
विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने कर्तव्य भवन-2 में स्वच्छता से समृद्धि विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित कर स्वच्छता को दिनचर्या में ढालने का संदेश दिया।
मुख्य बातें
- विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने 24 सितंबर 2026 को कर्तव्य भवन-2 में व्याख्यान आयोजित किया।
- यह कार्यक्रम 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले स्वच्छता ही सेवा अभियान का हिस्सा है।
- जन शिक्षण संस्थान की निदेशक कुलविंदर कौर और इंडिया-एड्स की महासचिव अर्चना ने विचार रखे।
- व्याख्यान का मुख्य विषय ‘स्वच्छता से समृद्धि’ और व्यक्तिगत तथा संस्थागत जिम्मेदारी पर केंद्रित रहा।
विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026 के अंतर्गत नई दिल्ली में ‘स्वच्छता से समृद्धि’ विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया। 24 सितंबर 2026 को कर्तव्य भवन-2 में आयोजित इस कार्यक्रम में सरकारी कामकाज और दैनिक जीवन में सफाई के आर्थिक व सामाजिक पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई। इस सत्र का प्राथमिक उद्देश्य प्रशासनिक कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच स्वच्छता को लेकर व्यावहारिक बदलाव लाना था।
स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान केंद्र सरकार द्वारा 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा एक राष्ट्रव्यापी स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत, सामुदायिक और संस्थागत स्तर पर सफाई के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना, कार्यस्थलों में स्वच्छ वातावरण निर्मित करना और स्वच्छता को स्वास्थ्य तथा आर्थिक समृद्धि से जोड़ना है।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह व्याख्यान आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा जारी संयुक्त दिशानिर्देशों के तहत आयोजित किया गया। विधायी विभाग इस पखवाड़े के दौरान अपने कार्यालय परिसर में कई जागरूकता और सफ़ाई गतिविधियों का संचालन कर रहा है।
कर्तव्य भवन-2 में ‘स्वच्छता से समृद्धि’ पर विशेषज्ञ विचार
कर्तव्य भवन-2 परिसर में आयोजित इस विशेष सत्र में दो प्रमुख विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। पीरागढ़ी, पश्चिम दिल्ली स्थित जन शिक्षण संस्थान की निदेशक सुश्री कुलविंदर कौर तथा द्वारका स्थित इंडिया-एड्स (NGO) की महासचिव श्रीमती अर्चना ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। दोनों विशेषज्ञों ने स्वच्छता को केवल एक शारीरिक क्रिया न मानकर गरिमापूर्ण जीवन का मुख्य आधार बताया।
सत्र में बोलते हुए सुश्री कुलविंदर कौर ने कहा कि जब कोई संस्थान या समाज स्वच्छता को अपनाता है, तो बीमारियां घटती हैं और कार्यक्षमता बढ़ती है। उन्होंने रेखांकित किया कि व्यक्तिगत स्वच्छता का सीधा असर पूरे परिवार और अंततः देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। वहीं श्रीमती अर्चना ने संस्थागत स्वच्छता पर जोर देते हुए कहा कि कार्यालयों में साफ-सुथरा माहौल कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार लाता है।
स्वच्छता और आर्थिक समृद्धि का सीधा संबंध
कार्यक्रम के दौरान ‘स्वच्छता से समृद्धि’ के व्यापक संदेश की गहराई से व्याख्या की गई। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता, स्वास्थ्य, उत्पादकता और सतत विकास आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। जब परिसर स्वच्छ रहता है, तो संक्रमण और बीमारियों का खतरा कम होता है। इससे चिकित्सा पर होने वाला खर्च घटता है और कार्य दिवसों का नुकसान नहीं होता।
विधायी विभाग के अधिकारियों ने इस बात को स्वीकार किया कि स्वच्छता ही सेवा की भावना को दैनिक प्रशासनिक कार्यों में शामिल करना आवश्यक है। सार्वजनिक और सरकारी स्थानों पर डस्टबिन का सही प्रयोग, कचरे का पृथक्करण और कागजी कचरे का उचित निपटान ऐसे छोटे कदम हैं जो दीर्घकालिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
इसका असर: सरकारी दफ्तरों और कर्मचारियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस प्रकार के आयोजनों का सीधा प्रभाव सरकारी दफ्तरों की कार्यसंस्कृति पर पड़ता है। विधायी विभाग में इस व्याख्यान के आयोजन से कर्मचारियों में कार्यस्थल की स्वच्छता को लेकर नई जागरूकता पैदा हुई है।
- कार्यालय परिसरों में कचरा प्रबंधन और फाइलों के व्यवस्थित रखरखाव को प्राथमिकता दी जाएगी।
- कर्मचारी अपने व्यक्तिगत केबिन और साझा परिसरों को साफ रखने के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेंगे।
- संक्रामक बीमारियों में कमी आने से दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति और उत्पादकता में सुधार दर्ज होगा।
- एकल-उपयोग प्लास्टिक के बहिष्कार और रिसाइक्लिंग जैसी पर्यावरण-अनुकूल आदतों को बढ़ावा मिलेगा।
स्वच्छ भारत के निर्माण में मंत्रालयों की भूमिका
भारत सरकार का विधि एवं न्याय मंत्रालय देश के कानूनों और विधायी प्रारूपों को तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। ऐसे में इस विभाग द्वारा स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत सीधी भागीदारी करना यह दर्शाता है कि स्वच्छता केवल नगर निगमों की जिम्मेदारी नहीं है। हर प्रशासनिक विभाग का यह दायित्व है कि वह अपने स्तर पर स्वच्छ भारत के सपने को साकार करे।
उल्लेखनीय है कि 2 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस पखवाड़े में केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय विशेष सफाई अभियान, कबाड़ निस्तारण और जागरूकता सत्र आयोजित कर रहे हैं। विधायी विभाग का यह कदम भी इसी राष्ट्रव्यापी प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026 की अवधि क्या है?
उत्तर: यह अभियान 17 सितंबर 2026 से 2 अक्टूबर 2026 तक देशभर में आयोजित किया जा रहा है।
प्रश्न: विधायी विभाग का यह कार्यक्रम कहां आयोजित किया गया था?
उत्तर: यह व्याख्यान नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में 24 सितंबर 2026 को आयोजित किया गया था।
प्रश्न: इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता कौन थे?
उत्तर: जन शिक्षण संस्थान की निदेशक सुश्री कुलविंदर कौर और इंडिया-एड्स (एनजीओ) की महासचिव श्रीमती अर्चना इसमें मुख्य वक्ता थीं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






