
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है, जिसमें जीवन में सफलता हासिल करने के लिए छह जरूरी गुणों का उल्लेख किया गया है।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 सितंबर 2026 को संस्कृत सुभाषितम् साझा किया।
- इस सुभाषित में जीवन में सफलता के छह गुणों का वर्णन किया गया है।
- वे छह गुण हैं: परिश्रम (उद्यम), साहस, धैर्य, कार्य करने की शक्ति (बुद्धि), विद्या और पराक्रम।
- पीएम मोदी के अनुसार, इन गुणों वाले व्यक्ति की मदद के लिए दैवीय सहायता भी आगे आती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है जो जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए छह अनिवार्य गुणों पर प्रकाश डालता है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस प्राचीन श्लोक के माध्यम से नागरिकों को कर्मठता और सकारात्मकता का संदेश दिया है। उन्होंने अपने संदेश में रेखांकित किया है कि जिन इंसानों में ये खास गुण समाहित होते हैं, वहां ईश्वर या दैवीय शक्तियां भी मदद के लिए स्वतः उपस्थित हो जाती हैं।
सफलता के लिए संस्कृत सुभाषितम् का महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किया गया संस्कृत सुभाषितम् इंसान को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः। षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्॥
इस प्राचीन श्लोक का सीधा अर्थ यह है कि जहां परिश्रम, साहस, धैर्य, कार्य करने की क्षमता, विद्या और पराक्रम—ये छह गुण एक साथ मौजूद होते हैं, वहां दैवीय सहायता भी स्वयं पहुंचती है। भारत में प्राचीन काल से ही नीतिग्रंथों और वेदों में इस तरह के सुभाषितों का उपयोग मानव जीवन को बेहतर बनाने और नेतृत्व क्षमता को विकसित करने के लिए किया जाता रहा है। प्रधानमंत्री अक्सर ऐसे श्लोकों के जरिए युवाओं और देशवासियों को कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहने की सीख देते हैं।
वे छह गुण कौन से हैं जो दिलाते हैं सफलता?
इस सुभाषित में जिन छह गुणों का विस्तार से जिक्र किया गया है, वे आधुनिक दौर के कामकाजी जीवन और व्यक्तिगत संघर्षों में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने प्राचीन काल में थे। इन गुणों की बदौलत कोई भी व्यक्ति बड़ी से बड़ी बाधा को पार कर सकता है।
- उद्यम (परिश्रम): बिना लगातार मेहनत और प्रयास के किसी भी लक्ष्य को पाना असंभव है।
- साहस: जोखिम उठाने और नई चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत।
- धैर्य: कठिन समय में अडिग रहना और जल्दबाजी में गलत फैसला न लेना।
- बुद्धि (कार्य करने की शक्ति): समस्याओं को सुलझाने और सही दिशा में निर्णय लेने की मानसिक क्षमता।
- विद्या: ज्ञान, कौशल और सही शिक्षा जो इंसान को योग्य बनाती है।
- पराक्रम: अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए वीरता और दृढ़ संकल्प दिखाना।
इसका असर और नागरिकों के लिए संदेश
जब देश का शीर्ष नेतृत्व इस प्रकार के सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को सार्वजनिक मंचों पर साझा करता है, तो इसका सीधा प्रभाव आम नागरिकों, विशेषकर युवा वर्ग पर पड़ता है। इस प्रकार की पहल से लोगों को अपनी संस्कृति और प्राचीन साहित्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों, उद्यमियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए ये छह गुण सफलता की एक अचूक कुंजी माने जाते हैं। इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने भी अपने जीवन में इन छह बातों को उतारा है, उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी इतिहास रचा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कौन सा सुभाषित साझा किया है? उत्तर। प्रधानमंत्री ने ‘उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः…’ नामक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है।
प्रश्न? इस सुभाषित का मुख्य संदेश क्या है? उत्तर। इस श्लोक का संदेश है कि परिश्रम, साहस, धैर्य, बुद्धि, विद्या और पराक्रम रखने वाले व्यक्ति की सहायता स्वयं ईश्वर करते हैं।
प्रश्न? यह सुभाषित कहां साझा किया गया? उत्तर। प्रधानमंत्री ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 29 सितंबर 2026 को साझा किया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






