
विकसित भारत अभियान के तहत ‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा गर्व’ पहल में 2.5 लाख से अधिक युवाओं ने स्वास्थ्य जांच और मेडिटेशन सत्रों में भाग लिया।
मुख्य बातें
- देश भर में 400 से अधिक स्थानों पर ‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा गर्व’ कार्यक्रम आयोजित किए गए।
- अभियान में 2.5 लाख से अधिक युवाओं और नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
- ‘माई भारत’ और सहयोगी संगठनों के माध्यम से स्वास्थ्य जांच शिविर और मेडिटेशन सत्र हुए।
- सहभागियों को शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए ‘नशा-मुक्त युवा शपथ’ दिलाई गई।
नशा मुक्त युवा पहल के अंतर्गत विकसित भारत अभियान के तहत देश भर में 400 से अधिक स्थानों पर ‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा गर्व’ शीर्षक से विशेष गतिविधियां आयोजित की गईं। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य युवाओं में शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती को बढ़ावा देना तथा नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना है।
नशा मुक्त युवा अभियान क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
नशा मुक्त युवा पहल का प्राथमिक उद्देश्य देश की युवा आबादी में शारीरिक और मानसिक सेहत को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से नशीले पदार्थों के नुकसानदेह प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाई जाती है। ‘माई भारत’ मंच के जरिए आयोजित इन कार्यक्रमों में युवाओं को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने और स्वास्थ्य जांच शिविरों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता है।
पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, ‘माई भारत’ (MY Bharat) और उसके सहयोगी संगठनों ने पूरे देश में 400 से अधिक केंद्रों पर इन कार्यक्रमों का आयोजन किया। 27 सितंबर 2026 को आयोजित इन गतिविधियों में 2.5 लाख से अधिक युवाओं और नागरिकों ने भाग लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा का संकल्प व्यक्त किया।
400 से अधिक स्थानों पर कौन-कौन सी गतिविधियां आयोजित हुईं?
इस देशव्यापी पहल के दौरान आयोजित शिविरों को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया था—शारीरिक स्वास्थ्य जांच, विशेषज्ञों के परामर्श सत्र और मानसिक तंदुरुस्ती के लिए ध्यान अभ्यास। सहभागी स्थलों पर नि:शुल्क हेल्थ चेक-अप कैंप लगाए गए, जहां युवाओं को अपनी शारीरिक स्थिति को समझने का अवसर मिला।
स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सत्रों के दौरान प्रतिभागियों को बचाव-आधारित स्वास्थ्य सेवा (Preventive Healthcare) का महत्व समझाया। विशेषज्ञों ने बताया कि जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव करके गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, युवाओं को सही समय पर डॉक्टरी सलाह लेने और पौष्टिक आहार चुनने के लाभ बताए गए।
मानसिक स्वास्थ्य और ध्यान सत्रों पर रहा विशेष जोर
शारीरिक मजबूती के साथ-साथ मानसिक तंदुरुस्ती पर भी ध्यान दिया गया। शिविरों में मेडिटेशन और वेलनेस सेशन आयोजित किए गए, जिनमें युवाओं को दैनिक जीवन के तनाव से निपटने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए।
इन सत्रों का मकसद युवाओं में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था ताकि वे नकारात्मक दबावों का सामना कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि जब युवा मानसिक रूप से मजबूत होते हैं, तो वे व्यसन और गलत आदतों की ओर आकर्षित नहीं होते। मेडिटेशन के अभ्यासों ने प्रतिभागियों को अपनी दिनचर्या में मानसिक शांति को शामिल करने के लिए प्रेरित किया।
‘नशा-मुक्त युवा शपथ’ से मजबूत हुई सामाजिक भागीदारी
आयोजन की एक प्रमुख गतिविधि ‘नशा-मुक्त युवा शपथ’ थी। देश भर के 400 से अधिक केंद्रों पर मौजूद प्रतिभागियों को नशीले पदार्थों से दूर रहने और एक स्वच्छ व स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प दिलाया गया।
यह शपथ केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह नशा-मुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनी। युवाओं ने वादा किया कि वे न सिर्फ स्वयं नशीले पदार्थों का त्याग करेंगे, बल्कि अपने परिवार, दोस्तों और समाज को भी इस दिशा में जागरूक करेंगे।
यह भी जानें: माई भारत प्लेटफॉर्म और विकसित भारत का दृष्टिकोण
केंद्र सरकार द्वारा स्थापित ‘माई भारत’ (Mera Yuva Bharat) प्लेटफॉर्म युवाओं को देश के विकास कार्यों से जोड़ने वाला एक डिजिटल और सामुदायिक मंच है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए देश की युवा जनशक्ति को स्वस्थ और व्यसन-मुक्त रखना सबसे पहली प्राथमिकता है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा युवा मामलों के मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे अभियानों का मुख्य केंद्र यही है कि युवाओं में नशीले पदार्थों की मांग को समाप्त किया जाए। ‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा गर्व’ अभियान इसी दिशा में एक ऐसा प्रयास है जो युवाओं को यह समझाता है कि स्वास्थ्य ही उनकी सबसे बड़ी संपत्ति और गर्व का विषय है।
अभियान का समाज पर प्रभाव
इस प्रकार के बड़े पैमाने पर आयोजित कार्यक्रमों का प्रभाव दीर्घकालिक होता है। जब 2.5 लाख से अधिक लोग एक साथ स्वास्थ्य और नशा मुक्ति के लिए आगे आते हैं, तो इसका संदेश गांव और शहरों के हर कोने तक पहुंचता है।
- स्वास्थ्य चेतना: लाखों युवाओं ने अपनी स्वास्थ्य जांच कराई और अपनी फिटनेस के प्रति गंभीर हुए।
- रोकथाम पर ध्यान: बीमारियों और लत के शुरुआती लक्षणों को पहचानने के तरीकों पर जानकारी प्राप्त हुई।
- सामुदायिक एकजुटता: युवाओं ने नशा-मुक्त समाज बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर समूह बनाए।
- सकारात्मक ऊर्जा: खेल, योग और ध्यान के माध्यम से युवाओं को अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाने का मार्ग मिला।
युवाओं के लिए स्वस्थ जीवनशैली के जरूरी नियम
नशीले पदार्थों से दूर रहने और एक बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए विशेषज्ञों ने निम्नलिखित आदतों को अपनाने का सुझाव दिया है:
नियमित रूप से प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट का व्यायाम या योग करें। अपने भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियां और प्रचुर मात्रा में पानी शामिल करें। यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव अथवा किसी लत की समस्या से जूझ रहा है, तो बिना झिझक स्वास्थ्य पेशेवरों या हेल्पलाइन की मदद लें। इसके अलावा, सामाजिक और खेलकूद से जुड़ी गतिविधियों में अपनी भागीदारी बढ़ाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: ‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा गर्व’ कार्यक्रम का आयोजन किस संस्था द्वारा किया गया?
उत्तर: यह कार्यक्रम विकसित भारत अभियान के तहत ‘माई भारत’ (MY Bharat) और उसके सहयोगी संगठनों द्वारा आयोजित किया गया।
प्रश्न: इस राष्ट्रव्यापी पहल में कितने लोगों ने भाग लिया?
उत्तर: पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार देश भर में 400 से अधिक स्थानों पर आयोजित इन कार्यक्रमों में 2.5 लाख से अधिक युवाओं और नागरिकों ने भाग लिया।
प्रश्न: इस अभियान के तहत शिविरों में क्या-क्या गतिविधियां हुईं?
उत्तर: शिविरों में हेल्थ चेक-अप कैंप, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के परामर्श सत्र, मेडिटेशन सत्र और ‘नशा-मुक्त युवा शपथ’ का आयोजन किया गया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






