गुरूवार, सितम्बर 3, 2026

कलश स्थापना कैसे करें: नवरात्रि पूजा की पूरी विधि

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कलश स्थापना

नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना या कलश स्थापना कैसे की जाती है, जानिए इसकी सरल और पारंपरिक विधि।

मुख्य बातें

  • कलश स्थापना नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि को की जाती है।
  • पूजा के लिए तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश का उपयोग करना सबसे शुभ माना जाता है।
  • कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी, आम के पत्ते और जटा वाला नारियल रखा जाता है।
  • कलश के नीचे एक साफ बर्तन या मिट्टी की वेदी पर जौ बोए जाते हैं।

नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसे घट स्थापना भी कहा जाता है, जो नौ दिनों तक चलने वाली देवी दुर्गा की पूजा का मुख्य आरंभ है। सनातन परंपरा में कलश को ब्रह्मांड, समृद्धि और गणेशजी का प्रतीक माना गया है। सही नियमों के साथ इस अनुष्ठान को पूरा करने से पूजा का पूरा फल मिलता है।

कलश स्थापना क्या है?

कलश स्थापना नवरात्रि के प्रथम दिवस यानी शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाने वाली एक धार्मिक विधि है। इसमें तांबे या मिट्टी के बर्तन में पवित्र जल भरकर, उस पर आम के पत्ते और नारियल स्थापित किया जाता है। साथ ही, कलश के समीप मिट्टी में जौ बोए जाते हैं, जिन्हें जवारे कहा जाता है। यह विधान घर में देवताओं के आह्वान और देवी शक्ति के स्वागत के लिए किया जाता है।

कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री

पूजा शुरू करने से पहले सभी जरूरी चीजों को एक जगह एकत्रित कर लें ताकि अनुष्ठान में कोई बाधा न आए। सामग्री की सूची इस प्रकार है:

  • मिट्टी, तांबे या पीतल का कलश
  • शुद्ध जल या गंगाजल
  • आम या अशोक के 5 ताजे पत्ते
  • जटा वाला एक साबुत सूखा नारियल
  • लाल कलावा या सूती धागा
  • थोड़े से अक्षत (साबुत चावल)
  • एक सुपारी और एक सिक्का
  • जौ बोने के लिए एक साफ चौड़ा मिट्टी का बर्तन और साफ मिट्टी
  • आम के पत्तों और नारियल पर चढ़ाने के लिए लाल चुनरी

चरण-दर-चरण तरीका: कलश स्थापना कैसे करें?

  1. मंदिर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को गंगाजल छिड़क कर अच्छी तरह साफ करें।
  2. मिट्टी के चौड़े बर्तन में पवित्र मिट्टी डालें और उसमें जौ के दाने बोएं।
  3. कलश पर मौली (कलावा) बांधें और उसमें गंगाजल तथा सादा जल भरें।
  4. कलश के अंदर एक सुपारी, एक सिक्का और थोड़ी सी अक्षत डालें।
  5. कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते सजाकर रखें।
  6. कलश के ऊपर नारियल पर लाल चुनरी लपेटकर कलावा बांधें और उसे पत्तों के बीच स्थापित करें।
  7. कलश को जौ वाले मिट्टी के बर्तन के ठीक बीच में रख दें।
  8. हाथ में अक्षत और फूल लेकर वरुण देवता और मां दुर्गा का आह्वान करें।

कलश स्थापना के दौरान ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम

यह विधान पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ किया जाना चाहिए। स्थान की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और पूजा स्थल पर तामसिक चीजों का प्रयोग न करें। कलश को एक बार स्थापित करने के बाद नौ दिनों तक उसे अपनी जगह से न हटाएं। यदि आपने अखंड ज्योति जलाई है, तो उसकी निरंतर देखरेख करें और हवा से बचाने के लिए कांच के आवरण का उपयोग करें। प्रतिदिन सुबह और शाम को नियमित रूप से आरती करें और दोनों समय भोग लगाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? कलश स्थापना का सबसे सही समय कौन सा है? उत्तर। नवरात्रि प्रतिपदा तिथि के पहले एक तिहाई भाग यानी प्रातःकाल में शुभ मुहूर्त देखकर कलश स्थापित करना सबसे उत्तम माना जाता है।

प्रश्न? क्या कलश में सोने या चांदी का सिक्का डालना अनिवार्य है? उत्तर। अनिवार्य नहीं है, आप साधारण धातु का सिक्का भी उपयोग कर सकते हैं। यह समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

प्रश्न? नवरात्रि के बाद कलश और जवारों का क्या करें? उत्तर। दशमी तिथि के दिन कलश का जल पूरे घर में छिड़कें, आम के पत्तों को संभाल कर रखें और जवारों को परिवार में प्रसाद के रूप में बांटने के साथ पवित्र नदी या मिट्टी में विसर्जित कर दें।

यह जानकारी केवल पारंपरिक मान्यताओं और सामान्य जानकारी के आधार पर दी गई है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को अपने स्थानीय रिवाजों और परिवार की परंपरा के अनुसार ही पूरा करें।

यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com

दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी आज पत्रिका में वरिष्ठ संपादक हैं और शिक्षा, परीक्षाएँ एवं परिणाम, खेल, मनोरंजन, धर्म-संस्कृति तथा लाइफस्टाइल कवरेज की ज़िम्मेदारी संभालती हैं। वे परीक्षा अधिसूचनाओं, रिजल्ट, प्रवेश प्रक्रिया, त्योहारों की परंपराओं और स्वास्थ्य-जीवनशैली से जुड़ी सामग्री को सरल, सटीक और सत्यापित रूप में पाठकों तक पहुँचाती हैं। स्वास्थ्य से जुड़े लेखों में वे हमेशा योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेने की सलाह जोड़ती हैं। सुझाव/सुधार: corrections@aajpatrika.com।

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