
नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी और नाइजीरिया की मंत्री इमान सुलेमान-इब्राहिम के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें महिला सशक्तिकरण और बाल सुरक्षा पर जोर दिया गया।
मुख्य बातें
- 14 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत और नाइजीरिया के बीच महिला एवं बाल विकास पर द्विपक्षीय बैठक हुई।
- भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के तहत नाइजीरिया ने भागीदार देश के रूप में इस वार्ता में भाग लिया।
- नाइजीरिया ने भारत के स्वयं सहायता समूह मॉडल, पोषण सहायता और कौशल विकास की सराहना की।
- बाल अधिकार, कठिन परिस्थितियों में बाल संरक्षण और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर विशेष सहमति बनी।
महिला विकास सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने नाइजीरिया गणराज्य की महिला विषयों और सामाजिक विकास मंत्री इमान सुलेमान-इब्राहिम से मुलाकात की। 14 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के कार्यालय में आयोजित इस वार्ता में दोनों देशों ने महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा की।
महिला विकास सहयोग: बैठक का मुख्य उद्देश्य और निर्णय
महिला विकास सहयोग के तहत भारत और नाइजीरिया ने लैंगिक समानता, बाल अधिकार और महिला उद्यमिता के क्षेत्रों में संयुक्त प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई है। वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान इस बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें नाइजीरिया ने भागीदार देश के रूप में हिस्सा लिया। दोनों देशों ने वित्तीय समावेशन, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों पर अनुभव साझा करने का निर्णय लिया है।
महिला नेतृत्व वाले विकास पर भारत का दृष्टिकोण
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भारत की नीतियों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में महिला नेतृत्व वाले विकास के मॉडल पर तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए स्वयं सहायता समूहों और महिला संगठनों का सही इस्तेमाल सबसे कारगर माध्यम सिद्ध हुआ है।
भारत ने नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल के समक्ष यह बात रखी कि जब महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, तो इससे समाज के हर वर्ग को लाभ पहुंचता है। ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता के संदर्भ में भारत ने स्पष्ट किया कि अफ्रीका महाद्वीप की आवाज वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ के मंच पर महत्वपूर्ण है और नाइजीरिया की भागीदारी से इस साझा प्रयास को नई मजबूती मिलेगी।
बाल अधिकार, संरक्षण और डिजिटल सुरक्षा पर चर्चा
द्विपक्षीय वार्ता में बाल अधिकारों के संरक्षण और कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों की देखभाल पर विशेष ध्यान दिया गया। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने मंत्रालय द्वारा संचालित उन प्रमुख पहलों का ब्योरा साझा किया जो बच्चों की सुरक्षा और सहायता के लिए लागू की गई हैं।
इंटरनेट के बढ़ते उपयोग को देखते हुए बच्चों की डिजिटल सुरक्षा का मुद्दा भी बातचीत का मुख्य हिस्सा बना। दोनों पक्षों ने माना कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल माहौल प्रदान करना आधुनिक समय की बड़ी जरूरत है। इसके लिए दोनों देश एक-दूसरे की नीतियों से सीख लेकर नई कार्ययोजनाएं बना सकते हैं।
नाइजीरिया ने भारत की सर्वोत्तम प्रथाओं की सराहना की
नाइजीरिया की मंत्री इमान सुलेमान-इब्राहिम ने नई दिल्ली में मिले आत्मीय स्वागत के लिए आभार जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाइजीरिया भारत के सफल सामाजिक मॉडलों का अध्ययन करने और उनसे सीखने के लिए बेहद उत्सुक है।
नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में भारत के अनुभवों से सीखने की इच्छा व्यक्त की:
- महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन और उनका कौशल विकास।
- महिला उद्यमियों को वित्तीय मदद और आसान ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था।
- राष्ट्रीय पोषण सहायता कार्यक्रम और कुपोषण से निपटने की रणनीतियां।
- स्वास्थ्य सेवा अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका और भागीदारी का विस्तार।
- महिला नेतृत्व वाली शासन प्रणालियों का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन।
इसका असर: महिला विकास सहयोग से क्या बदलेगा?
भारत और नाइजीरिया के बीच हुआ यह संवाद केवल प्रशासनिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर दोनों देशों की सामाजिक और आर्थिक नीतियों पर पड़ेगा। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग और स्वरोजगार से जोड़ा है। नाइजीरिया में इस मॉडल को अपनाने से वहां की महिलाओं को भी आर्थिक स्वावलंबन मिलेगा।
इसके अलावा देखभाल अर्थव्यवस्था (केयर इकोनॉमी) और सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने से कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी। दोनों देशों के बीच स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से जमीनी स्तर पर महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार आएगा।
भारत-नाइजीरिया संबंधों में ब्रिक्स 2026 का महत्व
साल 2026 में भारत ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इस दौरान विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के देशों को एक मंच पर लाना भारत की प्राथमिकता रही है। नाइजीरिया अफ्रीका महाद्वीप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और ब्रिक्स के भागीदार देश के रूप में उसकी उपस्थिति वैश्विक नीति निर्माण में मायने रखती है।
दोनों मंत्रियों ने आशा व्यक्त की कि यह बैठक भारत और नाइजीरिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। आने वाले समय में दोनों मंत्रालयों के बीच अधिकारियों के स्तर पर और अधिक कार्यशालाएं और अध्ययन दौरे आयोजित किए जा सकते हैं।
महिला विकास सहयोग के नए मार्ग और साझा क्षेत्र
बैठक के अंत में दोनों देशों ने सहमति व्यक्त की कि वे आने वाले समय में एक विस्तृत रूपरेखा तैयार करेंगे। इस रूपरेखा के तहत महिला आर्थिक समूहों को आपस में जोड़ना, बाल संरक्षण तंत्र को आधुनिक बनाना और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार करना शामिल होगा।
यह द्विपक्षीय प्रयास भारत और नाइजीरिया दोनों के लिए एक ऐसा अवसर है, जहां दो बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं अपने सामाजिक विकास के अनुभवों को साझा करके अपने नागरिकों के लिए बेहतर नीतियां बना सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: भारत और नाइजीरिया के बीच यह बैठक कहां और कब आयोजित हुई?
उत्तर: यह बैठक 14 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के कार्यालय में आयोजित की गई।
प्रश्न: नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर: नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां की महिला विषयों और सामाजिक विकास मंत्री इमान सुलेमान-इब्राहिम ने किया।
प्रश्न: इस बैठक में किन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई?
उत्तर: बैठक में महिला नेतृत्व वाले विकास, वित्तीय समावेशन, बाल संरक्षण, डिजिटल सुरक्षा, पोषण सहायता और स्वच्छ ऊर्जा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






