
देश भर के गांवों में 9 लाख से अधिक सामुदायिक संसाधन व्यक्ति और लाखों आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में जुटे हैं।
मुख्य बातें
- देश भर में 9 लाख से अधिक सामुदायिक संसाधन व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जिनमें 4.08 लाख आजीविका सीआरपी शामिल हैं।
- दीनदयाल अंत्योदय योजना-एनआरएलएम से 10 करोड़ से अधिक परिवार और 92 लाख स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं।
- बैंक सखियों ने 2013-14 से अब तक स्वयं सहायता समूहों को 13.41 लाख करोड़ रुपए का बैंक लोन दिलाने में मदद की।
- दिसंबर 2025 तक 10.40 लाख आशा और मार्च 2026 तक 10.58 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता स्वास्थ्य व पोषण सेवाओं का संचालन कर रही हैं।
- राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान के तहत 50,000 सीआरपी को प्रशिक्षित किया जाएगा जो 50 लाख एसएचजी सदस्यों को ट्रेनिंग देंगे।
सामुदायिक संसाधन व्यक्ति नेटवर्क ग्रामीण भारत में सरकारी योजनाओं और आजीविका सेवाओं का लाभ प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने में केंद्रीय तंत्र बन गया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश भर में 9 लाख से अधिक सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी), 10.40 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ता और 10.58 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ग्राम स्तर पर कार्यरत हैं। यह विशाल कैडर कृषि, पशुपालन, वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य और पोषण जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष सहयोग प्रदान कर रहा है।
सामुदायिक संसाधन व्यक्ति क्या हैं और ग्रामीण विकास में इनका क्या योगदान है?
सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और आजीविका सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने वाले प्रशिक्षित स्थानीय कार्यकर्ता हैं। देश भर में 9 लाख से अधिक सामुदायिक संसाधन व्यक्ति कृषि, पशुपालन, बैंकिंग, बीमा और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों तथा ग्रामीण परिवारों को तकनीकी सहायता एवं मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
9 लाख से अधिक सामुदायिक संसाधन व्यक्ति: कैडर वार वितरण आंकड़े
पीआईबी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, देश भर में कार्यरत 9 लाख से अधिक कैडर में से लगभग 4.08 लाख आजीविका सीआरपी हैं। ये कार्यकर्ता कृषि, पशुधन, मत्स्य पालन, वनोपज और ग्रामीण उद्यम विकास के क्षेत्रों में काम करते हैं। इसके अलावा लगभग 5 लाख कैडर वित्तीय समावेशन, बैंक प्रबंधन, बीमा सेवाएं और सामाजिक जागरूकता से जुड़े हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत प्रमुख सामुदायिक कैडर के आंकड़े इस प्रकार हैं:
- कृषि सखी: 1.91 लाख से अधिक प्रशिक्षित महिला कार्यकर्ता ग्रामीण किसानों को जैविक खेती और कृषि उत्पादों के विपणन में सहायता दे रही हैं।
- पशु सखी: 1.70 लाख कार्यकर्ता ग्रामीण परिवारों को पशु स्वास्थ्य, पोषण और पशुधन प्रबंधन में सलाह दे रही हैं।
- वन सखी: 2,993 कार्यकर्ता गैर-लकड़ी वन उत्पादों के संग्रहण, प्रसंस्करण और बिक्री में सहयोग कर रही हैं।
- मत्स्य सखी: 2,012 कार्यकर्ता मत्स्य पालन आधारित आजीविका सुधार और बाजार पहुंच बढ़ाने का कार्य देख रही हैं।
- उद्योग सखी एवं सीआरपी-ईपी: 48,785 कार्यकर्ता गैर-कृषि आजीविका और सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना में मदद कर रहे हैं।
- बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (बीसी) सखी: 1.48 लाख से अधिक बीसी सखियां घर-घर जाकर डिजिटल बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं।
- बैंक सखी: 50,548 कार्यकर्ता बैंकों और स्वयं सहायता समूहों के बीच क्रेडिट लिंकेज में मदद करती हैं।
- वित्तीय साक्षरता सीआरपी: 56,727 कार्यकर्ता वित्तीय नियोजन, बचत और बीमा के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं।
दीनदयाल अंत्योदय योजना और स्वयं सहायता समूहों का विस्तार
ग्रामीण विकास मंत्रालय की दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ने देश में महिला सशक्तिकरण की बड़ी संस्थागत व्यवस्था तैयार की है। मिशन के तहत देश भर में 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को 92 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़ा गया है। इन समूहों को ग्राम संगठनों और क्लस्टर स्तरीय संघों (CLF) के माध्यम से संगठित किया गया है।
वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में बैंक सखियों ने 2013-14 से अब तक स्वयं सहायता समूहों को 13.41 लाख करोड़ रुपए का बैंक ऋण दिलाने में सहायता की है। वर्ष 2025-26 के दौरान 3.81 करोड़ से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों को वित्तीय साक्षरता, बचत, बीमा, पेंशन और उद्यम वित्तपोषण का प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही, जून 2025 तक 4.62 करोड़ महिला किसानों को कृषि आजीविका कार्यक्रमों से जोड़ा गया, जिसमें 3 लाख से अधिक आजीविका सीआरपी ने मार्गदर्शन दिया।
उद्यमिता संवर्धन और स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में केवल कृषि ही नहीं, बल्कि गैर-कृषि आजीविका और सूक्ष्म उद्यमों को भी बढ़ावा दे रही है। स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) के तहत जून 2026 तक 4.32 लाख उद्यमों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, देश भर में उद्योग सखियों और सीआरपी-ईपी नेटवर्क के सहयोग से 4.11 लाख से अधिक ग्रामीण उद्यमों को स्थापित करने में मदद मिली है।
आगामी राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान के तहत सरकार ने एक नया लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत 50,000 सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों को विशेष उद्यम संवर्धन प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षित कैडर आगे चलकर 50 लाख स्वयं सहायता समूह सदस्यों को सूक्ष्म व्यवसाय शुरू करने और उसका संचालन करने का प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
यह भी जानें: बीसी सखी मॉडल से गांव में बैंकिंग और स्वरोजगार
ग्रामीण क्षेत्रों में डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में बीसी सखियों ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। असम के नगांव जिले की रहने वाली देबश्री गोगोई बोरा की सफलता की कहानी इस कैडर मॉडल के प्रभाव को दर्शाती है। देबश्री ने एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) आईडी लेकर ग्राहक सेवा बिंदु (CSP) की शुरुआत की।
वे प्रतिदिन 30 से 35 ग्रामीणों को उनके घर के पास बैंकिंग सेवाएं देती हैं, जिनमें पीएम-किसान और अरुणोदोय जैसी सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि की निकासी शामिल है। अप्रैल से अगस्त के बीच उन्होंने 2,500 से अधिक लेन-देन किए, जिससे उन्हें 10,000 से 17,000 रुपए का मासिक कमीशन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही वे फोटोकॉपी, फोटो प्रिंटिंग और बेकिंग का व्यवसाय भी चलाती हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है।
स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता अभियानों में अग्रिम पंक्ति के कैडर
स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में 31 दिसंबर 2025 तक 10.40 लाख से अधिक आशा (ASHA) कार्यकर्ता ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली और ग्रामीणों के बीच मुख्य कड़ी बनी हुई हैं। वे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में लगी हैं।
इसी तरह, ‘पोषण 2.0’ और ‘पोषण भी पढ़ाई भी’ पहल के तहत मार्च 2026 तक 10.58 लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है। ये कार्यकर्ता बच्चों में कुपोषण की पहचान, पूरक आहार वितरण और प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा देने का कार्य कर रही हैं। स्वच्छता के मोर्चे पर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 10.36 लाख से अधिक पदाधिकारियों और 36,342 मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है, जिसमें स्वच्छाग्रही गांव-गांव जाकर स्वच्छता व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा दे रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRP) का चयन कैसे किया जाता है?
उत्तर: सामुदायिक संसाधन व्यक्ति का चयन स्थानीय ग्राम पंचायत या स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के बीच से ही किया जाता है। चयन के बाद उन्हें संबंधित विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा कार्य-विशिष्ट प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रश्न: बीसी सखी और कृषि सखी को भुगतान किस आधार पर होता है?
उत्तर: अग्रिम पंक्ति के ग्रामीण कैडर को संबंधित योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार गतिविधि-आधारित मुआवजा और प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जैसे बीसी सखी को बैंकिंग लेन-देन पर कमीशन मिलता है।
प्रश्न: दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत कुल कितनी महिलाएं जुड़ी हैं?
उत्तर: दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत देश भर के 92 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार जुड़े हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






