
पीआईबी के अनुसार उत्तर प्रदेश के आगरा में एक युवा ने सरकारी सहायता और नशा मुक्ति केंद्र के सहयोग से शराब की लत को मात दी है।
मुख्य बातें
- रेहान की आयु 29 वर्ष है और वह उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के रहने वाले हैं।
- उन्हें 20 जनवरी 2026 को आगरा के ‘सामूहिक उत्थान सेवा समिति’ नशा मुक्ति केंद्र से सहायता मिली।
- केंद्र से मुफ्त इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास सुविधाएं प्राप्त हुईं।
- इलाज के बाद रेहान को एक निजी अस्पताल में नौकरी मिल गई जिससे वे आत्मनिर्भर हुए।
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में रहने वाले 29 वर्षीय रेहान ने नशा मुक्ति केंद्र के सहयोग से शराब की गंभीर लत को पीछे छोड़कर एक नई जिंदगी की शुरुआत की है। पीआईबी के अनुसार, बेरोजगारी और पारिवारिक कठिनाइयों के बीच संघर्ष कर रहे रेहान को सही समय पर चिकित्सा और काउंसलिंग मिलने से यह बड़ी सफलता हासिल हुई है। इस पूरी प्रक्रिया ने न केवल उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार किया, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में भी वापस लौटने का मौका दिया।
नशा मुक्ति केंद्र की मदद से बदली जिंदगी
रेहान (बदला हुआ नाम) हाई-स्कूल तक पढ़े हैं और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। उनके घर में आय का मुख्य साधन शाम को लगने वाला खाने का एक छोटा सा स्टॉल था। घर का माहौल अस्थिर था और उनके पिता को भी शराब की लत थी, जिसके कारण रेहान को दोबारा नशा करने का खतरा लगातार सताता रहता था। लत छोड़ने के शुरुआती दिनों में उन्हें बेचैनी, नींद न आने और मानसिक अस्थिरता जैसी गंभीर शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ा।
नशा मुक्ति केंद्र में मिला मुफ्त इलाज और परामर्श
पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जनवरी 2026 को रेहान को आगरा के जिला नशा मुक्ति केंद्र ‘सामूहिक उत्थान सेवा समिति’ से मदद प्राप्त हुई। इस केंद्र ने उन्हें पूरी तरह से मुफ्त इलाज, परामर्श, और पुनर्वास यानी रिहैबिलिटेशन की सुविधाएं दीं। नियमित फॉलो-अप और निरंतर काउंसलिंग ने उनके भीतर के आत्मविश्वास को जगाया और उन्हें इस संकट से बाहर निकालने में मुख्य सहायता प्रदान की। इन प्रयासों के परिणाम स्वरूप धीरे-धीरे उनके स्वास्थ्य में सुधार दर्ज किया गया।
- 29 वर्षीय रेहान को 20 जनवरी 2026 को आगरा केंद्र से सहायता मिली।
- सामूहिक उत्थान सेवा समिति द्वारा मुफ्त इलाज और काउंसलिंग दी गई।
- लत से उबरने के बाद उन्हें स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में निजी नौकरी मिली।
- परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और आत्मनिर्भरता आई।
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में मिली स्थायी नौकरी
केंद्र से लगातार मिलने वाली सहायता और रेहान के अपने मजबूत संकल्प के कारण आखिरकार उनकीि जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में काम करने की इच्छा रखने वाले रेहान को एक निजी अस्पताल में नौकरी मिल गई। इस रोजगार के मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है। अब वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुके हैं और अपने परिवार के कल्याण में भी खुलकर योगदान दे रहे हैं।
नशा मुक्ति केंद्र की प्रासंगिकता और समाज पर प्रभाव
भारत जैसे देश में जहां नशीली दवाओं और शराब की लत के कारण कई परिवार बर्बाद हो जाते हैं, ऐसे सरकारी और गैर-सरकारी नशा मुक्ति केंद्र जीवन बचाने का काम करते हैं। सही समय पर मिलने वाली चिकित्सीय सहायता और मानसिक परामर्श किसी भी व्यक्ति को अंधेरे से निकालकर रोशनी की तरफ ले जा सकता है। रेहान की यह कहानी समाज में उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल है जो आज भी किसी न किसी प्रकार के नशे के जाल में फंसे हुए हैं और बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? रेहान को किस संस्था से मदद मिली थी?
उत्तर। पीआईबी के अनुसार रेहान को आगरा के जिला नशा मुक्ति केंद्र ‘सामूहिक उत्थान सेवा समिति’ से सहायता मिली थी।
प्रश्न? रेहान को नशा मुक्ति केंद्र में कब सहायता प्राप्त हुई थी?
उत्तर। उन्हें 20 जनवरी 2026 को यह सहायता दी गई थी जिसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में नौकरी भी मिल गई।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






