
प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने धनबाद में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और कोयला खनन, सुरक्षा तथा पुनर्वास परियोजनाओं का जायजा लिया।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने धनबाद के कोयला भवन में बीसीसीएल की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
- वर्ष 2030-31 तक कोयला उत्पादन लक्ष्य, भूमिगत और ओपनकास्ट खदानों के प्रदर्शन की गहन समीक्षा की गई।
- तरुण कपूर ने मूनिडीह में सीबीएम ब्लॉक-I, लॉन्गवॉल प्रोजेक्ट और कुसुंडा क्षेत्र के ईएनए फायर प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया।
- बेलगरिया और करमाटांड पुनर्वास स्थलों के दौरे के साथ संशोधित झरिया मास्टर प्लान की प्रगति का जायजा लिया गया।
प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने धनबाद दौरे के दौरान आयोजित महत्वपूर्ण बीसीसीएल समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक की अपनी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान उन्होंने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के मुख्यालय कोयला भवन में कंपनी के कामकाज और भविष्य की योजनाओं की व्यापक पड़ताल की। इस बीसीसीएल समीक्षा के दौरान कोयला उत्पादन, तकनीकी पहलों, सुरक्षा उपायों, पर्यावरण प्रबंधन और पुनर्वास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन मंथन किया गया।
बीसीसीएल समीक्षा और वर्ष 2030-31 के उत्पादन लक्ष्य
आयोजित बीसीसीएल समीक्षा के दौरान कंपनी के मुख्य परिचालन संकेतकों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में वर्ष 2030-31 तक तय किए गए कोयला उत्पादन लक्ष्यों, कोयला निकासी और ओवरबर्डन रिमूवल (OBR) के आंकड़ों की विस्तृत समीक्षा की गई। पिछले पांच वर्षों के दौरान भूमिगत (UG) और ओपनकास्ट (OC) खदानों के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर बल दिया गया।
बैठक में आधुनिक खनन प्रौद्योगिकियों के प्रयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। बीसीसीएल में वर्तमान में उपयोग की जा रही लॉन्गवॉल माइनिंग और हाईवॉल माइनिंग तकनीकों की प्रभावशीलता को देखा गया। इसके साथ ही खदानों में सरफेस माइनर्स और कंटीन्यूअस माइनर्स जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियों का दायरा बढ़ाने की योजना बनाई गई। इस विस्तृत बीसीसीएल समीक्षा में बंद पड़ी खदानों को एमडीओ (MDO) और राजस्व साझाकरण मॉडल के जरिए पुनः चालू करने तथा झारिया कोयला क्षेत्र में ओपनकास्ट ब्लॉकों के पुनर्गठन पर भी चर्चा हुई।
मूनिडीह परियोजना और बीसीसीएल समीक्षा के अहम बिंदु
समीक्षा बैठक के पश्चात तरुण कपूर ने मूनिडीह स्थित कोल बेड मीथेन (CBM) ब्लॉक-I परियोजना का दौरा किया। इस दौरान बीसीसीएल समीक्षा के अंतर्गत अधिकारियों ने उन्हें सीबीएम गैस निष्कर्षण तकनीक और परियोजना के क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया। मूनिडीह XVI सीम लॉन्गवॉल परियोजना के निरीक्षण के समय मशीनीकृत भूमिगत खनन से उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोयले की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
इस बीसीसीएल समीक्षा का एक प्रमुख पहलू कोयला वाशरी के प्रदर्शन और उनकी क्षमता विस्तार से जुड़ा था। घरेलू स्तर पर कोकिंग कोयले की धुलाई क्षमता बढ़ाकर कोयले की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया, जिससे देश की स्टील उद्योग संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
ईएनए फायर प्रोजेक्ट और झरिया मास्टर प्लान का मूल्यांकन
तरुण कपूर ने कुसुंडा क्षेत्र में स्थित ईएनए फायर प्रोजेक्ट का भी स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने खदानों में लगी आग के प्रबंधन, उपग्रह और थर्मल निगरानी प्रणालियों तथा प्रभावित क्षेत्रों के चरणबद्ध पुनर्वास की प्रगति देखी। इस बीसीसीएल समीक्षा के क्रम में उन्होंने उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय परिवारों से प्रत्यक्ष बातचीत की और उनकी सुरक्षा एवं पुनर्वास संबंधी चिंताओं को सुना।
यात्रा के दूसरे दिन 1 सितंबर 2026 को बेलगरिया और करमाटांड पुनर्वास स्थलों का निरीक्षण तय किया गया, जहां संशोधित झरिया मास्टर प्लान के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की गई। पीएम सलाहकार ने कहा कि सतत विकास और कंपनी की लाभप्रदता बनाए रखने के लिए संसाधनों का वैज्ञानिक और इष्टतम उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
कोकिंग कोयला क्षेत्र में बीसीसीएल का महत्व और पृष्ठभूमि
भारत में कोकिंग कोयले की आपूर्ति के दृष्टिकोण से बीसीसीएल समीक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की एक प्रमुख सहायक कंपनी है, जो देश में धात्विक (मेटलर्जिकल) कोकिंग कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत के इस्पात (स्टील) उद्योग को गुणवत्तापूर्ण कोकिंग कोयले की निरंतर आवश्यकता होती है, जिसके बड़े हिस्से का वर्तमान में आयात करना पड़ता है।
विदेशों से कोकिंग कोयले के आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने के लिए बीसीसीएल की भूमिका निर्णायक है। झरिया कोयला क्षेत्र में दशकों पुरानी भूमिगत खदानों की आग पर काबू पाना और वहां बसे परिवारों का सुरक्षित पुनर्वास करना एक बड़ी प्रशासनिक और तकनीकी चुनौती रही है। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार द्वारा बीसीसीएल की परिचालन दक्षता और सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाती है।
उच्च स्तरीय बीसीसीएल समीक्षा में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस उच्च स्तरीय बीसीसीएल समीक्षा बैठक में कोयला और संबद्ध मंत्रालयों तथा बीसीसीएल के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में शामिल प्रमुख हस्तियों की सूची इस प्रकार है:
- तरुण कपूर: प्रधानमंत्री के सलाहकार (बैठक के अध्यक्ष)
- बी. साईराम: अध्यक्ष, कोल इंडिया लिमिटेड
- मनोज कुमार अग्रवाल: मुख्य प्रबंधक, बीसीसीएल
- अलकनंदा दयाल: संयुक्त सचिव, वस्त्र मंत्रालय
- आलोक कुमार सिंह: परियोजना सलाहकार, कोयला मंत्रालय
- मुरली कृष्ण रामैया: निदेशक (मानव संसाधन), बीसीसीएल
- संजय कुमार सिंह: निदेशक (तकनीकी/संचालन), बीसीसीएल
- राजेश कुमार: निदेशक (वित्त), बीसीसीएल
- राजीव कुमार सिन्हा: निदेशक (तकनीकी/परियोजना एवं योजना), बीसीसीएल
बैठक में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, क्षेत्रीय महाप्रबंधक और विभागाध्यक्ष भी शामिल हुए, जिन्होंने बीसीसीएल समीक्षा को सफल बनाने और परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने हेतु अपने विचार साझा किए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? धनबाद में आयोजित बीसीसीएल समीक्षा बैठक की अध्यक्षता किसने की?
उत्तर। धनबाद के कोयला भवन में आयोजित बीसीसीएल समीक्षा बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने की।
प्रश्न? बीसीसीएल समीक्षा के दौरान किन प्रमुख परियोजनाओं का निरीक्षण किया गया?
उत्तर। समीक्षा के दौरान मूनिडीह स्थित सीबीएम ब्लॉक-I, मूनिडीह लॉन्गवॉल प्रोजेक्ट, कुसुंडा क्षेत्र का ईएनए फायर प्रोजेक्ट और झरिया Master Plan से जुड़े पुनर्वास स्थलों का निरीक्षण किया गया।
प्रश्न? बीसीसीएल द्वारा कोयला उत्पादन के लिए वर्ष 2030-31 तक क्या लक्ष्य तय किए गए हैं?
उत्तर। बीसीसीएल समीक्षा में वर्ष 2030-31 तक उत्पादन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मशीनीकृत खनन, एडवांस सरफेस माइनर्स, वाशरी क्षमता विस्तार और बंद खदानों के पुनर्विकास की कार्य योजना तैयार की गई है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






