
केरल के कोल्लम में आयोजित विश्व सेवा दिनम पर गृह मंत्री अमित शाह ने मां अमृतानंदमयी के सामाजिक व मानवीय कार्यों की सराहना की।
मुख्य बातें
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केरल के कोल्लम में 73वें जन्मदिवस समारोह में शामिल हुए।
- अमृतानंदमयी मठ ने गुजरात भूकंप पीड़ितों के लिए 1200 घरों का गांव बसाया था।
- मठ द्वारा वर्तमान में देशभर में 86 अमृता विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है।
- पर्यावरण संरक्षण हेतु 10 लाख से अधिक वृक्षारोपण और 101 गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने केरल के कोल्लम में मां अमृतानंदमयी के 73वें जन्मदिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस अवसर को विश्व सेवा दिनम के रूप में मनाया गया। अपने संबोधन में गृह मंत्री ने समाज कल्याण, आपदा राहत और निस्वार्थ सेवा के क्षेत्र में अमृतानंदमयी मठ द्वारा किए गए कार्यों को रेखांकित किया।
मां अमृतानंदमयी का 73वां जन्मदिवस समारोह क्यों खास है?
मां अमृतानंदमयी के 73वें जन्मदिवस को विश्व सेवा दिनम के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें उनके पांच दशकों के सामाजिक व मानवीय कार्यों का सम्मान किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्यक्रम में भाग लेकर उनके करुणा, भाव और कर्म के सिद्धांतों को रेखांकित किया और विभिन्न संकटों में मठ द्वारा दिए गए योगदान को सराहा।
गृह मंत्री अमित शाह का संबोधन और प्रमुख बिंदु
कोल्लम स्थित परायकडवु में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अमृतानंदमयी जी के सान्निध्य में आकर मनुष्य होने का वास्तविक अर्थ समझ आता है। उन्होंने कहा कि नियम और व्यवस्थाएं समाज को संभालती हैं, लेकिन संवेदना समाज को जोड़ने का काम करती है। अम्मा का आलिंगन विश्वभर के करोड़ों लोगों को यह अहसास कराता है कि वे अपने संकट में अकेले नहीं हैं।
गृह मंत्री ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उन्हें 27 सितंबर 2015, 03 अप्रैल 2016 और 04 जून 2023 को भी मां अमृतानंदमयी से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि विश्व सेवा दिनम पर आशीर्वाद प्राप्त करना उनके जीवन की बड़ी उपलब्धि है।
गुजरात भूकंप से लेकर आपदा प्रबंधन में मठ का योगदान
वर्ष 2001 में गुजरात में आए भीषण विनाशकारी भूकंप का जिक्र करते हुए अमित शाह ने बताया कि उस समय अमृतानंदमयी जी की करुणा का प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिला था। भूकंप के बाद राहत कार्य चलाते हुए मठ ने वहां 1200 सुंदर पक्के घर बनाकर एक पूरा गांव बसा दिया था।
इसके साथ ही वहां एक टाउनहॉल, शिक्षण संस्थान और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। आज उस पूरे गांव की पहचान ‘अम्मा का गांव’ के रूप में बनी हुई है। गृह मंत्री ने कहा कि चाहे गुजरात का भूकंप हो, हिंद महासागर में आई सुनामी हो, उत्तराखंड की दैवीय आपदा हो, वायनाड का भीषण भूस्खलन हो या फिर कोविड-19 वैश्विक महामारी का संकट रहा हो, हर कठिन परिस्थिति में मठ और उसके अनुयायियों ने अनुकरणीय सेवा कार्य किए हैं।
अमृतानंदमयी मठ की प्रमुख सामाजिक पहल और आंकड़े
संस्थागत रूप से समाज सेवा को वैश्विक अभियान बनाने के प्रयासों को रेखांकित करते हुए प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की रिपोर्ट में कई आंकड़े सामने रखे गए हैं:
- अमृता विद्यालय: वर्तमान में देशभर में 86 अमृता विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
- पुनर्वास गांव: वर्ष 2001 के गुजरात भूकंप के बाद 1200 पक्के मकानों का निर्माण कर पूरा गांव बसाया गया।
- पर्यावरण संरक्षण: मठ के अभियानों के माध्यम से 10 लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।
- ग्राम विकास: 101 गांवों को गोद लेकर उन्हें पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
- वैश्विक मंच: संयुक्त राष्ट्र के मिलेनियम विश्व शांति सम्मेलन और विश्व धर्म संसद जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष और सेवा का संदेश प्रस्तुत किया गया।
- सिविल-20 की अध्यक्षता: भारत की जी-20 (G20) अध्यक्षता के दौरान नागरिक समाज के समूह सिविल-20 (C20) की कमान मां अमृतानंदमयी ने संभाली थी।
मां अमृतानंदमयी का जीवन परिचय और प्रारंभिक संघर्ष
मां अमृतानंदमयी का जन्म 27 सितंबर 1953 को केरल के कोल्लम जिले के तटीय गांव परायकडवु में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम माता अमृतानंदमयी देवी (सुधामणि) था। एक अभावग्रस्त परिवेश में पली-बढ़ी बच्ची ने आगे चलकर विश्व स्तर पर करोड़ों लोगों के दुखों को दूर करने और उन्हें सांत्वना देने का मार्ग प्रशस्त किया।
उनके जीवन और दर्शन को मुख्य रूप से तीन स्तंभों में विभाजित किया जा सकता है—भाव, कर्म और करुणा। अपने निस्वार्थ भाव को एक सुदृढ़ वैश्विक संस्था के रूप में बदलकर उन्होंने मानव कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है। उनके मठ द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आपदा राहत, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं।
नशामुक्त भारत अभियान और सामाजिक प्रभाव
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए नशामुक्त भारत अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मां अमृतानंदमयी ने इस राष्ट्रीय अभियान को अपना पूर्ण आशीर्वाद दिया है। इस आशीर्वाद के बल पर भारत को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल करने में सफलता मिलेगी।
शास्त्रों के ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के मूल मंत्र को अपनाकर उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित और पीड़ित वर्गों के कल्याण में समर्पित किया है। उनका यह प्रयास न केवल भारत में बल्कि दुनिया के कई देशों में करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? मां अमृतानंदमयी का जन्म कब और कहां हुआ था?
उत्तर। मां अमृतानंदमयी का जन्म 27 सितंबर 1953 को केरल के कोल्लम जिले के परायकडवु गांव में हुआ था।
प्रश्न? गुजरात में 2001 के भूकंप के बाद मठ ने क्या राहत कार्य किया था?
उत्तर। अमृतानंदमयी मठ ने गुजरात भूकंप के बाद प्रभावितों के लिए 1200 सुंदर मकानों का निर्माण कर पूरा गांव बसाया था, जिसमें अस्पताल, स्कूल और टाउनहॉल जैसी सुविधाएं भी दी गईं।
प्रश्न? जी-20 सम्मेलन के दौरान मां अमृतानंदमयी को क्या जिम्मेदारी दी गई थी?
उत्तर। भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान उन्हें सिविल-20 (C20) समूह की अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






