
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम में 2,800 किलोमीटर से अधिक लंबे समर्पित मालढुलाई गलियारा के पूरा होने की जानकारी साझा की है।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वडोदरा में प्रमुख परियोजनाओं का शुभारंभ किया।
- समर्पित मालढुलाई गलियारा की कुल लंबाई 2,800 किलोमीटर से अधिक है।
- पीआईबी के अनुसार यह परियोजना गति शक्ति और लॉजिस्टिक्स बदलाव का अहम पड़ाव है।
- देश में चिप्स से लेकर जहाजों तक और सौर से परमाणु ऊर्जा तक का मूल्य शृंखला निर्माण जारी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वडोदरा में प्रमुख विकास परियोजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर देश के लॉजिस्टिक्स तंत्र को नई दिशा देने वाले मालढुलाई गलियारा के पूरा होने की घोषणा की है। पीआईबी के अनुसार, यह देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है जिससे परिवहन और व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी। सरकार देश के औद्योगिक विकास को तेज करने के लिए लगातार नई और आधुनिक परियोजनाओं को धरातल पर उतार रही है।
वडोदरा में मालढुलाई गलियारा की पूरी जानकारी
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपने आधिकारिक हैंडल के माध्यम से इस बात की जानकारी साझा की कि 2,800 किलोमीटर से अधिक लंबा समर्पित मालढुलाई गलियारा अब पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है। यह परियोजना देश की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को पूरी तरह से बदलने के लिए तैयार की गई है। इस नेटवर्क के माध्यम से वस्तुओं की आवाजाही पहले से कहीं अधिक तेज और सुगम होगी, जिससे औद्योगिक लागत में भी कमी आएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, समर्पित मालढुलाई गलियारा जैसी बड़ी परियोजनाएं भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायता करती हैं। गति शक्ति योजना के तहत तैयार किए जा रहे इन गलियारों से रेलवे नेटवर्क पर यात्री गाड़ियों का दबाव भी कम होता है और मालगाड़ियां तय समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच पाती हैं। इससे देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को बंदरगाहों और बड़े बाजारों से सीधे जोड़ने में आसानी होती है।
लॉजिस्टिक्स बदलाव और देश का औद्योगिक विकास
पीआईबी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देश के औद्योगिक विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब चिप्स के निर्माण से लेकर बड़े जहाजों के उत्पादन तक घरेलू स्तर पर ही संपूर्ण मूल्य शृंखलाएँ तैयार कर रहा है। इसके साथ ही, सौर ऊर्जा से लेकर परमाणु ऊर्जा तक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तथा डेटा सेंटर जैसे भविष्य के उद्योगों के लिए मजबूत ऊर्जा तंत्र भी देश के भीतर ही विकसित किया जा रहा है।
देश में बुनियादी ढांचे के विकास का यह नया दौर रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ विदेशी निवेश को भी आकर्षित कर रहा है। मालढुलाई गलियारा जैसी परियोजनाएं मेक इन इंडिया पहल को और अधिक मजबूती प्रदान करती हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के लॉजिस्टिक्स खर्च को कम करना और परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाना है, जिससे कुल मिलाकर व्यापार करने में आसानी बेहतर हो सके।
प्रमुख बिंदु और भविष्य की योजनाएं
- समर्पित मालढुलाई गलियारा की लंबाई 2,800 किलोमीटर से अधिक है।
- यह परियोजना गति शक्ति मिशन का एक अहम हिस्सा है।
- चिप्स से लेकर जहाजों तक का निर्माण देश के भीतर ही किया जा रहा है।
- भविष्य के उद्योगों और एआई के लिए परमाणु तथा सौर ऊर्जा तंत्र विकसित हो रहा है।
आने वाले समय में इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण क्रियान्वयन से देश के दूर-दराज के इलाकों में स्थित उद्योगों को भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच मिल जाएगी। सरकार का यह विजन देश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के समकक्ष खड़ा करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? समर्पित मालढुलाई गलियारा की कुल लंबाई कितनी है? उत्तर। पीआईबी के अनुसार इस गलियारे की लंबाई 2,800 किलोमीटर से अधिक है।
प्रश्न? यह परियोजना किस शहर में शुरू की गई है? उत्तर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में इस परियोजना के शुभारंभ के दौरान इसकी घोषणा की।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






