
सह सहकारिता मंत्रालय ने प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं को दूर करते हुए रिफंड प्रक्रिया दोबारा चालू की है। अब तक 4,156,711 जमाकर्ताओं को 9,267 करोड़ रुपये लौटाए जा चुके हैं।
मुख्य बातें
- सहारा रिफंड पोर्टल को पुनः बहाल कर 20 लाख लंबित आवेदनों की जांच शुरू कर दी गई है।
- अब तक 41,56,711 वैध जमाकर्ताओं को 9,267 करोड़ रुपये सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए।
- सहारा समूह की चार प्रमुख सहकारी समितियों के जमाकर्ता इस रिफंड के दायरे में शामिल हैं।
- नवंबर 2025 में प्रशासनिक और आईटी अवसंरचना से जुड़ी बाधाओं के कारण काम रुक गया था।
- दावे जमा करने के लिए केवल mocrefund.crcs.gov.in आधिकारिक वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें।
सहारा रिफंड पोर्टल को सहकारिता मंत्रालय द्वारा दोबारा पूरी तरह से बहाल कर दिया गया है। केंद्रीय सहकारी समितियां पंजीयक (सीआरसीएस) ने सहारा समूह की सहकारी समितियों के वास्तविक जमाकर्ताओं के दावों के त्वरित निपटान के लिए ऑनलाइन प्रणालियों का संचालन फिर से शुरू कर दिया है। इस कदम से उन 20 लाख निवेशकों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके आवेदन सत्यापन के लिए लंबे समय से रुके हुए थे।
सहारा रिफंड पोर्टल से किसे और कैसे मिलेगा पैसा?
सहारा रिफंड पोर्टल के माध्यम से सहारा समूह की चार सहकारी समितियों के केवल उन्हीं वैध जमाकर्ताओं को राशि वापस मिलती है, जिनके दस्तावेज पूरी तरह सही पाए जाते हैं। आधार ई-केवाईसी और समिति के डेटा मिलान के बाद पात्र पाई गई रिफंड राशि सीधे आवेदक के आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाती है। पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी और डिजिटल रिकॉर्ड पर आधारित है।
सहारा रिफंड पोर्टल की पुनर्बहाली और आंकड़ों की स्थिति
पीआईबी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रिफंड प्रक्रिया की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 9,267 करोड़ रुपये की राशि लौटाई जा चुकी है। यह राशि सीधे 41,56,711 जमाकर्ताओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी गई है। सहारा रिफंड पोर्टल पर अभी भी लगभग 20 लाख आवेदन ऐसे हैं जो विभिन्न चरणों में प्रसंस्करण के लिए लंबित पड़े थे। अब प्रणालियों के चालू हो जाने के बाद इन आवेदनों की जांच और रिफंड ट्रांसफर की प्रक्रिया ने दोबारा गति पकड़ ली है।
मंत्रालय का कहना है कि लंबित आवेदनों का सत्यापन मानक संचालन प्रक्रिया के तहत तेजी से पूरा किया जा रहा है। जिन आवेदकों के कागजात में कोई कमी नहीं पाई जाएगी, उनके खातों में जल्द ही स्वीकृत राशि हस्तांतरित कर दी जाएगी।
नवंबर 2025 से क्यों बाधित था रिफंड सत्यापन का काम?
सहारा समितियों का कामकाज नवंबर 2025 में गंभीर रूप से प्रभावित हो गया था। उस समय सहारा समितियों से असंबद्ध कुछ बाहरी मामलों के कारण उनके कार्यालयों और परिसरों को सील कर दिया गया था। इसके साथ ही समितियों के सामने हार्डवेयर के रखरखाव, वार्षिक रखरखाव अनुबंधों (एएमसी) के बकाया भुगतान, आवश्यक लाइसेंसों के नवीनीकरण और आईटी अवसंरचना से जुड़ी परिचालन बाधाएं खड़ी हो गई थीं।
प्रशासनिक और मानव संसाधन संबंधी समस्याओं के कारण दावों की जांच के लिए जरूरी ऑनलाइन सिस्टम ठप हो गए थे। सहकारिता मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार के स्थानीय अधिकारियों और संबंधित हितधारकों के साथ मिलकर इन बाधाओं को दूर कराया। सील हटाए जाने और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के नवीनीकरण के बाद अब सहारा रिफंड पोर्टल को निर्बाध रूप से चालू कर दिया गया है।
सहारा की इन 4 सहकारी समितियों के जमाकर्ता हैं पात्र
सरकार की इस रिफंड व्यवस्था के तहत सहारा समूह की चार विशिष्ट समितियों के सदस्यों के दावों को ही स्वीकार किया जा रहा है। यदि आपने नीचे दी गई समितियों में निवेश किया था, तो आप इस योजना के तहत रिफंड के हकदार हैं:
- सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, लखनऊ
- सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड, भोपाल
- हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, कोलकाता
- स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, हैदराबाद
इन चारों समितियों के अलावा किसी अन्य संस्था में किया गया निवेश इस ऑनलाइन पोर्टल के दायरे में नहीं आता है। सत्यापन के दौरान समिति के रिकॉर्ड और जमाकर्ता के जमा प्रमाण-पत्र का मिलान किया जाता है।
आवेदन और त्रुटि सुधार की सही प्रक्रिया
नए दावे प्रस्तुत करने के लिए जमाकर्ताओं को केवल आधिकारिक पोर्टल mocrefund.crcs.gov.in पर ही जाना चाहिए। यदि किसी जमाकर्ता के पूर्व में जमा किए गए आवेदन में कोई त्रुटि या कमी पाई गई है और उसे सूचित किया गया है, तो उसे रि-सबमिशन पोर्टल mocresubmit.crcs.gov.in का उपयोग करना होगा।
दावा प्रस्तुत करते समय जमाकर्ता को अपना आधार नंबर, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, सदस्यता संख्या और जमा रसीद या पासबुक की प्रति अपलोड करनी होती है। आधार ई-केवाईसी सत्यापन पूरा होने के बाद ही आवेदन आगे बढ़ता है। सहकारिता मंत्रालय ने आम जनता को सचेत किया है कि वे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या फर्जी वेबसाइट के बहकावे में न आएं। किसी भी तरह के दावे के लिए कोई भौतिक कागजी कार्रवाई या फीस देने की जरूरत नहीं है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और निगरानी व्यवस्था का इतिहास
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मार्च 2023 को रिट याचिका संख्या 191/2022 पर सुनवाई करते हुए सहारा-सेबी रिफंड खाते से 5,000 करोड़ रुपये सीआरसीएस को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। इस आदेश के पालन में केंद्र सरकार ने 18 जुलाई 2023 को पहली बार सहारा रिफंड पोर्टल लॉन्च किया था।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति की निगरानी में इस पूरी रिफंड प्रक्रिया के लिए एक पारदर्शी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की गई थी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बिना किसी बिचौलिए के सही और वास्तविक निवेशकों तक उनका पैसा पहुंचाना है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक और तकनीकी ढांचा मजबूत होने के बाद अब सभी बचे हुए वैध दावों का निपटान समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: सहारा रिफंड पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट का पता क्या है?
उत्तर: नए आवेदन के लिए आधिकारिक वेबसाइट mocrefund.crcs.gov.in है और त्रुटि सुधार के बाद दोबारा आवेदन के लिए mocresubmit.crcs.gov.in है।
प्रश्न: रिफंड का पैसा किस बैंक खाते में भेजा जाता है?
उत्तर: रिफंड की राशि सीधे जमाकर्ता के उस बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है जो उनके आधार नंबर से लिंक होता है।
प्रश्न: क्या आवेदन करने के लिए कोई फीस देनी होती है?
उत्तर: नहीं, सहारा रिफंड पोर्टल पर आवेदन करने या त्रुटि सुधारने की पूरी प्रक्रिया बिल्कुल नि:शुल्क और डिजिटल है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






