
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से लखनऊ में ‘सुमन रोडमैप 2030 – देखभाल की निरंतरता में तेजी’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई।
मुख्य बातें
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 2-3 सितंबर, 2026 को लखनऊ में कार्यशाला का आयोजन किया गया।
- एनएचएम की अतिरिक्त सचिव आराधना पटनायक और यूपी के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक कार्यक्रम में शामिल हुए।
- देश भर से 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और विकास साझेदार कार्यशाला में शामिल हुए।
- रोडमैप के तहत 13 ‘हाई-फोकस’ राज्यों और 130 जिलों के लिए विशेष रणनीतियां तय की गई हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 2-3 सितंबर, 2026 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सुमन रोडमैप 2030 पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में देश भर से दो सौ से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें विभिन्न राज्यों के मिशन निदेशक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे।
सुमन रोडमैप 2030 क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
सुमन रोडमैप 2030 सतत विकास लक्ष्य की दिशा में प्रगति को बनाए रखते हुए 2030 तक माताओं और नवजात शिशुओं की रोकी जा सकने वाली मौतों को शून्य करने की दिशा में देश की यात्रा को गति देने के लिए एक रणनीतिक ढांचा प्रदान करता है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य प्रणालियों में मौजूद कमियों को दूर किया जा रहा है ताकि हर गर्भवती महिला को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
यह कार्यशाला भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक आराधना पटनायक की अध्यक्षता में संपन्न हुई। उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के उप-मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक ने भी हिस्सा लिया। अपने संबोधन में उन्होंने नवविवाहित जोड़ों के पंजीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे अनचाहे गर्भ को रोकने की दिशा में अहम कदम बताया।
सुमन रोडमैप 2030 के मुख्य बिंदु और रणनीतियां
श्रीमती आराधना पटनायक ने मुख्य भाषण के दौरान कहा कि भारत ने मातृ मृत्यु दर को कम करने में काफी प्रगति की है, लेकिन संवेदनशील इलाकों में अभी और काम करने की जरूरत है। यह रोडमैप जीवन-चक्र और निरंतर देखभाल के दृष्टिकोण को अपनाता है।
- तेरह ‘हाई-फोकस’ राज्यों और एक सौ तीस जिलों के लिए विशेष रणनीतियों पर ध्यान दिया गया है।
- गर्भावस्था से पहले की देखभाल और प्रसवपूर्व देखभाल को बेहतर बनाया जा रहा है।
- प्रसव के दौरान और उसके बाद अत्यधिक ब्लीडिंग के प्रबंधन पर तकनीकी चर्चा हुई।
- ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने अपनी क्षेत्रीय पहलों के बारे में प्रस्तुतियां दीं।
तकनीकी सत्रों के दौरान हाई-रिस्क प्रेगनेंसी, सिजेरियन सेक्शन सेवाओं को बेहतर बनाने, डिजिटल हेल्थ पहल और सुमन कॉल सेंटर जैसी सेवाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विभिन्न राज्यों ने अपने यहां चल रहे नवाचार साझा किए, जैसे मध्य प्रदेश का सुमन सखी चैटबॉट और उत्तराखंड का मैटरनल हेल्थ वॉर रूम।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? सुमन रोडमैप 2030 का मुख्य लक्ष्य क्या है? उत्तर। इसका मुख्य लक्ष्य 2030 तक माताओं और नवजात शिशुओं की रोकी जा सकने वाली मौतों को पूरी तरह से शून्य करना है।
प्रश्न? इस कार्यशाला का आयोजन कहाँ किया गया था? उत्तर। यह दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित की गई थी।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






