
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने बेंगलुरु में केंद्रीय रेशम बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस पर भारत को वैश्विक रेशम उत्पादन में पहले स्थान पर लाने का संकल्प दोहराया।
मुख्य बातें
- भारत का रेशम उत्पादन 2014 के 26,000 मीट्रिक टन से बढ़कर 42,000 मीट्रिक टन हो गया है।
- वर्ष 2028-29 तक भारत को वैश्विक स्तर पर रेशम उत्पादन में पहला स्थान दिलाने का संकल्प लिया गया है।
- वर्ष 2030-31 तक देश में रेशम उत्पादन को 60,000 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
- किसानों की वार्षिक आय बढ़ाकर 10 लाख से 12 लाख रुपये तक करने की आकांक्षा है।
भारत को वैश्विक रेशम उत्पादन में पहले स्थान पर पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नया और बड़ा रोडमैप तैयार किया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने बेंगलुरु के यूएएस-जीकेवीके सभागार में केंद्रीय रेशम बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन करते हुए यह घोषणा की। इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के रेशम उत्पादक किसान और बुनकर बड़ी संख्या में शामिल हुए।
रेशम उत्पादन 2028-29 तक नंबर एक बनने का लक्ष्य
भारत को वैश्विक रेशम उत्पादन में नंबर 1 स्थान पर पहुंचाने का संकल्प: श्री गिरिराज सिंह, केंद्रीय वस्त्र मंत्री। देश में रेशम का कुल उत्पादन 2014 में 26,000 मीट्रिक टन था, जो अब बढ़कर 42,000 मीट्रिक टन पर पहुंच गया है। सरकार ने साल 2028-29 तक देश को इस क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही, वर्ष 2030-31 तक इस उत्पादन को बढ़ाकर 60,000 मीट्रिक टन करने की योजना पर काम चल रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शहतूत के पत्तों की पैदावार में सुधार और रेशमकीट पालन चक्रों में बढ़ोतरी करके किसानों की वार्षिक आय को 10 लाख से 12 लाख रुपये तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा। किसानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ‘सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान’ पुरस्कार प्रतियोगिताएं आयोजित करने का भी आह्वान किया गया है। चीन के रेशम उत्पादन में गिरावट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रेशम की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका फायदा देश के किसानों को मिलना तय है।
कर्नाटक और दक्षिण भारत की भूमिका
राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कार्यक्रम में बताया कि कर्नाटक देश के कुल रेशम उत्पादन में सबसे आगे है। सरकार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और औद्योगिक विकास पर जोर दे रही है ताकि वैश्विक निर्यात मानकों के अनुकूल रेशम तैयार किया जा सके। इससे आयात पर निर्भरता घटेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
- देश का रेशम उत्पादन बढ़कर 42,000 मीट्रिक टन हुआ।
- 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य।
- किसानों की आय 10 से 12 लाख रुपये तक करने की योजना।
- उत्पादन में गुणवत्ता जांच के लिए एआई और जीआईएस तकनीक का इस्तेमाल।
तकनीक और वैज्ञानिक नवाचार का प्रसार
वस्त्र मंत्रालय में संयुक्त सचिव (रेशम) और केंद्रीय रेशम बोर्ड की उपाध्यक्ष पद्मिनी सिंगला ने बताया कि उत्पादन क्षमता को धार देने के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जीआईएस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों को एकीकृत किया जा रहा है। उच्च उपज देने वाली संकर किस्मों और मशीनों को सीधे किसानों तक पहुंचाया जा रहा है ताकि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। कार्यक्रम के दौरान 28 वैज्ञानिकों को नियुक्ति पत्र बांटे गए और विभिन्न संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान भी किया गया।
इसका असर और किसानों के लिए मायने
इस पूरी पहल का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रेशम किसानों पर पड़ेगा। चीन के मुकाबले भारतीय रेशम को ग्लोबल मार्केट में स्थापित करने के लिए सरकार कताई, बुनाई और उत्पादन की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत कर रही है। देश के वस्त्र बाजार को 300 बिलियन डॉलर तक ले जाने के इस सफर में बुनकरों और श्रमिकों की न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता सूची में रखा गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? भारत का वर्तमान रेशम उत्पादन कितना है?
उत्तर। प्रेस सूचना ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, देश का रेशम उत्पादन वर्तमान में 42,000 मीट्रिक टन है।
प्रश्न? भारत को वैश्विक स्तर पर नंबर एक बनाने का लक्ष्य कब तक का है?
उत्तर। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक भारत को रेशम उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर लाने का संकल्प लिया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






