
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने सितंबर 2026 के लिए घरेलू मूल्य उम्मीदों के सर्वे की शुरुआत कर दी है, जिससे मौद्रिक नीति तैयार करने में मदद मिलती है।
मुख्य बातें
- भारतीय रिज़र्व बैंक ने सितंबर 2026 राउंड के महंगाई सर्वे की शुरुआत की।
- यह सर्वेक्षण देश के 19 प्रमुख शहरों में आयोजित किया जा रहा है।
- हंसा रिसर्च ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड को इस सर्वे को कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
- सामान्य नागरिक भी लिंक के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने सितंबर 2026 के लिए घरेलू मूल्य उम्मीदों के सर्वे (Inflation Expectations Survey of Households) का नया दौर शुरू कर दिया है। केंद्रीय बैंक देश भर में आम नागरिकों की महंगाई को लेकर धारणा और उनके व्यक्तिगत खर्च के दायरे का अध्ययन कर रहा है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य आने वाले महीनों में खुदरा कीमतों के रुख और आम जनमानस की उम्मीदों का सटीक आकलन करना है। इस डेटा का उपयोग देश की मौद्रिक नीति तैयार करने में एक महत्वपूर्ण इनपुट के रूप में किया जाता है, जिससे ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों पर निर्णय लेने में आसानी होती है।
महंगाई सर्वे 2026 की मुख्य विशेषताएं और शहर
आरबीआई के इस महंगाई सर्वे को देश के 19 चुनिंदा शहरों में अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इनमें अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, पटना, रायपुर, रांची और तिरुवनंतपुरम शामिल हैं। इन शहरों में रहने वाले परिवारों से उनके पिछले अनुभव और भविष्य के अनुमानों के आधार पर राय ली जाएगी। केंद्रीय बैंक लंबे समय से इस कवायद को नियमित रूप से चला रहा है ताकि जमीनी हकीकत का पता लगाया जा सके।
कैसे किया जा रहा है डेटा संग्रह
- चयनित परिवारों से सीधे संपर्क के लिए मुंबई की एजेंसी हंसा रिसर्च ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड को नियुक्त किया गया है।
- यह एजेंसी घर-घर जाकर या निर्धारित माध्यमों से परिवारों के गुणात्मक और मात्रात्मक जवाब एकत्र करती है।
- सर्वे में सामान्य कीमतों के साथ-साथ विशेष उत्पाद समूहों की कीमतों में बदलाव पर सवाल पूछे जाते हैं।
- जो परिवार एजेंसी द्वारा सीधे संपर्क में नहीं आए हैं, वे भी ऑनलाइन उपलब्ध सर्वे शेड्यूल के जरिए अपनी राय भेज सकते हैं।
आम नागरिकों की भागीदारी और नीतिगत महत्व
केंद्रीय बैंक द्वारा संचालित इस प्रकार के सर्वेक्षण आम नागरिकों को देश की आर्थिक नीति निर्माण प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल होने का अवसर प्रदान करते हैं। यह सर्वे तीन महीने बाद और एक साल बाद की अवधि के लिए महंगाई दरों के अनुमानों पर केंद्रित होता है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) जब भी ब्याज दरों की समीक्षा करती है, तो आम जनता की इन उम्मीदों को भी ध्यान में रखा जाता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि बाजार में मुद्रास्फीति का मनोवैज्ञानिक दबाव किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
महंगाई सर्वे में कैसे ले सकते हैं हिस्सा
यदि किसी व्यक्ति से सर्वे एजेंसी ने संपर्क नहीं किया है, तब भी वे आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उपलब्ध लिंक के जरिए इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। भरे हुए फॉर्म को संबंधित विभाग के ईमेल पते पर भेजा जा सकता है। किसी भी तरह की पूछताछ के लिए मुंबई स्थित आरबीआई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स कार्यालय में सांख्यिकी और सूचना प्रबंधन विभाग के निदेशक से संपर्क किया जा सकता है। यह पहल पूरी तरह से स्वैच्छिक है और नागरिकों के सटीक जवाब देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? महंगाई सर्वे 2026 का आयोजन कौन सा संस्थान कर रहा है। उत्तर। यह सर्वेक्षण भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा आयोजित किया जा रहा है और इसे हंसा रिसर्च ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड संचालित कर रहा है।
प्रश्न? क्या चुनिंदा शहरों के बाहर के लोग भी इस सर्वे में भाग ले सकते हैं। उत्तर। हां, जो लोग एजेंसी के संपर्क में नहीं आए हैं, वे आरबीआई की वेबसाइट पर दिए गए लिंक के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया भेज सकते हैं।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






