
रेकरिंग डिपॉजिट (RD) छोटे और मध्यम निवेशकों के लिए एक निश्चित मासिक बचत योजना है, जो सुरक्षित रिटर्न देती है।
मुख्य बातें
- रेकरिंग डिपॉजिट में हर महीने एक निश्चित राशि जमा करनी होती है।
- ब्याज दर खाता खुलवाने के दिन ही तय हो जाती है और पूरे कार्यकाल तक वही रहती है।
- ब्याज की गणना तिमाही आधार पर होती है और परिपक्वता पर पैसा मिलता है।
- इस पर टीडीएस (TDS) का नियम लागू होता है यदि ब्याज एक सीमा से अधिक हो।
रेकरिंग डिपॉजिट एक ऐसी वित्तीय योजना है जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति हर महीने एक तय राशि बैंक या डाकघर में जमा करके सुरक्षित बचत कर सकता है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो एकमुश्त पैसे निवेश करने के बजाय टुकड़ों में बचत करना पसंद करते हैं।
रेकरिंग डिपॉजिट क्या है?
रेकरिंग डिपॉजिट यानी आरडी (RD) एक आवर्ती जमा खाता है। इसमें निवेशक को हर महीने एक निश्चित तारीख से पहले तय रकम जमा करनी होती है। यह योजना आमतौर पर 6 महीने से लेकर 10 साल तक के लिए होती है। इस पर मिलने वाला ब्याज फिक्स्ड डिपॉजिट यानी सावधि जमा (FD) के समान ही होता है और यह बैंक के नियमों के अनुसार त्रैमासिक (quarterly) आधार पर संयोजित होता है।
आरडी खाता कैसे खुलवाएं और पैसे कैसे जमा करें?
आरडी खाता किसी भी अधिकृत बैंक या भारतीय डाकघर में आसानी से खोला जा सकता है। इसे शुरू करने का सामान्य तरीका इस प्रकार है:
- अपनी पसंद के बैंक या डाकघर की नजदीकी शाखा में जाएं या नेट बैंकिंग का उपयोग करें।
- केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी करने के लिए पैन कार्ड और आधार कार्ड की कॉपी जमा करें।
- आरडी आवेदन फॉर्म में अपनी मासिक किस्त की राशि और कार्यकाल (tenure) भरें।
- मासिक किस्त के ऑटो-डेबिट के लिए बैंक खाते से लिंक करवाएं ताकि हर महीने समय पर पैसे कट सकें।
- खाता सक्रिय होने के बाद हर महीने तय तारीख पर किस्त जमा करते रहें।
ज़रूरी दस्तावेज़ और पात्रता
रेकरिंग डिपॉजिट खाता खोलने के लिए निम्नलिखित चीज़ों की आवश्यकता होती है:
- विधिवत भरा हुआ खाता खोलने का फॉर्म
- पैन कार्ड (PAN Card) अनिवार्य रूप से
- आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र (पासपोर्ट, वोटर आईडी)
- निवास प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट साइज रंगीन फोटोग्राफ
रेकरिंग डिपॉजिट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में अंतर
आरडी और एफडी दोनों ही सुरक्षित निवेश विकल्प हैं, लेकिन दोनों में बुनियादी फर्क है:
- जमा का तरीका: एफडी में एकमुश्त (lump sum) पैसा जमा किया जाता है, जबकि आरडी में हर महीने नियमित किस्त जमा होती है।
- जोखिम: दोनों ही योजनाओं में जोखिम शून्य के बराबर होता है क्योंकि इन्हें बैंक और डाकघर का समर्थन प्राप्त है।
- ब्याज दरें: दोनों की ब्याज दरें लगभग समान होती हैं, जो खाता खुलते समय ही लॉक हो जाती हैं।
आरडी से जुड़े अहम नियम और सावधानियां
यदि आप समय से पहले आरडी तुड़वाना चाहते हैं, तो बैंक पेनल्टी के रूप में कुछ ब्याज काट लेते हैं। यदि आप किसी महीने किस्त जमा करना भूल जाते हैं, तो बैंक छोटा जुर्माना लगा सकते हैं। इसके अलावा, यदि आरडी पर मिलने वाला कुल ब्याज एक वित्तीय वर्ष में तय सीमा (वर्तमान नियमों के अनुसार) से अधिक हो जाता है, तो बैंक उस पर टीडीएस (TDS) काटते हैं। फॉर्म 15G या 15H भरकर टैक्स छूट के दायरे वाले लोग इसे रोक सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? क्या रेकरिंग डिपॉजिट में बीच में पैसे निकालना संभव है? उत्तर। आंशिक निकासी की अनुमति आमतौर पर आरडी में नहीं होती है। जरूरत पड़ने पर आपको पूरा खाता समय से पहले बंद करना पड़ता है जिसपर पेनल्टी लगती है।
प्रश्न? न्यूनतम मासिक किस्त कितनी हो सकती है? उत्तर। अधिकांश बैंकों में आरडी की न्यूनतम राशि 100 रुपये प्रति माह से शुरू होती है, जो अलग-अलग बैंकों के नियमों पर निर्भर करती है।
प्रश्न? क्या आरडी में मिलने वाला ब्याज कर योग्य है? उत्तर। हां, आरडी पर मिलने वाला ब्याज निवेशक की आय में जुड़ता है और स्लैब के अनुसार कर योग्य होता है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश या वित्तीय सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले किसी योग्य/सेबी-पंजीकृत सलाहकार से परामर्श करें।
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यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com






