मंगलवार, सितम्बर 29, 2026

भारत में पूर्ण साक्षरता की ओर बड़ा कदम: 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने हासिल किया लक्ष्य

Date:

पूर्ण साक्षरता

पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के अनुसार, भारत ने पिछले आठ दशकों में अपनी साक्षरता दर में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने खुद को पूरी तरह साक्षर घोषित कर दिया है।

मुख्य बातें

  • पीआईबी के अनुसार, 1947 में देश की समग्र साक्षरता दर मात्र 14% थी, जो अब बढ़कर 81.1% (PLFS 2025 के अनुसार) हो गई है।
  • लद्दाख, मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, अंडमान-निकोबार, सिक्किम, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर ने खुद को पूरी तरह साक्षर घोषित किया है।
  • उल्लास (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) के तहत 2022-27 के दौरान 5 करोड़ शिक्षार्थियों को शामिल करने का लक्ष्य है, जिसमें अब तक 3.3 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों ने मूल्यांकन परीक्षा दी है।
  • उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) 2014-15 के 23.7% से बढ़कर 2023-24 में 30% हो गया है।

भारत अपनी स्वतंत्रता के बाद से शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में लंबी छलांग लगा रहा है, जहाँ पूर्ण साक्षरता हासिल करने की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय साक्षरता मिशन और विभिन्न सरकारी पहलों के प्रभाव से देश के हर कोने में शिक्षा की अलख जग रही है।

पूर्ण साक्षरता की ओर भारत की प्रगति और ताजा आंकड़े

शिक्षा मंत्रालय स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के अनुसार, किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में 95% साक्षरता को पूर्ण साक्षरता के बराबर माना जाता है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, देश की कुल साक्षरता दर अब 81.1% हो गई है।

शहरी क्षेत्रों में सात वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की साक्षरता दर 89% दर्ज की गई, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 77.4% रहा है। 1947 में जब देश स्वतंत्र हुआ था, तब समग्र साक्षरता दर महज 14% थी और महिलाओं की साक्षरता दर केवल 8% पर सिमटी हुई थी। दशकों के सुनियोजित प्रयासों के बाद अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

किन राज्यों ने खुद को पूरी तरह साक्षर घोषित किया है?

उल्लास और अन्य वयस्क शिक्षा कार्यक्रमों के जरिए देश के दूरदराज इलाकों तक शिक्षा पहुंचाई जा रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 से 2026 के बीच देश के दस (10) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने खुद को पूर्ण साक्षर घोषित कर दिया है।

  • लद्दाख
  • मिजोरम
  • गोवा
  • त्रिपुरा
  • हिमाचल प्रदेश
  • चंडीगढ़
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
  • सिक्किम
  • उत्तराखंड
  • जम्मू और कश्मीर

इन क्षेत्रों में वयस्क शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से असाक्षर वयस्कों को बुनियादी पठन-पाठन और गणितीय कौशल में प्रशिक्षित किया गया है।

उल्लास और निपुण भारत योजनाओं का योगदान

सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत साक्षरता के दायरे को केवल बुनियादी पढ़ाई तक सीमित न रखकर डिजिटल और वित्तीय साक्षरता तक विस्तारित किया है। इसके लिए उल्लास (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) और निपुण भारत जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं।

उल्लास योजना के तहत 15 वर्ष से अधिक उम्र के उन वयस्कों को लक्षित किया जाता है जिनकी औपचारिक स्कूली शिक्षा छूट गई थी। इस योजना के लिए 2022-27 की अवधि हेतु 1,037.90 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है, जिसके जरिए 5 करोड़ शिक्षार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य है। वर्तमान में इस ऐप पर 4.03 करोड़ से अधिक पंजीकृत शिक्षार्थी और 52.20 लाख स्वयंसेवक जुड़े हैं। वहीं, निपुण भारत मिशन के जरिए 3 से 8 वर्ष के बच्चों में बुनियादी साक्षरता और अंकगणित का ज्ञान मजबूत किया जा रहा है।

स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा में सुधार

साक्षरता दर में सुधार के साथ-साथ विद्यालयों में बच्चों के दाखिले और उनकी टिके रहने की दरों में भी बड़ा सुधार देखा गया है। UDISE+ रिपोर्ट (2025-26) के अनुसार, देश भर के स्कूलों में 24.72 करोड़ से अधिक विद्यार्थी नामांकित हैं।

इसके अलावा, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकन 2014-15 के 3.42 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 4.50 करोड़ हो गया है। इसी अवधि में सकल नामांकन अनुपात यानी GER 23.7% से बढ़कर 30% पर पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत वर्ष 2035 तक 50% GER हासिल करने के लक्ष्य को बल देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? पूर्ण साक्षरता का आधिकारिक मानदंड क्या है?उत्तर। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में 95% साक्षरता दर को पूर्ण साक्षरता के बराबर माना जाता है।

प्रश्न? उल्लास योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?उत्तर। उल्लास (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) का मुख्य उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के उन वयस्कों को साक्षर बनाना है जिनकी औपचारिक शिक्षा छूट गई थी, ताकि उन्हें जीवन भर सीखने के अवसर मिल सकें।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी आज पत्रिका में वरिष्ठ संपादक हैं और शिक्षा, परीक्षाएँ एवं परिणाम, खेल, मनोरंजन, धर्म-संस्कृति तथा लाइफस्टाइल कवरेज की ज़िम्मेदारी संभालती हैं। वे परीक्षा अधिसूचनाओं, रिजल्ट, प्रवेश प्रक्रिया, त्योहारों की परंपराओं और स्वास्थ्य-जीवनशैली से जुड़ी सामग्री को सरल, सटीक और सत्यापित रूप में पाठकों तक पहुँचाती हैं। स्वास्थ्य से जुड़े लेखों में वे हमेशा योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेने की सलाह जोड़ती हैं। सुझाव/सुधार: corrections@aajpatrika.com।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

गुलवीर सिंह ने एशियाई खेलों में जीता रजत पदक, पीएम मोदी ने दी बधाई

गुलवीर सिंह ने एशियाई खेलों की पुरुषों की 1500 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की सराहना की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, सफलता के छह गुण बताए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सफलता दिलाने वाले छह गुणों को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। जानें इस सुभाषित का अर्थ और महत्व।

प्रधानमंत्री ने एशियन गेम्स में यशवीर सिंह और रोहित यादव को दी बधाई

एशियन गेम्स में यशवीर सिंह और रोहित यादव ने जैवलिन थ्रो में रजत और कांस्य पदक जीता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई, जानिए पूरी खबर।

पारुल चौधरी ने एशियाई खेलों की 5000 मीटर दौड़ में जीता कांस्य पदक

पारुल चौधरी ने एशियाई खेलों में महिलाओं की 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी इस शानदार उपलब्धि पर दी बधाई।
हमारे बारे में · संपादकीय नीति · सुधार नीति · स्वामित्व एवं वित्त पोषण · गोपनीयता नीति · संपर्क करें
© 2026 Aaj Patrika