
पीआईबी के अनुसार, गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना करने वाले मल्लेला पृथ्वी राजू ने एनएफएससी योजना की मदद से अपनी पीएचडी पूरी की और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में सफलता हासिल की।
मुख्य बातें
- मल्लेल पृथ्वी राजू ने दिसंबर 2019 से दिसंबर 2024 तक एनएफएससी योजना के तहत फेलोशिप प्राप्त की।
- जेआरएफ चरण के दौरान 37,000 रुपये और एसआरएफ चरण में 42,000 रुपये प्रति माह की सहायता मिली।
- इस आर्थिक मदद से उन्होंने अपनी पीएचडी पूरी की और उनके तीन शोध-पत्र भी प्रकाशित हुए।
- वर्तमान में श्री राजू एचसीयू में प्रोजेक्ट साइंटिस्ट के तौर पर कार्यरत हैं।
एनएफएससी योजना आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवारों के उन मेधावी विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा संबल साबित हो रही है, जो उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। पीआईबी के अनुसार, एससी-III समुदाय के 34 वर्षीय स्कॉलर श्री मल्लेला पृथ्वी राजू ने गंभीर वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद अपनी पीएचडी पूरी कर ली और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में आगे बढ़े। बेहद कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से आने के कारण उनके पास आय का कोई निश्चित साधन नहीं था, जिससे अकादमिक कार्यों को जारी रखना बेहद कठिन हो गया था। ऐसे में यह फेलोशिप उनके लिए एकमात्र वित्तीय सहारा बनी, जिसने उनकी पूरी परिस्थिति को बदल दिया।
एनएफएससी योजना का आर्थिक सहयोग और फेलोशिप
श्री मल्लेला पृथ्वी राजू को दिसंबर 2019 से दिसंबर 2024 तक एनएफएससी योजना के तहत नियमित रूप से फेलोशिप सहायता प्रदान की गई। इस वित्तीय सहायता में जूनियर रिसर्च फेलोशिप यानी जेआरएफ चरण के दौरान 37,000 रुपये प्रति माह और सीनियर रिसर्च फेलोशिप यानी एसआरएफ चरण के दौरान 42,000 रुपये प्रति माह की राशि शामिल थी। इस राशि ने उनकी पढ़ाई, शोध और रहने-सहने के बुनियादी खर्चों को आसानी से पूरा किया। इस फेलोशिप के जरिए वे वित्तीय असुरक्षा के दौर से बाहर आए और पूरी तरह से अपनी पढ़ाई तथा शोध कार्य पर ध्यान केंद्रित करने में सफल रहे।
चुनौतियों के बावजूद अकादमिक सफलता
अपनी पढ़ाई के शुरुआती दौर में श्री राजू को कई प्रकार की सामाजिक और प्रशासनिक बाधाओं का भी सामना करना पड़ा, जिसमें विश्वविद्यालय स्तर पर मिलने वाली प्रक्रियात्मक जटिलताएं शामिल थीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्यों के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे। इस फेलोशिप की मदद से वे अपनी शोध संबंधी महत्वाकांक्षाओं को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ा पाए। उनकी इसी शैक्षणिक लगन और निरंतर मेहनत का परिणाम रहा कि उनके तीन महत्वपूर्ण शोध-पत्र भी प्रतिष्ठित मंचों पर प्रकाशित हुए, जो वैज्ञानिक जगत में उनके सक्रिय योगदान को रेखांकित करते हैं।
शोधार्थियों के लिए फेलोशिप का महत्व
उच्च शिक्षा और डॉक्टोरल रिसर्च के दौरान छात्रों को कई तरह के वित्तीय संकटों से गुजरना पड़ता है। समय पर मिलने वाली फेलोशिप न केवल विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि उन्हें देश के विकास में वैज्ञानिक योगदान देने के लिए भी प्रेरित करती है। श्री राजू की यह पूरी यात्रा इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि किस प्रकार सरकारी सहायता योजनाएं वंचित वर्गों के युवाओं की किस्मत बदल सकती हैं। वर्तमान समय में वे एचसीयू में प्रोजेक्ट साइंटिस्ट के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और एक पूर्णकालिक रिसर्च साइंटिस्ट के तौर पर अपने भविष्य को गढ़ रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? श्री मल्लेला पृथ्वी राजू को किस अवधि के दौरान फेलोशिप मिली? उत्तर। उन्हें दिसंबर 2019 से दिसंबर 2024 तक यह सहायता मिली।
प्रश्न? एनएफएससी योजना के तहत कितनी मासिक राशि दी गई? उत्तर। जेआरएफ के दौरान 37,000 रुपये और एसआरएफ के दौरान 42,000 रुपये प्रति माह दिए गए।
प्रश्न? वर्तमान में श्री राजू किस पद पर कार्यरत हैं? उत्तर। वे वर्तमान में एचसीयू में प्रोजेक्ट साइंटिस्ट के रूप में कार्यरत हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






