
पीआईबी के अनुसार, सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना के तहत जुलाई 2026 तक देश भर के 313 पैक्स में गोदाम निर्माण का कार्य पूरा हो गया है जिससे 1.80 लाख मीट्रिक टन से अधिक की क्षमता तैयार हुई है।
मुख्य बातें
- जुलाई 2026 तक देश भर के 313 पैक्स में गोदाम निर्माण पूरा हुआ।
- इससे 1.80 लाख मीट्रिक टन से अधिक की भंडारण क्षमता तैयार हुई है।
- इस योजना की शुरुआत 31 मई 2023 को प्रायोगिक परियोजना के तौर पर हुई थी।
- नाबार्ड की पुनर्वित्त सुविधा और ब्याज सब्सिडी से प्रभावी ऋण ब्याज दर 1 प्रतिशत है।
भारत के बढ़ते कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रयासों के बीच सहकारिता क्षेत्र में अनाज भंडारण योजना के तहत जुलाई 2026 तक देश के 313 पैक्स में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है। पीआईबी के अनुसार, इस पहल से देश में 1.80 लाख मीट्रिक टन से अधिक की नई भंडारण क्षमता तैयार हो गई है, जिससे ग्रामीण स्तर पर खाद्यान्न प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है।
अनाज भंडारण योजना क्या है और इसके उद्देश्य क्या हैं?
सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना का उद्देश्य प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के माध्यम से भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण प्रणालियों में सुधार करना है। इस योजना को 31 मई 2023 को एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य खाद्यान्न की बर्बादी घटाना, किसानों को फसल की बेहतर कीमत दिलाना और परिवहन लागत को कम करना है।
- महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान समेत 11 राज्यों में प्रायोगिक परियोजनाएं शुरू की गईं।
- जुलाई 2026 तक 1012 पैक्स या सहकारी समितियों की पहचान की गई।
- महाराष्ट्र के अमरावती स्थित नेरपिंगलाई पैक्स ने 3,000 मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम बनाया।
- गोदाम निर्माण के बाद पैक्स को नाबार्ड की सहायता से प्रभावी ऋण ब्याज दर मात्र 1 प्रतिशत मिलती है।
अनाज भंडारण योजना के वित्तीय और संस्थागत पहलू
सरकार ने इस योजना के तहत परियोजना की व्यवहार्यता सुधारने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। कृषि विपणन अवसंरचना योजना के तहत सब्सिडी को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 33.33 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा मार्जिन मनी की आवश्यकता को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया गया है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम इस योजना की मुख्य कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में काम कर रहा है।
भारतीय खाद्य निगम को भी यह अधिकार दिया गया है कि वह इन गोदामों को अनिवार्य रूप से किराए पर ले सके। इससे सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होती है और किसानों को उनकी उपज के बदले उचित समय पर अग्रिम राशि मिल पाती है। अमरावती के नेरपिंगलाई पैक्स का उदाहरण देते हुए सहकारिता मंत्रालय ने बताया कि वहां करीब 300 किसान अपनी सोयाबीन की फसल जमा कर रहे हैं।
पारदर्शिता और गुणवत्ता मानक
इस योजना के तहत बनने वाले सभी गोदामों के लिए कड़े गुणवत्ता मानदंड तय किए गए हैं। प्रत्येक संरचना पर ग्रेन स्टोरेज लोगो और निर्धारित रंग योजना का प्रदर्शन अनिवार्य किया गया है। भंडारण विकास और विनियामक प्राधिकरण के नियमों का पालन करते हुए गोदामों का निर्माण कराया जाता है ताकि अनाज की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? सहकारिता क्षेत्र में अनाज भंडारण योजना कब शुरू की गई थी। उत्तर। यह योजना 31 मई 2023 को एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू की गई थी।
प्रश्न? जुलाई 2026 तक कितने पैक्स में गोदाम निर्माण पूरा हुआ। उत्तर। जुलाई 2026 तक देश भर के 313 पैक्स में गोदाम निर्माण का कार्य पूरा हो चुका था।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






