बुधवार, सितम्बर 2, 2026

सहकारी बैंक सम्मेलन: आरबीआई ने यूसीबी के लिए जारी किए निर्देश

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सहकारी बैंक सम्मेलन

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, मनी-म्यूल खातों पर लगाम और मिशन सक्षम पर चर्चा की गई।

मुख्य बातें

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 1 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में तीसरा सहकारी बैंक सम्मेलन आयोजित किया।
  • डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे. और शिरीष चंद्र मुर्मू ने अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों (UCBs) की गवर्नेंस सुधारने पर बल दिया।
  • साइबर अपराधों, मनी-म्यूल खातों पर रोकथाम और ‘मिशन सक्षम’ के तहत क्षमता निर्माण पर विशेष चर्चा हुई।
  • कमजोर सहकारी बैंकों का समयबद्ध समाधान करने और पारदर्शी प्रबंधन लागू करने के निर्देश दिए गए।

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नई दिल्ली स्थित कार्यालय में तीसरा सहकारी बैंक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देश भर के अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों (UCBs) के कामकाज, साइबर सुरक्षा और प्रशासनिक गवर्नेंस से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस उच्चस्तरीय सहकारी बैंक सम्मेलन की अध्यक्षता आरबीआई के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे. और डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने की। इस कार्यक्रम में केंद्रीय सहकारी समिति के रजिस्ट्रार (CRCS) शिवपाल सिंह, विभिन्न राज्यों से आए रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज (RCS) और रिज़र्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। 1 सितंबर 2026 को आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को डिजिटल रूप से सुरक्षित, मजबूत और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने पर जोर दिया गया।

सहकारी बैंक सम्मेलन में आरबीआई का गवर्नेंस पर जोर

इस महत्वपूर्ण सहकारी बैंक सम्मेलन के दौरान डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे. ने अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों के भीतर संस्थागत क्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। पीआईबी और आरबीआई द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, स्वामीनाथन जे. ने यह स्पष्ट किया कि रिज़र्व बैंक और राज्यों व केंद्र के रजिस्ट्रार (RCS/CRCS) के बीच निरंतर और बेहतर तालमेल होना बहुत आवश्यक है। जब भी किसी बैंक में वित्तीय अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो समय रहते दंडात्मक और सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।

आरबीआई डिप्टी गवर्नर ने अपने संबोधन में साइबर अपराधों और ‘मनी-म्यूल’ खातों (Money-Mule Accounts) पर अंकुश लगाने की तत्काल आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। आज के दौर में जब डिजिटल बैंकिंग का दायरा बढ़ रहा है, सहकारी बैंकों को भी अपनी साइबर सुरक्षा प्रणालियों को अत्यधिक सख्त बनाना होगा। इसके साथ ही उन्होंने ‘मिशन सक्षम’ (Mission SAKSHAM) का जिक्र करते हुए कहा कि यह पहल इस पूरे क्षेत्र में क्षमता निर्माण (Capacity Building) और कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित होगी।

सहकारी बैंक सम्मेलन और बैंक लाइसेंस की जिम्मेदारियां

इस विशेष सहकारी बैंक सम्मेलन में डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने सहकारी बैंकों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उनकी वर्तमान भूमिका पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत में सहकारिता आंदोलन की जड़ें बहुत गहरी हैं, लेकिन जैसे ही किसी सहकारी समिति को बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त हो जाता है, उसकी जिम्मेदारियां और जवाबदेही कई गुना बढ़ जाती हैं। एक बैंक के रूप में काम करते हुए आम जनता के जमा धन की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता बन जाती है।

शिरीष चंद्र मुर्मू ने रेखांकित किया कि अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों में पेशेवर और ‘फिट एंड प्रॉपर’ (Fit and Proper) निदेशक मंडल (Board of Directors) और उच्च प्रबंधन का होना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, आंतरिक नियंत्रण प्रणालियों को पारदर्शी बनाना, आधुनिक तकनीकों और डिजिटल साधनों को तेजी से अपनाना तथा कमजोर वित्तीय स्थिति वाले सहकारी बैंकों का समयबद्ध समाधान (Timely Resolution) खोजना आवश्यक है ताकि आम जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके।

समन्वय और कमजोर बैंकों का समयबद्ध समाधान

केंद्रीय सहकारी समिति के रजिस्ट्रार (CRCS) शिवपाल सिंह ने भी सहकारी बैंक सम्मेलन में अपने विचार रखे। उन्होंने रिज़र्व बैंक और सहकारी प्राधिकरणों के बीच संयुक्त प्रयासों और निरंतर संवाद पर बल दिया। शिवपाल सिंह ने कहा कि अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों का निरंतर व्यवसायीकरण (Professionalisation) किया जाना चाहिए ताकि वे वाणिज्यिक बैंकों की प्रतिस्पर्धा में टिक सकें। इसके साथ ही, जो बैंक परिसमापन (Liquidation) की प्रक्रिया में हैं या जिनकी वित्तीय स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है, उनका जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए।

सम्मेलन में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:

  • गवर्नेंस और पेशेवर प्रबंधन: बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और वरिष्ठ अधिकारियों की योग्यता तथा पेशेवर दक्षता सुनिश्चित करना।
  • साइबर सुरक्षा और मनी-म्यूल नियंत्रण: धोखाधड़ी रोकने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना तथा फर्जी खातों पर तुरंत कार्रवाई करना।
  • संस्थागत क्षमता निर्माण: ‘मिशन सक्षम’ के माध्यम से बैंकिंग कर्मचारियों और अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण।
  • रेगुलेटरी समन्वय: आरबीआई, केंद्रीय रजिस्ट्रार और राज्य स्तरीय रजिस्ट्रारों के बीच बेहतर तालमेल बनाना।
  • डीआईसीजीसी (DICGC) की अपेक्षाएं: जमाकर्ताओं के इंश्योरेंस दावों का त्वरित निपटान और जमा सुरक्षा की गारंटी देना।

अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों की दोहरी नियामक संरचना

भारत में अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक (UCBs) एक विशिष्ट नियामक संरचना के तहत काम करते हैं, जिसे अक्सर दोहरी नियामक व्यवस्था (Dual Control System) कहा जाता है। इसमें बैंकों के प्रशासनिक मामले, चुनाव और पंजीकरण का काम राज्य या केंद्रीय रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज के पास होता है, जबकि बैंकिंग गतिविधियों, लिक्विडिटी, कैपिटल एडिक्वेसी और लाइसेंसिंग का नियंत्रण सीधे भारतीय रिज़र्व बैंक के पास होता है।

यही कारण है कि हर वर्ष आयोजित होने वाला यह सम्मेलन अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है। जब तक केंद्रीय बैंक और रजिस्ट्रार आपस में रणनीतिक तालमेल नहीं बनाएंगे, तब तक जमीनी स्तर पर सहकारी बैंकों के प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता लाना संभव नहीं है। डीआईसीजीसी (DICGC) के तहत प्रत्येक जमाकर्ता की 5 लाख रुपये तक की जमा राशि बीमित होती है, लेकिन आरबीआई का लक्ष्य यह है कि बैंकों को दिवालिया होने से पहले ही सही वित्तीय स्थिति में लाया जाए।

जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा और भविष्य की राह

आरबीआई के मुख्य महाप्रबंधक ब्रिज राज द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (Press Release: 2026-2027/1021) में बताया गया कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सहकारी बैंकिंग ढांचे को वैश्विक मानकों और आधुनिक बैंकिंग तकनीकों के अनुरूप ढालना है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों की पहुंच बहुत व्यापक है, और वे मध्यम व निम्न-आय वर्ग के परिवारों के लिए वित्तीय समावेशन का बड़ा जरिया हैं।

आरबीआई का स्पष्ट संदेश है कि तकनीक अपनाने, साइबर फ्रॉड से बचने और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करने में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई सहकारी बैंक नियमों का उल्लंघन करता है या जमाकर्ताओं के हितों को जोखिम में डालता है, तो नियामक प्राधिकारी त्वरित कार्रवाई करेंगे। ‘मिशन सक्षम’ के जरिए आने वाले दिनों में इन बैंकों के कर्मचारियों को डिजिटल बैंकिंग, जोखिम प्रबंधन (Risk Management) और कानूनी अनुपालन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: 1 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित सहकारी बैंक सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की?
उत्तर: इस सम्मेलन की अध्यक्षता आरबीआई के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे. और डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने की, जिसमें केंद्रीय रजिस्ट्रार शिवपाल सिंह भी शामिल हुए।

प्रश्न 2: आरबीआई ने इस सम्मेलन में किस नए अभियान पर जोर दिया?
उत्तर: आरबीआई ने अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों में क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के लिए ‘मिशन सक्षम’ (Mission SAKSHAM) पर विशेष जोर दिया।

प्रश्न 3: अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों (UCBs) में साइबर सुरक्षा क्यों जरूरी है?
उत्तर: डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ बढ़ते साइबर फ्रॉड और मनी-म्यूल खातों की रोकथाम के लिए आरबीआई ने बैंकों को साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका में समाचार एवं व्यापार संपादक हैं। वे अर्थव्यवस्था, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), बैंकिंग, शेयर बाजार, सरकारी योजनाओं, रोज़गार और भर्ती से जुड़ी खबरों तथा पाठकों के काम आने वाली व्यावहारिक जानकारी (कैसे करें/स्टेप-बाय-स्टेप गाइड) की रिपोर्टिंग और संपादन करते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि हर आँकड़ा, तिथि और प्रक्रिया आधिकारिक स्रोत से सत्यापित हो और लेख में मूल विज्ञप्ति या पोर्टल का लिंक दिया जाए। किसी गलती की सूचना के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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