
गृह मंत्री अमित शाह ने पणजी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 2026 से 2029 तक के नशामुक्त भारत रोडमैप की जानकारी दी।
मुख्य बातें
- वर्ष 2014 से 2026 के दौरान देश में 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक ड्रग्स जब्त किए गए, जिनकी कीमत 1.89 लाख करोड़ रुपये है।
- वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से कुल 274 अपराधियों और भगोड़ों का प्रत्यर्पण कराया गया।
- जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक की अवधि के लिए 4 स्तंभों और 25 घटकों पर आधारित 3-वर्षीय रोडमैप लागू किया गया है।
- प्रत्येक राज्य में एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स के गठन के लिए मार्च 2027 तक 7 प्रतिशत केंद्रीय सहायता दी जाएगी।
- नशा पीड़ितों की सहायता और पुनर्वास के लिए 1933 मानसा हेल्पलाइन और 1,751 नशामुक्ति केंद्र काम करेंगे।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गोवा की राजधानी पणजी में नारकोटिक्स नियंत्रण पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। पीआईबी के अनुसार इस मौके पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद रहे। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 से 2029 तक नशे के खिलाफ अभियान को मिशन मोड में चलाया जाएगा, ताकि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ नशामुक्त युवा शक्ति का निर्माण हो सके।
नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार का क्या प्लान है?
नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक तीन साल का एक विशेष रोडमैप लागू किया है। इसके तहत देश में खुफिया और ऑपरेशन आधारित कार्रवाई, सिंथेटिक ड्रग्स पर रोक, मांग में कमी और क्षमता निर्माण जैसे चार प्रमुख स्तंभ बनाए गए हैं। इस अभियान के जरिए नशा मुक्त भारत का लक्ष्य तय किया गया है।
मादक पदार्थों की जब्ती और नष्टीकरण के आंकड़े
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2004 से 2014 के बीच देश में 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त किए गए थे, जिनकी अनुमानित कीमत 40 हजार करोड़ रुपये थी। वहीं 2014 से 2026 की अवधि में यह जब्ती बढ़कर 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस जब्त मादक पदार्थ का कुल मूल्य लगभग 1 लाख 89 हजार करोड़ रुपये है। नारकोटिक्स नियंत्रण के राष्ट्रीय अभियान के तहत इस जब्ती को सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा तंत्र माना जा रहा है।
नशीले पदार्थों को नष्ट करने की कार्रवाई में भी तेजी दर्ज की गई है। साल 2004 से 2014 के दौरान देश भर में केवल 3 लाख 36 हजार किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए थे। इसके विपरीत वर्ष 2014 से 2026 के बीच 48 लाख 68 हजार किलोग्राम से अधिक ड्रग्स को नष्ट किया जा चुका है।
नारकोटिक्स नियंत्रण के चार मुख्य स्तंभ और रणनीतिक रोडमैप
गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि नारकोटिक्स नियंत्रण की तीन वर्षीय रणनीति को चार मजबूत स्तंभों पर खड़ा किया गया है। इसमें 25 मुख्य घटक और 200 से अधिक एक्शन पॉइंट्स तय किए गए हैं। एजेंसियों को अब बॉटम-टू-टॉप और टॉप-टू-बॉटम जांच प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद यह है कि ड्रग्स की छोटी पुड़िया पकड़े जाने पर भी उसके मुख्य सप्लायर तक जांच पहुंचाई जा सके।
इस रणनीति के चार मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- इंटेलिजेंस एवं ऑपरेशन: खुफिया जानकारियों के आधार पर नशीले पदार्थों के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ना और किंगपिन के डोजियर तैयार करना।
- सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण: प्रीकर्सर केमिकल्स, क्रिप्टो लेन-देन और डार्क नेट के जरिए होने वाली तस्करी पर सख्त कार्रवाई।
- डिमांड एवं हार्म रिडक्शन: नशामुक्ति केंद्रों की संख्या को तीन गुना बढ़ाकर 1,751 करना और पीड़ितों का पुनर्वास।
- क्षमता निर्माण एवं समन्वय: मार्च 2027 तक हर राज्य में एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स का गठन और 7 प्रतिशत केंद्रीय आर्थिक सहायता।
डिजिटल पोर्टल, भारतपोल और मानसा हेल्पलाइन का दायरा
देश में नारकोटिक्स नियंत्रण तंत्र को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए सूचना तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। नशा पीड़ितों के उपचार और पुनर्वास के लिए 1933 मानसा (MANAS) हेल्पलाइन संचालित की जा रही है। वहीं साइबर वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए 1930 हेल्पलाइन कार्यरत है।
ड्रग्स अपराध में लिप्त अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के उद्देश्य से निदान (NIDAAN) पोर्टल शुरू किया गया है। इस पोर्टल में सभी राज्यों की पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा पकड़े गए तस्करों का ब्योरा उपलब्ध रहता है। इसके साथ ही विदेशों में छिपे भगोड़ों को वापस लाने के लिए ‘भारतपोल’ नाम की नई व्यवस्था बनाई गई है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण कराया जा चुका है। इसके अलावा पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं।
सीमा सुरक्षा और फॉरेंसिक जांच प्रक्रिया
नारकोटिक्स नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सीमावर्ती इलाकों में गश्त सख्त की गई है। बीएसएफ, सीआईएसएफ, भारतीय तटरक्षक दल, सीमा शुल्क और डीआरआई जैसी संस्थाएं बंदरगाहों, हवाई अड्डों और जमीनी सीमाओं पर स्कैनर लगाकर जांच कर रही हैं। तस्करों की वित्तीय चेन को ध्वस्त करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और वित्तीय आसूचना इकाई (FIU) काम में जुटी हैं।
गृह मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि मादक पदार्थों की जब्ती से जुड़े मामलों में फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर तैयार की जाएगी। नए आपराधिक कानूनों के प्रभाव से मुकदमों के निस्तारण में तेजी आई है। गोवा पुलिस ने इन कानूनों को लागू कर दोषसिद्धि दर में करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है, जिससे राज्य में सजा दिलाने की दर 53.2 प्रतिशत हो गई है।
एनकॉर्ड की बैठकें और सामाजिक भागीदारी
नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए चार-स्तरीय एनकॉर्ड (NCORD) व्यवस्था काम कर रही है। देश भर में अब तक एनकॉर्ड की 10 शीर्ष स्तरीय बैठकें, 7 कार्यपालक बैठकें, 277 राज्य स्तरीय बैठकें और 16,798 जिला स्तरीय बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी रोकने के लिए भारत ने 46 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते किए हैं।
जन जागरूकता बढ़ाने के लिए नशा मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत देश के 25 करोड़ नागरिकों से संपर्क कर उन्हें नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई गई है। अब तक 5 लाख 70 हजार से अधिक नशा पीड़ितों को नशामुक्त करने के लिए चिकित्सा और पुनर्वास सहायता प्रदान की गई है। एनसीसी, एनएसएस और माई भारत संगठन के माध्यम से लाखों युवाओं को नशामुक्ति मित्र के रूप में जोड़ा जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए कौन सी हेल्पलाइन संचालित की जा रही है?
उत्तर: नशाग्रस्त व्यक्तियों की सहायता और पुनर्वास जानकारी के लिए 1933 मानसा (MANAS) हेल्पलाइन काम कर रही है।
प्रश्न: निदान पोर्टल का मुख्य उपयोग क्या है?
उत्तर: निदान (NIDAAN) पोर्टल नारको अपराधियों और तस्करों का राष्ट्रीय डेटाबेस रखता है, जिससे जांच एजेंसियों को अपराधियों का ब्योरा तुरंत मिल जाता है।
प्रश्न: नारकोटिक्स नियंत्रण का नया रोडमैप किस अवधि के लिए तैयार किया गया है?
उत्तर: केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक की तीन साल की अवधि के लिए यह रोडमैप तैयार किया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






