
भारतीय रिज़र्व बैंक ने फेमा के तहत जारी किए गए सात पुराने सर्कुलर को वापस ले लिया है। विनियामक ढांचे को सरल बनाने के तहत यह कदम उठाया गया है।
मुख्य बातें
- भारतीय रिज़र्व बैंक ने 8 सितंबर 2026 को नया सर्कुलर जारी किया।
- फेमा, 1999 के तहत जारी सात पुराने सर्कुलर वापस लिए गए।
- यह निर्णय विनियामक ढांचे को तर्कसंगत बनाने के अभियान का हिस्सा है।
- वापस लिए गए सर्कुलर 2012 से 2015 के बीच जारी किए गए थे।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने फेमा नियमों के तहत सात पुराने सर्कुलर वापस ले लिए हैं, जिससे विनियामक प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके। केंद्रीय बैंक की ओर से यह कदम विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 के प्रावधानों के अंतर्गत उठाया गया है। अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस तरह के नीतिगत बदलाव समय-समय पर किए जाते हैं।
आरबीआई सर्कुलर के जरिए क्या बदलेगा?
केंद्रीय बैंक द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, आरबीआई सर्कुलर के माध्यम से उन पुराने निर्देशों को समाप्त किया गया है जो समय के साथ अपनी प्रासंगिकता खो चुके थे। भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार, 1 जून 2000 के बाद जारी किए गए तमाम सर्कुलर की व्यापक समीक्षा की जा रही है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य नियमों के दोहराव को रोकना और विनियामक ढांचे को अधिक स्पष्ट बनाना है।
किन पुराने सर्कुलर को किया गया है निरस्त?
समीक्षा के बाद जिन सात पुराने सर्कुलर को वापस लिया गया है, वे विभिन्न वर्षों में जारी किए गए थे। इन अप्रचलित हो चुके निर्देशों में मुख्य रूप से बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) और रुपये में ऋण लेने से संबंधित प्रावधान शामिल थे। विनियामक समीक्षा के इस चरण में निम्नलिखित सर्कुलर को औपचारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया गया है:
- बाहरी वाणिज्यिक उधार नीति और विदेशी मुद्रा में बॉन्ड जारी करना (29 सितंबर 2015)
- भारतीय रुपयों में बाहरी वाणिज्यिक उधार से जुड़ा निर्देश (3 सितंबर 2014)
- बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परिभाषा के उदारीकरण से संबंधित नियम (6 जनवरी 2014)
- अनिवासियों द्वारा कर-मुक्त और सुरक्षित बांड में निवेश से जुड़ा सर्कुलर (24 दिसंबर 2013)
- सेवाओं के आयात और तकनीकी लाइसेंस शुल्क से जुड़ी नीति (26 जून 2013)
- मनी ट्रांसफर सर्विस स्कीम के उप-एजेंटों की सूची से जुड़ा निर्देश (7 नवंबर 2012)
- भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक द्वारा ईसीबी नीति (6 नवंबर 2012)
फेमा नियमों के तहत विनियामक सुधार
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 यानी फेमा के प्रावधानों के तहत देश में विदेशी मुद्रा लेनदेन का संचालन होता है। समय के साथ आर्थिक और वित्तीय परिदृश्य में आए बदलावों के कारण पुराने नियमों का पुनरीक्षण आवश्यक हो जाता है। केंद्रीय बैंक ने सेक्शन 10(4) और सेक्शन 11(1) के तहत इन शक्तियों का उपयोग करते हुए यह कार्रवाई की है। सभी अधिकृत व्यक्तियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने संबंधित घटकों को इन बदलावों के बारे में सूचित करें ताकि अनुपालन में कोई बाधा न आए।
वित्तीय प्रणाली पर इसका प्रभाव
इस तरह के विनियामक सुधारों से देश के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलती है। जब पुराने और अप्रचलित हो चुके नियमों को हटा दिया जाता है, तो वित्तीय संस्थानों और व्यवसायों के लिए अनुपालन का बोझ कम हो जाता है। इससे पारदर्शिता बढ़ती है और विदेशी मुद्रा लेनदेन से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक सुगम हो जाती हैं। आम नागरिकों और निवेशकों के लिए भी नियमों की स्पष्टता फायदेमंद साबित होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? आरबीआई सर्कुलर के तहत कुल कितने पुराने निर्देश वापस लिए गए हैं। उत्तर। भारतीय रिज़र्व बैंक ने सात पुराने सर्कुलर को वापस लिया है जो अब अप्रचलित हो चुके थे।
प्रश्न? यह निर्णय किस कानून के तहत लिया गया है। उत्तर। यह निर्णय विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 यानी फेमा के प्रावधानों के अंतर्गत लिया गया है।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






