तब तक देश की समग्र आर्थिक वृद्धि को गति देना संभव नहीं है। पक्की सड़कें ग्रामीण विकास का आधार स्तंभ हैं।
इस अध्ययन से प्राप्त निष्कर्ष केवल यह नहीं बताएंगे कि सड़कें बनी हैं या नहीं, बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि उन सड़कों के रखरखाव की स्थिति क्या है और उनसे आम जनजीवन को दीर्घकालिक लाभ मिल पा रहा है या नहीं। यदि अध्ययन में कार्यान्वयन से जुड़ी कोई कमी सामने आती है, तो सरकार उसे सुधारने के लिए त्वरित नीतिगत कदम उठा सकेगी। इससे आने वाले समय में ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता और उपयोगिता दोनों में सुधार होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? NRIDA और IIM कलकत्ता के बीच किस बात को लेकर समझौता हुआ है?
उत्तर। NRIDA और IIM कलकत्ता के बीच PMGSY-IV और पीएम-जनमन के तहत बनी सड़कों के चार साल के दीर्घकालिक प्रभाव आकलन अध्ययन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
प्रश्न? इस अध्ययन में कितने राज्यों और परिवारों को शामिल किया जाएगा?
उत्तर। इस अध्ययन के तहत 10 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 50 जिलों, 150 ब्लॉकों, 250 सड़कों और लगभग 5,000 ग्रामीण परिवारों को शामिल करके डेटा एकत्र किया जाएगा।
प्रश्न? ग्रामीण सड़क प्रभाव अध्ययन की कुल समयसीमा क्या रखी गई है?
उत्तर। यह अध्ययन कुल चार वर्षों तक चलेगा, जिसमें 14 महीने का बेसलाइन सर्वे, 12 महीने की परिवर्तन अवधि और 22 महीने का एंडलाइन सर्वे शामिल है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






