
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को द्वारका के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे, जिसमें वैश्विक चिप दिग्गज और नीति-निर्माता शामिल होंगे।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को द्वारका स्थित यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे।
- इस सम्मेलन की मुख्य थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: पूरा इकोसिस्टम बनाना’ रखी गई है।
- सरकार ने सेमीकॉन 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है।
- छह राज्यों में 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिली है।
- भारत में उपयोग होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब देश के भीतर ही निर्मित हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को नई दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का आधिकारिक उद्घाटन करेंगे। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया की दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनियों के प्रमुख, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक और निवेशक एक साथ मंच पर मौजूद रहेंगे। भारत ने बीते कुछ वर्षों में सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में अपनी बुनियादी क्षमताओं को तेजी से विकसित किया है और यह आयोजन भारत की तकनीकी प्रगति को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का प्रमुख अवसर है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 क्या है और इसका क्या महत्व है?
सेमीकॉन इंडिया 2026 भारत के सेमीकंडक्टर निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक इकोसिस्टम को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने वाला तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन है। इसका उद्घाटन 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारका के यशोभूमि में करेंगे। इस सम्मेलन की मुख्य थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: पूरा इकोसिस्टम बनाना’ रखी गई है, जिसमें 600 से अधिक प्रदर्शक और 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भाग ले रही हैं।
यशोभूमि में आयोजित होने वाले इस प्रदर्शनी और सम्मेलन में 15,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में 600 से अधिक प्रदर्शक और 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भाग ले रही हैं। इसमें 150 से अधिक वैश्विक वक्ता अपने अनुभव साझा करेंगे। इस आयोजन में 6 देशों के विशेष पवेलियन और भारत के 12 राज्यों के पवेलियन स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त स्टार्टअप शोकेस, छात्रों के लिए हैकाथॉन, स्किल डेवलपमेंट पवेलियन और विमेन फोरम का भी आयोजन किया जा रहा है।
सेमीकॉन 1.0 से सेमीकॉन 2.0 तक का सफर
भारत सरकार ने देश में चिप निर्माण और डिजाइनिंग की मजबूत नींव रखने के लिए वर्ष 2021 में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की थी। शुरुआती चरण यानी सेमीकॉन 1.0 के तहत 76,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ चिप असेंबली तक सीमित रहना नहीं था, बल्कि सिलिकॉन वेफर निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण आपूर्ति और raw material तैयार करने वाली पूरी वैल्यू चेन को स्वदेशी रूप से विकसित करना था।
जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी, जिसके लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का भारी आवंटन किया गया है। यह नया चरण छह मुख्य स्तंभों पर केंद्रित है: चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री निर्माण, फैब्रिकेशन प्लांट (Fab), आधुनिक पैकेजिंग (ATMP/OSAT), अनुसंधान एवं विकास (R&D) और कुशल मानव संसाधन का निर्माण। पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में देश के छह राज्यों में 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनमें से तीन संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू हो चुका है।
स्मार्टफोन निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की बड़ी छलांग
सेमीकंडक्टर उद्योग की सफलता भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के विस्तार से सीधी जुड़ी हुई है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 में भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान का कुल उत्पादन 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
- मोबाइल उत्पादन में वृद्धि: 2014-15 में 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया।
- मोबाइल निर्यात में बढ़ोतरी: 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा (165 गुना वृद्धि)।
- घरेलू खपत: भारत में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब देश के अंदर ही तैयार किए जाते हैं।
- स्मार्टफोन निर्यात का दर्जा: वित्त वर्ष 2025-26 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन चुका है, जिसने पेट्रोलियम उत्पादों को पीछे छोड़ दिया है।
- रोजगार सृजन: देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से इस समय लगभग 25 लाख लोगों को सीधा रोजगार मिल रहा है।
चिप डिजाइनिंग और ChipIN सेंटर की रणनीतिक भूमिका
किसी भी चिप के निर्माण से पहले उसकी सटीक डिजाइनिंग सबसे आवश्यक चरण होती है। केंद्र सरकार ने इस दशक के अंत तक देश में 85,000 प्रशिक्षित सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार करने का लक्ष्य रखा है। ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ (C2S) कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) के आधुनिक सॉफ्टवेयर और टूल्स 320 उच्च शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध कराए गए हैं, जहाँ 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के तहत 105 स्टार्टअप्स और एमएसएमई (MSME) इकाइयों को वित्तीय और तकनीकी सहायता दी गई है। अप्रैल 2026 तक 75 संस्थानों ने 211 चिप डिजाइन तैयार करके ‘टेप-आउट’ चरण तक पहुंचा दिए थे, जिनमें से 7 चिप्स का निर्माण 12 नैनोमीटर तकनीक के स्तर पर किया जा चुका है। सी-डैक (C-DAC) में स्थापित ‘ChipIN Centre’ एक साझा राष्ट्रीय सुविधा केंद्र के रूप में काम कर रहा है। इस सेंटर का उपयोग 400 शैक्षणिक संस्थानों और 100 स्टार्टअप्स के 1 लाख से अधिक इंजीनियर कर चुके हैं, जिन्होंने मिलकर 300 से ज्यादा उन्नत चिप डिजाइन तैयार किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और Pax Silica गठबंधन
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी वैश्विक उपस्थिति मजबूत करने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी साझेदारी बढ़ा रहा है। इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान भारत औपचारिक रूप से ‘Pax Silica’ गठबंधन में शामिल हुआ। इस गठबंधन में अमेरिका और उसके प्रमुख सहयोगी देश शामिल हैं, जिसका उद्देश्य वैश्विक सिलिकॉन और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग सिलिकॉन सप्लाई चेन के प्रत्येक हिस्से को सुरक्षित करने का काम करता है, जिसमें आवश्यक खनिजों के खनन से लेकर चिप निर्माण, उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम और डेटा सेंटर का इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला किसी एक देश या कंपनी के एकाधिकार में न रहे और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर लोकतांत्रिक राष्ट्रों का नियंत्रण बना रहे।
इसका असर: आम नागरिक और भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सेमीकंडक्टर निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता का सीधा असर आम भारतीय नागरिक के जीवन और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, कार, इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन, मेडिकल उपकरण (जैसे एमआरआई मशीन) और उपग्रहों में सेमीकंडक्टर चिप्स ही मुख्य नियंत्रक के रूप में कार्य करती हैं। कोरोना महामारी के दौरान वैश्विक चिप कमी के कारण वाहन निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
भारत में ही चिप का निर्माण और डिजाइन होने से इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की लागत में कमी आएगी, आपूर्ति श्रृंखला निर्बाध रहेगी और देश में उच्च तकनीक वाले रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। सेमीकॉन इंडिया 2026 इसी बदलाव का प्रतीक है, जहाँ भारत केवल चिप का उपभोक्ता नहीं बल्कि एक प्रमुख वैश्विक निर्माता बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन कहां और कब हो रहा है?
उत्तर। सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक नई दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि (Yashobhoomi) कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।
प्रश्न? सेमीकॉन 2.0 योजना के लिए कितना बजट रखा गया है?
उत्तर। केंद्र सरकार ने सेमीकॉन 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया है, जिसका ध्यान फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, आरएंडडी और चिप डिजाइनिंग पर है।
प्रश्न? ChipIN सेंटर क्या है और यह कैसे मदद करता है?
उत्तर। ChipIN Centre सी-डैक (C-DAC) द्वारा संचालित एक राष्ट्रीय साझा सुविधा केंद्र है, जो छात्रों, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को महंगे चिप डिजाइन टूल्स और फैब्रिकेशन सेवाएं मुफ्त या सस्ती दरों पर उपलब्ध कराता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






