
सीएआरए ने पुणे में पश्चिमी क्षेत्र की परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें 150 से अधिक हितधारकों ने दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास पर विचार साझा किए।
मुख्य बातें
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत सीएआरए ने पुणे में पश्चिमी क्षेत्र के लिए कार्यशाला का आयोजन किया।
- 74 से अधिक जिलों के 150 हितधारकों ने विशेष जरूरतों वाले बच्चों को गोद लेने पर चर्चा की।
- महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति वर्दा सुनील तटकरे ने वीडियो संदेश के जरिए संबोधित किया।
- सीएआरए की सीईओ भावना सक्सेना ने दिव्यांग बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
भारत में बच्चा गोद लेना अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) ने पुणे में एक क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित यह पश्चिमी क्षेत्र की चौथी कार्यशाला थी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विशेष जरूरतों और दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल को बढ़ावा देना तथा उन्हें एक सुरक्षित एवं स्नेही पारिवारिक माहौल प्रदान करना है।
बच्चा गोद लेना: विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए क्या हैं नए प्रावधान?
विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए बच्चा गोद लेना आसान बनाने के उद्देश्य से सीएआरए ने प्रक्रियात्मक और चिकित्सा संबंधी सुधार लागू किए हैं। भारत सरकार का लक्ष्य दिव्यांग बच्चों को संस्थागत देखभाल से निकालकर सुरक्षित परिवार-आधारित देखभाल में पुनर्वासित करना है, ताकि उन्हें समय पर चिकित्सा जांच और बेहतर जीवन स्तर मिल सके।
यह क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला ‘गोद लेने के बारे में जागरूकता अभियान 2025’ के तहत आयोजित की गई थी। इस अभियान की केंद्रीय विषयवस्तु “खास जरूरतों वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के लिए गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना” रखी गई। पश्चिमी क्षेत्र भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत विस्तृत है, जिसमें महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा तथा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव शामिल हैं। इस व्यापक क्षेत्र से 74 से अधिक जिलों के लगभग 150 हितधारकों ने पुणे में एकत्र होकर विचार-विमर्श किया।
महाराष्ट्र सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति वर्दा सुनील तटकरे ने वीडियो संदेश के माध्यम से कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने हितधारकों से अपील की कि वे दत्तक ग्रहण प्रणाली को मजबूत करने के लिए एकजुट होकर काम करें। उन्होंने कहा कि विशेष जरूरतों वाले बच्चों को स्थायी और स्नेही पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी विभागों के बीच निरंतर सहयोग और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
बच्चा गोद लेना और दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास की चुनौतियां
कार्यशाला के दौरान सीएआरए की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और सदस्य सचिव भावना सक्सेना ने विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए गोद लेने की व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि परामर्श पहलों के माध्यम से गोद लेने की प्रक्रियाओं को अधिक बाल-केंद्रित बनाया जा रहा है। बच्चों को परिवारों से जोड़ने की इस यात्रा में चिकित्सा जांच, कानूनी औपचारिकताएं, वित्तीय पहलू और शिकायत निवारण जैसे मुख्य मुद्दे शामिल हैं।
कार्यशाला में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि बच्चा गोद लेना तब अधिक प्रभावी होता है जब बाल संरक्षण प्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच सीधा समन्वय स्थापित हो। समय पर चिकित्सा परीक्षण और प्रमाणन से गोद लेने की समय-सीमा में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इसके अलावा, कार्यशाला में एक लघु वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें विशेष जरूरतों वाले एक बच्चे के सफल गोद लेने की कहानी दिखाई गई। इस फिल्म ने प्रदर्शित किया कि कैसे पारिवारिक स्नेह किसी बच्चे के जीवन को पूरी तरह से बदल सकता है।
- भागीदार राज्य: महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव।
- कुल प्रतिभागी: 74 से अधिक जिलों के 150 हितधारक।
- मुख्य एजेंसियां: SARA, SAA, CCI, DCPU और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO)।
- विशेष ध्यान: दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का पारिवारिक पुनर्वास।
बच्चा गोद लेना: भारत में सीएआरए की भूमिका और कानूनी ढांचा
भारत में बच्चा गोद लेना एक वैधानिक प्रक्रिया है जो केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के दिशा-निर्देशों के तहत संचालित होती है। सीएआरए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का एक स्वायत्त निकाय है जो भारतीय बच्चों के दत्तक ग्रहण को विनियमित और सुगम बनाता है। यह एजेंसी देश के भीतर और अंतर-देशीय गोद लेने की प्रक्रियाओं के लिए नोडल निकाय के रूप में कार्य करती है।
किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के तहत, राज्य स्तर पर राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (SARA) और जिला स्तर पर जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) कार्यरत हैं। इनके साथ विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसियां (SAA) और बाल देखभाल संस्थान (CCI) मिलकर कार्य करते हैं। पश्चिमी क्षेत्र की कार्यशाला में इन सभी निकायों के प्रतिनिधियों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) और बाल संरक्षण विशेषज्ञों ने भाग लिया ताकि प्रक्रियागत बाधाओं को दूर किया जा सके।
बच्चा गोद लेना प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए प्रमुख सिफारिशें
कार्यशाला के समापन सत्र में भाग लेने वाले राज्यों और एजेंसियों ने विशेष जरूरतों वाले बच्चों के सर्वोत्तम हितों को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया। प्रतिभागी समूहों ने कई व्यावहारिक और समयबद्ध सिफारिशें तैयार कीं। इन सिफारिशों में चिकित्सा परीक्षणों को तेजी से पूरा करना, एजेंसियों के बीच डिजिटल सूचना साझाकरण को बढ़ावा देना और समाज में दिव्यांगता से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चा गोद लेना प्रक्रिया में स्वास्थ्य और बाल कल्याण विभाग मिलकर काम करेंगे, तो प्रतीक्षा सूची में कमी आएगी। इससे विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले अधिक बच्चों को समय पर नया परिवार मिल सकेगा। पीआईबी के अनुसार, इस कार्यशाला की सिफारिशों से भविष्य के नीतिगत सुधारों को दिशा मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: बच्चा गोद लेना प्रक्रिया में सीएआरए की क्या भूमिका है?
उत्तर: सीएआरए (सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी) भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत नोडल एजेंसी है, जो देश में बच्चों को गोद लेने की कानूनी प्रक्रियाओं का नियमन और निगरानी करती है।
प्रश्न: पश्चिमी क्षेत्र की परामर्श कार्यशाला का मुख्य विषय क्या था?
उत्तर: पुणे में आयोजित कार्यशाला का मुख्य विषय खास जरूरतों वाले (दिव्यांग) बच्चों के लिए गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना और उनके लिए स्थायी पारिवारिक देखभाल सुनिश्चित करना था।
प्रश्न: कार्यशाला में किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने हिस्सा लिया?
उत्तर: इस कार्यशाला में महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा तथा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव के 74 से अधिक जिलों के 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






