
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बेंगलुरु में दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) के लिए निवेशकों को आकर्षित करेंगे।
मुख्य बातें
- बेंगलुरु में आयोजित हो रही है ग्वालियर के दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के लिए विशेष निवेशक बैठक।
- नई दिल्ली और मुंबई की बैठकों में 5,500 करोड़ रुपये के निवेश की मिल चुकी है प्रतिबद्धता।
- ग्वालियर में 170 एकड़ में बन रहा है एशिया का पहला एकीकृत प्लग-एंड-प्ले दूरसंचार क्लस्टर (TMZ)।
- केंद्र सरकार चरण-I के लिए 493 करोड़ रुपये की 100% वित्तपोषण सहायता दे रही है।
केंद्रीय संचार और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के नेतृत्व में दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बेंगलुरु में एक उच्च-स्तरीय निवेशक बैठक का आयोजन कर रहे हैं। दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) के विकास को गति देने के लिए बुलाई गई इस बैठक का मुख्य लक्ष्य ग्वालियर में स्थापित हो रहे एशिया के इस पहले समर्पित औद्योगिक क्लस्टर में देश-विदेश के निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना है। इससे पहले नई दिल्ली और मुंबई में आयोजित बैठकों को शानदार सफलता मिली थी, जहां उद्योग जगत ने भारी उत्साह दिखाया था।
ग्वालियर में दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के लिए बेंगलुरु में निवेशक बैठक
ग्वालियर में दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (Telecom Manufacturing Zone – TMZ) की स्थापना भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बेंगलुरु में आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के प्रमुख दूरसंचार विनिर्माता, प्रौद्योगिकी कंपनियां, इलेक्ट्रॉनिक्स और घटक विनिर्माता, बुनियादी ढांचा प्रदाता और बड़े निवेशक हिस्सा ले रहे हैं। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करना, आयात पर निर्भरता घटाना और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है।
- बेंगलुरु में दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के दिग्गजों को एक मंच पर लाया गया है।
- नई दिल्ली और मुंबई के राउंडटेबल आयोजनों में कुल 5,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
- इन शुरुआती समझौतों से करीब 18,000 नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।
- ग्वालियर स्थित TMZ परियोजना को अत्याधुनिक तकनीकों और अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
परियोजना की रूपरेखा और वित्तीय सहायता
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) से मिली जानकारी के अनुसार, ग्वालियर में प्रस्तावित दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) को 170 एकड़ क्षेत्रफल में एक एकीकृत प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक क्लस्टर के तौर पर डिजाइन किया गया है। इसमें मोबाइल उपकरण, ऑप्टिकल फाइबर, अत्याधुनिक टेलीकॉम गैजेट्स और अगली पीढ़ी की 5G तथा 6G तकनीकों से जुड़े उद्योगों को जगह मिलेगी। इस पूरी परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं।
इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण के लिए केंद्र सरकार 493 करोड़ रुपये की 100% वित्तपोषण सहायता उपलब्ध करा रही है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश सरकार ने इसके लिए लगभग 170 एकड़ जमीन पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की है और कई तरह के विशेष निवेशक प्रोत्साहन भी दिए हैं। इस पूरे उपक्रम के सुचारू संचालन के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle – SPV) का गठन किया गया है, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी है।
भारत का बढ़ता वैश्विक दूरसंचार पदचिह्न
सरकार की दीर्घकालिक योजना देश को केवल दूरसंचार सेवाओं के उपभोक्ता तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक स्तर का दूरसंचार उत्पाद विनिर्माण और नवाचार हब बनाने की है। उद्योग के सुझावों के आधार पर एक बेहद आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया गया है, जिससे कंपनियों को देश के भीतर ही कलपुर्जे बनाने और वैश्विक बाजारों में अपने उत्पाद निर्यात करने का प्रोत्साहन मिले। बेंगलुरु के तकनीकी और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से इस पहल को जोड़ने से अनुसंधान और विकास (R&D) तथा आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण को और मजबूती मिलने की पूरी संभावना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? ग्वालियर में बन रहे दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल कितना है?
उत्तर। ग्वालियर में प्रस्तावित TMZ को लगभग 170 एकड़ भूमि पर एक एकीकृत प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है।
प्रश्न? इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता किस प्रकार दी जा रही है?
उत्तर। केंद्र सरकार चरण-I के लिए 493 करोड़ रुपये का 100% वित्तपोषण दे रही है, जबकि मध्य प्रदेश सरकार ने 170 एकड़ भूमि निःशुल्क दी है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






