
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 को संबोधित करते हुए वैश्विक संस्थानों में सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर दिया।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 को संबोधित किया।
- सितंबर महीने में वस्तुओं के निर्यात में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
- भारत गैर-जीवाश्म स्रोतों से 300 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता को पार कर चुका है।
- वर्ष 2025 में देश में लगभग 1.5 लाख पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 को संबोधित किया। देश में चल रहे उल्लासपूर्ण त्योहारों के माहौल के बीच अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने गंभीर वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में नई विश्व व्यवस्था को लेकर चर्चाएं हर तरफ हो रही हैं, क्योंकि वैश्विक बदलाव आम नागरिकों के दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित कर रहे हैं।
एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में वैश्विक व्यवस्था पर चर्चा
एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘द वर्ल्ड बिटवीन आर्डर्स’ विषय का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक समुदाय को यह सोचना चाहिए कि पुरानी व्यवस्थाएं आज के संकटों को सुलझाने में क्यों विफल हो रही हैं। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना संवाद और सहयोग के लिए हुई थी, लेकिन समय के साथ वैश्विक संस्थान खुद को ढालने में नाकाम रहे। व्यापार और समुद्री मार्ग जैसे माध्यम आज संघर्ष का केंद्र बनते जा रहे हैं। उन्होंने बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज को उचित स्थान देने पर बल दिया।
वैश्विक स्थिरता और भारत की बढ़ती भूमिका
चाणक्य के अर्थशास्त्र का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कमजोर व्यवस्थाओं में मत्स्य न्याय की स्थिति पैदा होती है, जहां बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है। भारत का दृष्टिकोण ऐसी व्यवस्था को रोकना है। महामारी के दौरान भारत ने 100 से अधिक देशों को टीके और दवाइयां भेजीं। जी-20 और ब्रिक्स सम्मेलनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने विरोधी विचारों के बीच सेतु बनाते हुए सर्वसम्मति से दिल्ली घोषणापत्र पारित कराया।
आर्थिक प्रगति और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मील के पत्थर
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ग्रीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल अर्थव्यवस्था में देश अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
- रियल-टाइम डिजिटल भुगतान में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है।
- गैर-जीवाश्म स्रोतों से बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता 300 गीगावाट के पार पहुंच गई है।
- वर्ष 2025 में देश में लगभग 1.5 लाख पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए।
- वैश्विक चिप-डिजाइन का 20 प्रतिशत हिस्सा भारत में है।
ब्रेन ऑफिस के रूप में उभरता भारत
भारत अब केवल दुनिया का ‘बैक ऑफिस’ नहीं रहा, बल्कि ‘ब्रेन ऑफिस’ बन चुका है। देश के शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों ने अब तक 325 से अधिक चिप डिजाइन तैयार किए हैं। दुनिया के आधे से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भारत में स्थित हैं, जो एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे उन्नत क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में पेनिसिलिन जी का घरेलू उत्पादन फिर से शुरू हुआ है।
युवाओं, महिलाओं और रोजगार के मोर्चे पर सुधार
सरकार की नीतियों के कारण गांवों में 3.5 करोड़ से अधिक लखपति दीदियां बन चुकी हैं, और लक्ष्य 6 करोड़ लखपति दीदियां बनाने का है। विकसित भारत रोजगार योजना के तहत 70 लाख नए रोजगार सृजित किए जा रहे हैं। मध्यम वर्ग को 12 लाख रुपये तक की आय पर शून्य कर का लाभ मिल रहा है। सितंबर माह में वस्तुओं के निर्यात में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 का आयोजन कहां हुआ था?
उत्तर। इस समिट का आयोजन नई दिल्ली में किया गया था।
प्रश्न? प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किस प्राचीन ग्रंथ का उल्लेख किया?
उत्तर। प्रधानमंत्री ने चाणक्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख किया था।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






