
मत्स्यपालन विभाग के केन्द्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 18 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी स्थित शीतजल मत्स्यपालन क्लस्टर का दौरा किया और स्थानीय किसानों से चर्चा की।
मुख्य बातें
- मत्स्यपालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 18 अक्टूबर 2026 को पिथौरागढ़ के मुनस्यारी का दौरा किया।
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत पिथौरागढ़ को शीतजल मत्स्यपालन क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है।
- भारत सरकार ने ठंडे पानी वाले पहाड़ी राज्यों में पीएमएमएसवाई के तहत 2,299 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है।
- जून 2026 में उत्तराखंड ने नेपाल को ट्राउट मछली का अपना पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात किया था।
भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्यपालन विभाग के सचिव, डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 18 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी का आधिकारिक दौरा किया। इस उच्च स्तरीय दौरे का मुख्य उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में ठंडे पानी में मत्स्यपालन यानी कोल्डवॉटर एक्वाकल्चर के विकास की प्रगति की समीक्षा करना था। सचिव ने इस दौरान स्थानीय किसानों से बातचीत की और क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं का जायजा लिया।
मुनस्यारी में मत्स्यपालन क्लस्टर की प्रगति और किसानों से चर्चा
मत्स्यपालन क्लस्टर के रूप में विकसित हो रहे मुनस्यारी में केंद्रीय सचिव ने जौहर मत्स्य स्वायत्त सहकारिता और नमजाला ट्राउट फार्म का निरीक्षण किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने रेनबो ट्राउट पालन को आजीविका के एक टिकाऊ विकल्प के रूप में अपनाने वाले स्थानीय किसानों के साथ अपने अनुभव साझा किए। गोरी गंगा की बर्फीली धाराओं और अनुकूल जल तापमान के चलते मुनस्यारी रेनबो ट्राउट पालन का एक प्रमुख केन्द्र बन चुका है, जिसने पारंपरिक खेती को एक अर्ध-व्यावसायिक उद्यम में बदल दिया है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और हिमालयी राज्यों की भूमिका
प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, भारत सरकार ने देश भर में 34 मत्स्यपालन क्लस्टरों को अधिसूचित किया है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत पिथौरागढ़ को शीतजल मत्स्यपालन क्लस्टर के रूप में चुना गया है। सचिव ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में ठंडे पानी का मत्स्यपालन आजीविका, पोषण सुरक्षा और निर्यात के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने पीएमएमएसवाई के तहत इन ठंडे पानी वाले क्षेत्रों में 2,299 करोड़ रुपये से अधिक का भारी निवेश किया है, जिससे रेसवे, हैचरी, फीड मिल और कोल्ड स्टोरेज जैसे बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है।
उत्तराखंड में ट्राउट उत्पादन और निर्यात के आंकड़े
पिछले एक दशक में देश के पहाड़ी क्षेत्रों में ट्राउट मछली का उत्पादन छह गुना बढ़कर लगभग 5,000 मीट्रिक टन (एमटी) वार्षिक तक पहुंच गया है। उत्तराखंड राज्य में अब तक 317 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें सितारगंज का इंटीग्रेटेड एक्वापार्क भी शामिल है। राज्य सरकार ने 170 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ट्राउट प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इसके तहत 2028-29 तक 1,500 रेसवे, 100 मिनी हैचरी और 600 कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
- देश भर में 34 मत्स्यपालन क्लस्टर अधिसूचित किए गए हैं।
- पिथौरागढ़ को पीएमएमएसवाई के तहत शीतजल क्लस्टर बनाया गया है।
- पहाड़ी राज्यों में ट्राउट उत्पादन बढ़कर लगभग 5,000 एमटी वार्षिक हुआ।
- उत्तराखंड सरकार ने नेपाल को ट्राउट मछली का निर्यात शुरू किया है।
सीमावर्ती अर्थव्यवस्था और आईटीबीपी के साथ सहयोग
इस दौरे से सीमावर्ती गांवों में ट्राउट पालन के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को भी बल मिला है। उत्तराखंड सरकार का मत्स्यपालन विभाग न केवल नेपाल को ट्राउट मछली का निर्यात कर रहा है, बल्कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ हुए एक समझौता ज्ञापन के तहत आईटीबीपी को भी इसकी आपूर्ति की जा रही है। भीमताल स्थित आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ कोल्डवाटर फिशरीज रिसर्च (डीसीएफआर) ने मुनस्यारी में रेनबो ट्राउट मछली को लाने और बीज उत्पादन तथा बीमारी प्रबंधन में वैज्ञानिक सहायता प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? मुनस्यारी में किस मछली का मुख्य रूप से पालन किया जाता है?
उत्तर। मुनस्यारी में मुख्य रूप से रेनबो ट्राउट मछली का पालन किया जाता है।
प्रश्न? पिथौरागढ़ को किस योजना के तहत शीतजल क्लस्टर बनाया गया है?
उत्तर। पिथौरागढ़ को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत शीतजल मत्स्यपालन क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






