
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ब्लूमबर्ग इकोनॉमी फोरम 2026 में कहा कि भारत का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और यह एआई तथा डेटा सेंटरों की ऊर्जा मांग को पूरा करेगा।
मुख्य बातें
- भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
- देश का लक्ष्य 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करना है।
- परमाणु ऊर्जा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा सेंटरों की बिजली जरूरतों को पूरा करेगी।
- डॉ. जितेंद्र सिंह ने ब्लूमबर्ग इकोनॉमी फोरम 2026 में यह बात कही।
परमाणु ऊर्जा का उपयोग भारत में पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों और राष्ट्रीय विकास के लिए किया जा रहा है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘ब्लूमबर्ग इकोनॉमी फोरम 2026’ के दौरान एक विशेष बातचीत में यह स्पष्ट किया कि देश का परमाणु कार्यक्रम युद्ध के लिए नहीं है। उन्होंने देश की परमाणु यात्रा के शुरुआती दृष्टिकोण को याद करते हुए कहा कि भारत अपनी उभरती विकासात्मक और तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।
भारत का परमाणु कार्यक्रम और भविष्य की ऊर्जा जरूरतें
भारत की परमाणु ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को देश के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धताओं से जोड़ा गया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने साल 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता पैदा करने का लक्ष्य तय किया है। इसके अलावा, भारत साल 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन के अपने संकल्प को पूरा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है, जहां परमाणु ऊर्जा अन्य स्रोतों के साथ मिलकर निरंतर और भरोसेमंद स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराएगी।
एआई और डेटा सेंटरों के लिए परमाणु ऊर्जा की भूमिका
जैसे-जैसे देश में तकनीकी और डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा सेंटरों के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता बढ़ रही है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि परमाणु ऊर्जा इस उभरती हुई मांग को पूरा करने में एक अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक पर तेजी से निर्भर होती अर्थव्यवस्था के लिए परमाणु ऊर्जा एक भरोसेमंद और निरंतर ऊर्जा स्रोत साबित होगी जो अन्य ऊर्जा कार्यक्रमों की पूरक बनेगी।
एआई का जिम्मेदार उपयोग और राष्ट्रीय चुनौतियां
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एआई को केवल एक अलग क्षेत्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह अंतरिक्ष और जीवन विज्ञान समेत सभी क्षेत्रों के लिए एक जरूरी उपकरण बनता जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एआई का सही उपयोग सुनिश्चित करना और इसका दुरुपयोग रोकना एक बड़ी चुनौती है। तकनीकी का इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो, इसके लिए व्यक्तिगत और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर ईमानदारी और इंसानी समझ का होना बहुत जरूरी है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी और विकास के नए रास्ते
मोदी सरकार के फैसलों का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों को अब गैर-सरकारी कंपनियों के लिए अधिक खोला गया है। पहले इन क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बहुत सीमित थी, लेकिन अब दायरा बढ़ने से उद्योगों को तकनीकी प्रगति और नवाचार में सीधे योगदान देने का अवसर मिल रहा है। परमाणु ऊर्जा और एआई के तालमेल से भारत अपने 2047 के विकास लक्ष्यों को हासिल करने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
यह भी जानें: भारत के परमाणु कार्यक्रम का इतिहास और पृष्ठभूमि
भारत के परमाणु कार्यक्रम की नींव महान वैज्ञानिक डॉ. होमी भाभा ने रखी थी। स्वतंत्रता के बाद से ही भारत ने परमाणु तकनीक का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, कृषि, चिकित्सा और अनुसंधान जैसे शांतिपूर्ण कार्यों के लिए करने की नीति अपनाई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई艰难 दौर देखने के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता के लिए परमाणु तकनीक को विकसित किया है। वर्तमान समय में देश में कई परमाणु ऊर्जा संयंत्र चालू हैं और नए संयंत्रों के निर्माण से इसकी क्षमता को लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित किया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? भारत का परमाणु कार्यक्रम किस उद्देश्य के लिए है? उत्तर। भारत का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों और राष्ट्रीय विकास के लिए समर्पित है।
प्रश्न? भारत ने परमाणु ऊर्जा के लिए क्या लक्ष्य रखा है? उत्तर। भारत ने साल 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता और 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।
प्रश्न? यह बयान किसने और कहाँ दिया? उत्तर। यह बयान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘ब्लूमबर्ग इकोनॉमी फोरम 2026’ के दौरान दिया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






