
पीआईबी के अनुसार उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी चेतन कुमार कौशिक ने नमस्ते-एसयूवाई योजना की मदद से वित्तीय कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए एक सफल सफाई सेवा उद्यम खड़ा किया है और आत्मनिर्भरता हासिल की है।
मुख्य बातें
- गाजियाबाद के साहिबाबाद निवासी 32 वर्षीय चेतन कुमार कौशिक ने नमस्ते-एसयूवाई योजना के तहत सहायता प्राप्त की।
- परियोजना की कुल लागत 8.90 लाख रुपये थी, जिसमें 5,42,500 रुपये का ऋण और 3,47,500 रुपये की पूंजीगत सब्सिडी शामिल है।
- इस वित्तीय सहायता से उनकी मासिक आय बढ़कर 40,000 से 50,000 रुपये तक हो गई है।
- वे अक्टूबर 2026 तक अपना पूरा ऋण चुकाने की उम्मीद कर रहे हैं और वर्तमान में हर महीने 12,100 रुपये की किस्त भरते हैं।
नमस्ते-एसयूवाई योजना ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद निवासी 32 वर्षीय चेतन कुमार कौशिक के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। पीआईबी के अनुसार, वर्षों तक गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना करने वाले चेतन ने इस सरकारी सहायता के जरिए न केवल अपनी आजीविका को सुधारा, बल्कि एक सफल उद्यमी बनकर समाज में सम्मान भी प्राप्त किया। उनकी यह यात्रा उन तमाम लोगों के लिए एक मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों में भी मेहनत और सही सरकारी सहयोग के बूते अपनी तकदीर बदलना चाहते हैं।
नमस्ते-एसयूवाई से कैसे बदली चेतन की जिंदगी
चेतन लंबे समय से नगर निगम गाजियाबाद के मोहन नगर जोन के अंतर्गत मोहन नगर और साहिबाबाद इलाकों में सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई से जुड़े काम करते आ रहे थे। शुरुआती दौर में उनकी आमदनी बेहद सीमित थी, जिसका अधिकांश हिस्सा घर के जरूरी खर्चों में चला जाता था। परिवार की आर्थिक स्थिति तब और ज्यादा बिगड़ गई जब उनकी मां गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं। परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य होने के नाते चेतन ने अपनी बचत के पैसों से उनका इलाज कराया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद साल 2022 में उनका निधन हो गया। यह दौर उनके लिए मानसिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टियों से बेहद चुनौतीपूर्ण था।
कारोबार के विस्तार के लिए नमस्ते-एसयूवाई योजना का सहारा
इस संकट के समय सरकार की एक विशेष पहल ने उनके लिए नए रास्ते खोले। नमस्ते-एसयूवाई योजना के तहत उन्हें अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय मदद दी गई। इस पूरी परियोजना की कुल लागत 8.90 लाख रुपये थी, जिसके तहत 5,42,500 रुपये का ऋण और 3,47,500 रुपये की पूंजीगत सब्सिडी मुहैया कराई गई। इस आर्थिक मदद का उपयोग उन्होंने आधुनिक सक्शन-मशीन और बेहतर उपकरणों के संचालन में किया, जिससे उनके काम की गुणवत्ता और गति दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
- परियोजना की कुल लागत: 8.90 लाख रुपये
- ऋण राशि: 5,42,500 रुपये
- पूंजीगत सब्सिडी: 3,47,500 रुपये
- मासिक आय में वृद्धि: 40,000 से 50,000 रुपये
आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता की ओर कदम
बेहतर उपकरणों और आधुनिक साधनों के मिलने से चेतन की मासिक आमदनी बढ़कर 40,000 से 50,000 रुपये के बीच पहुंच गई। इससे उनके घर की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व स्थिरता आई और उन्हें अपने परिवार की जिम्मेदारियां बेहतर ढंग से निभाने में मदद मिली। वर्तमान में वे हर महीने 12,100 रुपये की ऋण किस्त का नियमित भुगतान कर रहे हैं और उनके पास केवल 67,000 रुपये की राशि बकाया है। उन्हें पूरा भरोसा है कि वे अक्टूबर 2026 तक अपने इस ऋण को पूरी तरह से चुका देंगे।
नमस्ते-एसयूवाई का व्यापक सामाजिक प्रभाव
यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सफाई कर्मचारियों को समाज में सुरक्षित, गरिमापूर्ण और स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करने का एक सशक्त माध्यम है। सरकार की ऐसी पहलें इस बात का प्रमाण हैं कि किस प्रकार समय पर मिलने वाला संस्थागत सहयोग आम नागरिकों को आत्मनिर्भर बना सकता है। चेतन का सफर यह साबित करता है कि पक्के इरादे और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी व्यक्ति अपनी आजीविका की बाधाओं को पार करते हुए एक सफल कारोबारी बन सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? नमस्ते-एसयूवाई योजना के तहत चेतन को कुल कितनी वित्तीय सहायता मिली थी?
उत्तर। योजना के तहत कुल 8.90 लाख रुपये की परियोजना के लिए 5,42,500 रुपये का ऋण और 3,47,500 रुपये की पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की गई थी।
प्रश्न? इस योजना से चेतन की मासिक आय पर क्या असर पड़ा?
उत्तर। बेहतर उपकरणों और कार्य में सुधार के बाद उनकी मासिक आय बढ़कर लगभग 40,000 से 50,000 रुपये हो गई है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






