
गृह मंत्री अमित शाह ने चक्रवात अर्नब के मद्देनजर आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर केंद्र से हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
मुख्य बातें
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से फोन पर स्थिति की जानकारी ली।
- चक्रवात अर्नब से बचाव के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें युद्धस्तर पर तैनात हैं।
- आपदा के प्रभाव का सटीक आकलन करने और आवश्यक वित्तीय सहायता तय करने के लिए जल्द ही अंतर-मंत्रालयी केन्द्रीय टीमें (IMCT) भेजी जाएंगी।
चक्रवात अर्नब के बढ़ते खतरे और प्रभाव को देखते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने प्रभावित राज्यों के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क साधकर स्थिति की गहन समीक्षा की है। गृह मंत्री ने 29 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से सीधी बातचीत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार इस प्राकृतिक आपदा के समय नागरिकों को होने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए हरसंभव सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
चक्रवात अर्नब की स्थिति और केंद्र सरकार का रुख
चक्रवात अर्नब के कारण उत्पन्न आपदा की स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों को सभी आवश्यक केंद्रीय सहायता देने का भरोसा दिलाया है। प्रभावित इलाकों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें सक्रिय रूप से तैनात की गई हैं।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, गृह मंत्री ने कहा कि आपदा के प्रभाव का आकलन करने और आगे की आवश्यक मदद तय करने के लिए जल्द ही अंतर-मंत्रालयी केन्द्रीय टीमें (IMCT) प्रभावित राज्यों में भेजी जाएंगी। केंद्र सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के साथ खड़ी है। चक्रवात अर्नब से जन-धन की हानि को न्यूनतम रखना और राहत कार्य तेज करना प्राथमिक लक्ष्य है।
चक्रवात अर्नब से प्रभावित राज्य और बचाव कार्य
इस चक्रवाती तूफान का प्रभाव भारत के पूर्वी तट और उससे सटे राज्यों में मुख्य रूप से देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार की ओर से जिन चार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ उच्च स्तरीय संवाद किया गया है, वहां आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है:
- आंध्र प्रदेश: तटीय जिलों में चक्रवात अर्नब के कारण तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
- पुडुचेरी: केंद्रशासित प्रदेश के तटीय इलाकों में एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
- ओडिशा: ओडिशा का तटीय भूभाग हमेशा चक्रवाती तूफानों के प्रति संवेदनशील रहा है। राज्य में आपदा प्रतिक्रिया टीमों को पहले से ही तैनात कर दिया गया है।
- छत्तीसगढ़: ओडिशा और आंध्र प्रदेश से सटे छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों में चक्रवात अर्नब के असर से मूसलाधार बारिश और हवाओं की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
गृह मंत्री के आश्वासन के बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। संवेदनशील इलाकों में राहत सामग्री, पेयजल और चिकित्सा टीमों का अग्रिम प्रबंध किया गया है।
आईएमसीटी (IMCT) का क्या होगा काम?
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में विशेष रूप से उल्लेख किया कि आपदा के प्रभाव का सही आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केन्द्रीय टीमें (IMCT) भेजी जाएंगी। भारत में किसी भी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद राहत राशि तय करने के लिए यह एक मानक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया है।
आईएमसीटी में गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, और जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होते हैं। यह संयुक्त टीम आपदा से प्रभावित क्षेत्रों का मौके पर जाकर निरीक्षण करती है। आईएमसीटी मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों का आकलन करती है: पहला, कृषि और फसलों को पहुंचा नुकसान; दूसरा, सड़कों, पुलों और बिजली के खंभों जैसे बुनियादी ढांचे की क्षति; और तीसरा, नागरिकों के मकानों तथा संपत्तियों का नुकसान। इस रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से राज्यों को अतिरिक्त वित्तीय मदद मंजूर की जाती है।
आपदा प्रबंधन का भारतीय ढांचा और राहत रणनीति
भारत में चक्रवाती तूफानों जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए बहुस्तरीय संस्थागत व्यवस्था काम करती है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) नीति निर्माण का कार्य करता है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। वहीं, गृह मंत्रालय आपदा प्रबंधन के लिए नोडल केंद्रीय मंत्रालय के रूप में काम करता है।
जब भी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) चक्रवात की सूचना देता है, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की बटालियनों को बिना समय गंवाए संभावित प्रभावित जिलों में पहले से (pre-positioning) तैनात कर दिया जाता है। एनडीआरएफ के पास आधुनिक जीवन रक्षक उपकरण, कटर, नाव और सैटेलाइट संचार प्रणाली होती है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और जिला स्तर पर जिलाधिकारी राहत शिविरों और निकासी कार्य का संचालन करते हैं।
यह भी जानें: केंद्र और राज्यों का समन्वय क्यों है महत्वपूर्ण?
चक्रवात अर्नब जैसी आपदाएं भौगोलिक सीमाओं में नहीं बांधी जा सकतीं। एक चक्रवाती तूफान तटीय राज्यों के साथ-साथ भीतरी राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ को भी प्रभावित करता है। ऐसे में केंद्र और राज्यों के बीच सीधा और त्वरित संवाद प्रशासनिक बाधाओं को दूर करता है।
गृह मंत्री का सीधे मुख्यमंत्रियों से बात करना यह सुनिश्चित करता है कि यदि राज्यों को भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर, नौसेना की नावें या सेना की टुकड़ियों की आवश्यकता हो, तो बिना किसी कागजी देरी के तुरंत मंजूरी मिल सके। इसके अलावा, बिजली और संचार लाइनों को दोबारा बहाल करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों की तकनीकी टीमों को फौरन रवाना किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: चक्रवात अर्नब के संबंध में गृह मंत्री अमित शाह ने किन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की?
उत्तर: गृह मंत्री अमित शाह ने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बात की और उन्हें केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।
प्रश्न: चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में किन राहत बलों को तैनात किया गया है?
उत्तर: आपदा प्रभावित इलाकों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य के लिए तैनात किया गया है।
प्रश्न: आईएमसीटी (IMCT) टीम का प्रमुख कार्य क्या होता है?
उत्तर: अंतर-मंत्रालयी केन्द्रीय टीम (IMCT) आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करके फसलों, मकानों और बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान का सटीक आकलन करती है ताकि राज्यों को केंद्रीय कोष से सहायता दी जा सके।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






