शनिवार, सितम्बर 12, 2026

स्टील स्लैग रोड से 40 फीसदी घटेगी लागत, 15 साल तक नहीं होगी मरम्मत

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स्टील स्लैग रोड

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रायगढ़ में 1.85 किमी लंबी स्टील स्लैग सड़क के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कार्यक्रम में स्वदेशी तकनीक के फायदों की जानकारी दी।

मुख्य बातें

  • सड़क निर्माण लागत में 40 प्रतिशत तक की कटौती का दावा
  • पारंपरिक सड़कों से 4 गुना अधिक मजबूती और 15 साल का रखरखाव चक्र
  • छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में बनी 1.85 किमी सड़क को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिला
  • ओडिशा के अंगुल में 40 किलोमीटर लंबी नई स्टील स्लैग सड़क बनाने का मिला ऑर्डर

स्टील स्लैग रोड तकनीक सड़क निर्माण क्षेत्र में बड़ी बचत और मजबूती लेकर आई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में जानकारी दी कि इस स्वदेशी तकनीक से सड़क निर्माण लागत में 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इसके साथ ही यह सड़कें पारंपरिक निर्माण तरीकों की तुलना में चार गुना अधिक मजबूत बनती हैं। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने बताया कि प्रसंस्कृत स्टील स्लैग से बनी सड़कों की मरम्मत का समय भी काफी बढ़ जाता है और इन पर लगभग 15 सालों तक किसी बड़ी मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती है।

स्टील स्लैग रोड से सड़क निर्माण में क्या बदलाव आएंगे?

स्टील स्लैग रोड तकनीक इस्पात कारखानों से निकलने वाले औद्योगिक कचरे को प्रसंस्कृत कर सड़क निर्माण सामग्री में बदलती है। पीआईबी के अनुसार यह स्वदेशी तकनीक सड़क निर्माण की लागत 40 फीसदी तक कम करती है और पारंपरिक सड़कों से चार गुना ज्यादा मजबूती देती है। इस तकनीक से बनी सड़कों को लगभग 15 साल तक मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती।

पारंपरिक सड़क निर्माण में गिट्टी और पत्थरों के लिए बड़े पैमाने पर प्राकृतिक पहाड़ों का खनन करना पड़ता है। स्टील स्लैग तकनीक प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को रोकती है। इस्पात निर्माण के उप-उत्पाद को वैज्ञानिक प्रक्रिया से एग्रीगेट में बदलकर तारकोल या कंक्रीट की जगह इस्तेमाल किया जाता है। इससे न केवल पहाड़ों और खदानों से पत्थरों की कटाई कम होती है, बल्कि स्टील प्लांटों के पास जमा कचरे का निस्तारण भी आसानी से हो जाता है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और रायगढ़ परियोजना के मुख्य आंकड़े

कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) और जिंदल स्टील लिमिटेड को संयुक्त रूप से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में बनी 1.85 किलोमीटर लंबी सड़क को प्रसंस्कृत स्टील स्लैग एग्रीगेट से बनी दुनिया की सबसे लंबी सड़क का दर्जा मिला है। इस अवसर पर सड़क का वर्चुअल उद्घाटन किया गया और वैज्ञानिक वृत्तचित्र जारी किया गया। इसके साथ ही तकनीक हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर हुए और ‘स्टील ग्रिट’ ब्रांड का शुभारंभ भी किया गया।

स्टील स्लैग तकनीक से जुड़े कुछ प्रमुख आंकड़े और तथ्य इस प्रकार हैं:

  • 1.85 किलोमीटर: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में निर्मित प्रसंस्कृत स्टील स्लैग सड़क की लंबाई, जिसने विश्व रिकॉर्ड बनाया।
  • 40 प्रतिशत बचत: पारंपरिक सड़कों के मुकाबले निर्माण लागत में आने वाली संभावित कमी।
  • 4 गुना अधिक टिकाऊ: भारी मालवाहक वाहनों का वजन सहने की बेहतर क्षमता।
  • 15 साल का रखरखाव चक्र: लंबी अवधि तक सड़क के खराब न होने की क्षमता, जिससे बार-बार मरम्मत का खर्च बचता है।
  • 40 किलोमीटर नई परियोजना: सीएसआईआर-सीआरआरआई को ओडिशा के अंगुल प्लांट में नई सड़क बनाने का मिला कार्य आदेश।
  • 80,000 टन स्लैग उपयोग: एनएच-66 मुंबई-गोवा राजमार्ग के एक किलोमीटर हिस्से में इस्तेमाल कचरा।

स्टील स्लैग रोड तकनीक का पिछला रिकॉर्ड और राष्ट्रीय विस्तार

यह तकनीक केवल प्रयोगशाला या एक परियोजना तक सीमित नहीं है। इससे पहले गुजरात के हजीरा में 6-लेन की एक प्रदर्शनी सड़क बनाई गई थी जो औद्योगिक क्षेत्र को हजीरा पोर्ट से जोड़ती है। इसके बाद हजीरा पोर्ट परिसर के भीतर 1.1 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई गई, जिसका उपयोग कोयला यार्ड से मल्टी-पर्पज बर्थ तक भारी वाहनों की आवाजाही के लिए हो रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी इस स्वदेशी तकनीक का परीक्षण सफल रहा है। एनएच-66 मुंबई-गोवा राजमार्ग पर एक किलोमीटर लंबे 4-लेन खंड के निर्माण में करीब 80,000 टन प्रसंस्कृत स्टील स्लैग का प्रयोग किया गया। इसके अलावा, पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश के कठिन इलाकों और भारत की रणनीतिक सीमावर्ती सड़कों पर भी इस तकनीक को भारी यातायात और अत्यधिक बारिश की स्थिति जांचने के लिए तैनात किया गया है।

वेस्ट टू वेल्थ और इसका असर: आम जनता पर प्रभाव

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनी सड़कों पर अब ट्रैफिक का स्वरूप बदल रहा है। जो सड़कें पहले केवल हल्के वाहनों और ग्रामीणों की आवाजाही के लिए बनी थीं, अब उन पर पास के औद्योगिक क्षेत्रों के कारण भारी ट्रक और व्यावसायिक वाहन चल रहे हैं। ऐसे में कमजोर सड़कें पहली ही बारिश में टूट जाती हैं।

स्टील स्लैग से बनी सड़कें अधिक वजन सहने की क्षमता रखती हैं। अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जहाँ सड़कें हर साल मानसून में बह जाती हैं, वहाँ यह तकनीक वरदान साबित हो सकती है। सरकार की वेस्ट टू वेल्थ (कचरे से कंचन) नीति के तहत यह नवाचार पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ पहुँचाता है। इससे आम नागरिकों को बेहतर और गड्ढा-मुक्त सड़कें मिलेंगी, टैक्सपेयर्स के पैसे की बचत होगी और बार-बार सड़क मरम्मत के कारण लगने वाले जाम से राहत मिलेगी।

भविष्य की योजनाएं: 40 किमी सड़क और व्यापक उपयोग

कार्यक्रम में मौजूद वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की महानिदेशक डॉ. एन. कलाईसेल्वी ने बताया कि संस्थान अपने 85वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने घोषणा की कि सीएसआईआर-सीआरआरआई को जिंदल स्टील के अंगुल प्लांट (ओडिशा) में 40 किलोमीटर लंबी स्टील स्लैग सड़क के निर्माण का वर्क ऑर्डर मिला है। यह परियोजना रायगढ़ के 1.85 किलोमीटर के रिकॉर्ड से 20 गुना से भी ज्यादा बड़ी होगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ-साथ भारतीय रेलवे, राज्य सरकारों, निजी बिल्डरों और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों से इस तकनीक को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अनुसंधान से निकले इस स्वदेशी समाधान को अब देश के हर कोने तक पहुँचाने की जरूरत है ताकि बुनियादी ढांचे का विकास तेज और टिकाऊ हो सके। इस कार्यक्रम में सांसद नवीन जिंदल, नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत और सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. सी.एच. रवि शेखर भी शामिल हुए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: स्टील स्लैग रोड क्या है और इसे कैसे बनाया जाता है?
उत्तर: स्टील स्लैग रोड इस्पात निर्माण के दौरान निकलने वाले उप-उत्पाद (कचरे) को वैज्ञानिक तरीकों से प्रसंस्कृत करके बनाई जाने वाली सड़क है। इसे प्राकृतिक गिट्टी के स्थान पर मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है।

प्रश्न: क्या स्टील स्लैग रोड आम सड़कों से सस्ती और मजबूत होती है?
उत्तर: हाँ, पीआईबी के अनुसार इस तकनीक से सड़क निर्माण की लागत लगभग 40 प्रतिशत तक कम होती है और यह पारंपरिक सड़कों की तुलना में चार गुना अधिक मजबूत होती है।

प्रश्न: भारत में स्टील स्लैग से बनी सबसे लंबी सड़क कहाँ है?
उत्तर: गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में 1.85 किलोमीटर लंबी सड़क प्रसंस्कृत स्टील स्लैग से बनी सबसे लंबी सड़क है, जिसे सीएसआईआर-सीआरआरआई और जिंदल स्टील ने मिलकर बनाया है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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