
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ पहली राष्ट्रीय वर्चुअल बैठक की, जिसमें नल जल मित्र और सुजलम शक्ति कार्यक्रमों के जरिए कुशल कार्यबल तैयार करने का रोडमैप तय हुआ।
मुख्य बातें
- पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण जल क्षेत्र में 13 लाख से अधिक कार्यबल की आवश्यकता होगी।
- नए सदस्यों के लिए 510 घंटे का शॉर्ट-टर्म कोर्स और मौजूदा कर्मियों के लिए 120 घंटे का आरपीएल कार्यक्रम शुरू किया गया है।
- सुजलम शक्ति पहल के तहत 1.35 से 1.70 लाख महिलाओं को पानी की गुणवत्ता जांचने और कीटाणुशोधन के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
- राज्यों को 15 अक्टूबर 2026 तक ‘नल जल मित्र’ कोर्स अपनाने या राज्य-विशेष पाठ्यक्रम विकसित करने का निर्णय लेना है।
जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण भारत में पेयजल अवसंरचना के सतत संचालन और रखरखाव के लिए एक मजबूत और पेशेवर कार्यबल तैयार करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक पहली राष्ट्रीय वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। यह बैठक विभागीय शिखर सम्मेलन के बाद ग्रामीण पेयजल प्रणालियों की दीर्घकालिक कार्यक्षमता और जल गुणवत्ता निगरानी को बेहतर करने के रोडमैप पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी।
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 13 लाख से अधिक रोजगार के अवसर
जल जीवन मिशन की सफलता केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधनों की उपलब्धता पर भी निर्भर करती है। विभाग के अनुमान के मुताबिक, आने वाले वर्षों में ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव के लिए 13 लाख से अधिक लोगों की जरूरत पड़ेगी। इसमें तकनीशियन, ऑपरेटर, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, पंप मैकेनिक, लैब कर्मचारी, सुपरवाइज़र और जल गुणवत्ता की जांच करने वाले कर्मी शामिल हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गांवों में सुरक्षित और भरोसेमंद पेयजल सेवाएं निरंतर बनाए रखना है।
नल जल मित्र कार्यक्रम और सुजलम शक्ति पहल की शुरुआत
इस पूरी रणनीति का मुख्य केंद्र बिंदु ‘नल जल मित्र’ कार्यक्रम को लागू करना है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) के साथ मिलकर यह योग्यता विकसित की है।
- नए सदस्यों के लिए 510 घंटे का शॉर्ट-टर्म प्रशिक्षण कोर्स।
- मौजूदा ऑपरेटरों, प्लंबरों और इलेक्ट्रीशियनों के लिए 120 घंटे का रिकग्निशन ऑफ़ प्रायर लर्निंग प्रोग्राम।
- सुजलम शक्ति पहल के जरिए 1.35 से 1.70 लाख महिलाओं को जल परीक्षण और कीटाणुशोधन में प्रशिक्षित करना।
- जिला-आधारित प्रशिक्षण योजनाओं के लिए राज्य कौशल विकास मिशन और आईटीआई के साथ तालमेल।
महिलाओं की भागीदारी और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा
श्रीमती स्वाति मीना नाइक, संयुक्त सचिव ने बताया कि महिलाओं के नेतृत्व वाली ‘सुजलम शक्ति’ पहल ग्रामीण स्तर पर पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी के लिए एक सामुदायिक आधारित तंत्र तैयार करेगी। इस पहल के तहत महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट्स के इस्तेमाल, बुनियादी क्लोरीनीकरण, और डिजिटल रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) डिप्लोमा और इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए जल आपूर्ति प्रबंधन पर एक विशेष वैकल्पिक कोर्स तैयार कर रहा है। आईआईटी कानपुर ने भी जल अवसंरचना के प्रबंधन में आईओटी-सक्षम निगरानी प्रणालियों और मशीन लर्निंग के उपयोग पर जोर दिया है।
कार्यान्वयन और निर्धारित समय-सीमा
सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट समय-सीमा दी गई है। राज्यों को 15 अक्टूबर 2026 तक ‘नल जल मित्र’ कोर्स को अपनाने या अपना खुद का पाठ्यक्रम विकसित करने का निर्णय लेना होगा। इसके साथ ही, जिला स्तर पर मानव संसाधन की कमियों का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि ग्रामीण युवाओं के लिए सतत रोजगार के अवसर भी सुनिश्चित किए जा सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? जल जीवन मिशन 2.0 के तहत कितने लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे?
उत्तर। ग्रामीण जल आपूर्ति अवसंरचना के संचालन और रखरखाव के लिए 13 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।
प्रश्न? सुजलम शक्ति कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को जल के नमूने लेने, फील्ड टेस्ट किट्स का उपयोग करने और बुनियादी कीटाणुशोधन में प्रशिक्षित करना है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






