शुक्रवार, अक्टूबर 30, 2026

आईडीबीआई बैंक विनिवेश पर दीपम का स्पष्टीकरण, बोली और मूल्यांकन के नियम साफ

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आईडीबीआई बैंक विनिवेश

केंद्र सरकार के दीपम ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश और पुनर्गठन की प्रक्रिया, बोली नियमों, मूल्यांकन पद्धति और एलआईसी की हिस्सेदारी पर स्थिति साफ की है।

मुख्य बातें

  • दीपम के अनुसार प्रारंभिक बोली दिशानिर्देश सांकेतिक थे, जिन्हें आवश्यकतानुसार अनुकूलित किया जा सकता है।
  • 16 अगस्त 2017 के निर्णय के तहत सीजीडी (CGD) को प्रक्रियात्मक विचलनों को हल करने का पूर्ण अधिकार है।
  • मई 2026 में स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं ने दोहरी गोपनीयता के तहत नया व्यावसायिक मूल्यांकन पूरा किया।
  • 627 करोड़ रुपये की कर मांग समायोजन से बोली निर्धारित कीमत में 3,917 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज हुई।
  • सरकार और एलआईसी भविष्य में मिलने वाले मूल्य लाभ के लिए अपनी अवशिष्ट हिस्सेदारी अपने पास रखेंगे।

आईडीबीआई बैंक विनिवेश और रणनीतिक पुनर्गठन की जारी प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। दीपम की ओर से जारी बयान में बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान आयोजित प्रारंभिक बोली प्रक्रिया सांकेतिक दिशानिर्देशों पर आधारित थी। यह कोई कठोर कानूनी ढांचा नहीं है, बल्कि समयबद्ध तरीके से सौदा पूरा करने के लिए इसमें लचीलापन रखा गया है।

आईडीबीआई बैंक विनिवेश की प्रक्रिया को लेकर सरकार ने क्या स्पष्टीकरण दिया है?

आईडीबीआई बैंक विनिवेश की प्रक्रिया में सरकार के निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती बोलियां केवल सांकेतिक दिशानिर्देशों पर आधारित थीं। आरक्षित मूल्य और मूल्यांकन प्रक्रियाओं का संचालन स्वतंत्र एजेंसियों और कोर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज ऑन डिसइन्वेस्टमेंट (CGD) द्वारा पूर्ण गोपनीयता के साथ किया गया है।

दीपम के अनुसार, रणनीतिक लेनदेन की जटिल प्रकृति को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया में लचीलापन दिया गया है ताकि समय और लागत व्यर्थ न हो। सरकार की ओर से 14 अक्टूबर 2026 के प्रेस नोट का उल्लेख करते हुए दोहराया गया कि बोलीदाताओं के लिए पहले से कोई कठोर मानदंड तय नहीं थे। सभी पात्र बोलीदाताओं ने स्वयं मूल्यांकन करके गोपनीय तरीके से अपनी बोलियां प्रस्तुत की थीं।

आईडीबीआई बैंक विनिवेश में मूल्यांकन और गोपनीयता के नियम

बैंक के सही मूल्य का निर्धारण करने के लिए स्वतंत्र एजेंसियों को नियुक्त किया गया था। इन एजेंसियों के मूल्यांकन का उपयोग जमा की गई बोलियों की तर्कसंगतता जांचने के लिए एक तुलनात्मक पैमाने के रूप में किया गया। नियम के तहत, यदि उच्चतम बोलीदाता की वित्तीय बोली तय आरक्षित मूल्य से कम रहती है, तो भारत सरकार आगे की कार्यवाही पर निर्णय लेती है और पात्र बोलीदाता इस निर्णय पर सवाल नहीं उठा सकते।

16 अगस्त 2017 को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने विनिवेश सचिवों के कोर ग्रुप (CGD) को प्रक्रियात्मक कठिनाइयों को दूर करने और आवश्यक विचलन की अनुमति देने के विशेष अधिकार दिए थे। इन्हीं अधिकारों का प्रयोग करते हुए सीजीडी ने सर्वोत्तम प्रस्ताव दौर की प्रक्रिया निर्धारित की। इस दौरान आरक्षित मूल्य में न तो कोई कटौती की गई और न ही कोई बढ़ोतरी की गई।

अप्रैल 2026 में संपूर्ण मूल्यांकन पद्धति की समीक्षा की गई थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम परिणाम अप्रैल के अंत में सार्वजनिक होने के बाद स्वतंत्र एजेंसियों ने मई 2026 में संशोधित मूल्यांकन तैयार किया। इस दौरान दोहरी गोपनीयता बनाई रखी गई, जिसके तहत बोलीदाताओं को मूल्यांकन की जानकारी नहीं थी और मूल्यांकनकर्ताओं ने प्रस्तुत बोलियों को नहीं देखा था।

आईडीबीआई बैंक विनिवेश और बैंक की वर्तमान कानूनी स्थिति

व्यावसायिक मूल्यांकन के लिए बाजार गुणक विधि (Market Multiple Method) के तहत सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलनात्मक विधि का उपयोग किया गया। आईडीबीआई बैंक वर्ष 2019 तक पूर्णतः सरकारी स्वामित्व वाला बैंक था। 2019 में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) द्वारा बहुलांश हिस्सेदारी हासिल करने के बाद यह सरकार द्वारा नियंत्रित बैंकिंग कंपनी बन गया।

नियामक उद्देश्यों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इसे निजी बैंक के रूप में वर्गीकृत करता है, हालांकि इसका स्वामित्व मुख्य रूप से सरकार और एलआईसी के पास ही रहा है। शेयर बाजार के निवेशक भी इसे एक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई के रूप में ही देखते हैं।

कर देनदारी समायोजन से बोली मूल्य में 3,917 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी

संपत्ति मूल्यांकन के दौरान विवादित कर मांगों (Disputed Tax Demands) का भी समायोजन किया गया। संभावित कर देयता केवल 627 करोड़ रुपये की थी, लेकिन योग्य बोलीदाताओं की मांग के अनुसार समायोजन करने से बोली की निर्धारित कीमत में 3,917 करोड़ रुपये की भारी वृद्धि दर्ज की गई। इससे भारत सरकार और एलआईसी दोनों के लिए लेनदेन का कुल मूल्य काफी बढ़ गया।

आईडीबीआई बैंक पुनर्गठन प्रक्रिया के मुख्य बिंदु

  • 16 अगस्त 2017 को कैबिनेट समिति ने सीजीडी को रणनीतिक विनिवेश में प्रक्रियात्मक फैसले लेने का अधिकार दिया।
  • मई 2026 में दो स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा नई मूल्यांकन रिपोर्ट दोहरी गोपनीयता के साथ तैयार की गई।
  • 627 करोड़ रुपये की संभावित कर देनदारी के समायोजन से लेनदेन मूल्य में 3,917 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।
  • आरक्षित मूल्य में किसी भी स्तर पर कोई बदलाव या कमी नहीं की गई।
  • सरकार और एलआईसी भविष्य में बैंक की प्रगति से लाभ उठाने के लिए अवशिष्ट हिस्सेदारी बनाए रखेंगे।

इसका असर: खाताधारकों और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

इस रणनीतिक पुनर्गठन प्रक्रिया का बैंक के सामान्य खाताधारकों और जमाकर्ताओं पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। बैंक का परिचालन और नियमन आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। रणनीतिक साझेदार के आने से बैंक का प्रबंधन और पूंजी आधार मजबूत होगा।

सरकार और एलआईसी द्वारा अवशिष्ट हिस्सेदारी बनाए रखने का निर्णय यह दर्शाता है कि पुनर्गठन के बाद बैंक का बाजार मूल्य बढ़ने पर सार्वजनिक खजाने को अतिरिक्त वित्तीय लाभ प्राप्त होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: क्या आईडीबीआई बैंक का आरक्षित मूल्य घटाया गया है?
उत्तर: नहीं, दीपम ने स्पष्ट किया है कि आरक्षित मूल्य में कोई कमी या बढ़ोतरी नहीं की गई है और प्रक्रिया नियमों के अनुसार संचालित हुई है।

प्रश्न: आईडीबीआई बैंक में सरकार और एलआईसी की क्या भूमिका रहेगी?
उत्तर: सरकार और एलआईसी अपनी रणनीतिक हिस्सेदारी बेचने के बाद भी अवशिष्ट हिस्सेदारी अपने पास बनाए रखेंगे ताकि भविष्य में बैंक के शेयर मूल्य में वृद्धि का लाभ उठाया जा सके।

प्रश्न: बैंक का व्यावसायिक मूल्यांकन किस आधार पर किया गया?
उत्तर: बैंक का मूल्यांकन बाजार गुणक विधि के तहत अन्य सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय स्थिति से तुलना करके मई 2026 में किया गया।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका में समाचार एवं व्यापार संपादक हैं। वे अर्थव्यवस्था, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), बैंकिंग, शेयर बाजार, सरकारी योजनाओं, रोज़गार और भर्ती से जुड़ी खबरों तथा पाठकों के काम आने वाली व्यावहारिक जानकारी (कैसे करें/स्टेप-बाय-स्टेप गाइड) की रिपोर्टिंग और संपादन करते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि हर आँकड़ा, तिथि और प्रक्रिया आधिकारिक स्रोत से सत्यापित हो और लेख में मूल विज्ञप्ति या पोर्टल का लिंक दिया जाए। किसी गलती की सूचना के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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