
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गांधीनगर में दो दिवसीय सुनवाई के दौरान बंधुआ मजदूरी, पुलिस ज्यादती और औद्योगिक हादसों के 129 मामलों का निपटारा किया।
मुख्य बातें
- गांधीनगर में मानवाधिकार आयोग की दो दिवसीय सुनवाई में 129 मानवाधिकार उल्लंघन मामलों पर विचार किया गया।
- भरूच और दहेज के रासायनिक संयंत्र हादसों में मारे गए श्रमिकों के परिवारों को 2 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा मिला।
- बिना उचित नोटिस महिला की गिरफ्तारी पर मानवाधिकार आयोग ने 7.5 लाख रुपये के मुआवजे की सिफारिश की।
- दूसरे दिन आयोग ने बंधुआ मजदूरी के 27 मामलों की समीक्षा की और जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गुजरात के गांधीनगर में आयोजित दो दिवसीय जन सुनवाई और शिविर बैठक के दौरान 129 कथित मानवाधिकार उल्लंघन मामलों पर सुनवाई पूरी कर ली है। पीआईबी के अनुसार, आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन, सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी और श्रीमती विजया भारती सयानी की मौजूदगी में यह महत्वपूर्ण सुनवाई संपन्न हुई।
मानवाधिकार आयोग ने गुजरात में किन प्रमुख मामलों पर सुनवाई की?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गांधीनगर में दो दिवसीय शिविर बैठक के दौरान 129 मामलों की सुनवाई की। आयोग ने पुलिस ज्यादतियों, हिरासत में मौतों और औद्योगिक हादसों से प्रभावित पीड़ितों के लिए करोड़ों रुपये के मुआवजे का भुगतान कराया। साथ ही आयोग ने अधिकारियों को बंधुआ मजदूरी रोकने और पीड़ितों को राहत पहुंचाने के कड़े निर्देश दिए।
सुनवाई के पहले दिन आयोग ने 45 मामलों में संबंधित पक्षों की दलीलें सुनीं और 27 मामलों को संतोषजनक कार्रवाई के बाद बंद कर दिया। इस दौरान विभिन्न मामलों में पीड़ित परिवारों को लगभग 3.5 करोड़ रुपये के मुआवजे के भुगतान से जुड़े दस्तावेज और प्रमाण आयोग के समक्ष पेश किए गए।
गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों पर आयोग ने सख्त रुख अपनाया। एक मामले में एक महिला को बिना किसी उचित कानूनी नोटिस के गिरफ्तार कर लिया गया था, जिसमें आयोग ने 7.5 लाख रुपये का मुआवजा देने की सिफारिश की। इसके अलावा, हिरासत में हुई मौतों, प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस की कार्यशैली से जुड़ी शिकायतों की भी गहनता से समीक्षा की गई। एक दुखद मामले में, जहां एक बच्चे को कुत्ता उठा ले गया था और उसका कोई अता-पता नहीं चला, आयोग ने पीड़ित परिवार को उचित वित्तीय सहायता प्रदान करने की सिफारिश की।
औद्योगिक दुर्घटनाओं और सामाजिक मुद्दों पर आयोग के निर्देश
गुजरात के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की मौतों से जुड़े मामलों पर आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया। भरूच स्थित एक केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग और धमाके के कारण जान गंवाने वाले पांच श्रमिकों के परिवारों को मुआवजा प्रदान किया गया। वहीं दहेज के रासायनिक संयंत्र में जहरीली गैस के रिसाव से हुई दुर्घटना में चार मजदूरों की मौत के मामले में पीड़ित परिवारों को 2 करोड़ रुपये से अधिक की कुल राशि का मुआवजा दिया गया।
अहमदाबाद में एक विशाल विज्ञापन होर्डिंग गिरने से तीन श्रमिकों की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में आयोग ने जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक लापरवाही के कारण होने वाली जनहानि में सीधी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
मानवाधिकार आयोग ने औद्योगिक हादसों के अलावा सामाजिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं पर भी निर्देश दिए:
- स्कूलों के बुनियादी ढांचे में कमियों और ढांचागत विफलताओं पर सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश।
- अनुसूचित जाति के समुदायों के लिए श्मशान घाटों की उपलब्धता न होने के मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई का आदेश।
- दहेज और भरूच के केमिकल कारखानों में पीड़ित परिवारों को मुआवजा हस्तांतरण का सत्यापन।
- अहमदाबाद होर्डिंग हादसे में दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की प्रक्रिया।
बंधुआ मजदूरी और अनुपालन मामलों पर मानवाधिकार आयोग का रुख
सुनवाई के दूसरे दिन मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने गुजरात में बंधुआ मजदूरी के 27 कथित मामलों की समीक्षा की। इस दौरान गुजरात सरकार के श्रम सचिव और संबंधित जिलों के जिला मजिस्ट्रेट व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। आयोग ने जिला प्रशासन की दलीलों को सुना और स्थिति रिपोर्ट का अध्ययन किया। आयोग ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरती जाए और किसी भी शिकायत की जांच के दौरान बंधुआ मजदूरी के संभावित लक्षणों पर नजर रखी जाए।
इसी दौरान न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी और श्रीमती विजया भारती सयानी की खंडपीठ ने 57 अन्य अनुपालन मामलों की सुनवाई की। खंडपीठ ने मामलों की विस्तृत समीक्षा करने और मृतक के परिजनों को 27 लाख रुपये के मुआवजे के भुगतान का प्रमाण मिलने के बाद 46 मामलों को बंद कर दिया। शेष मामलों में संबंधित राज्य अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
नागरिक समाज और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक
अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। इस बैठक में कई सामाजिक सुरक्षा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। इनमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013, पॉक्सो (POCSO) कानून, और असंगठित क्षेत्र में कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न रोधी अधिनियम (POSH Act, 2013) शामिल हैं। कम उम्र की लड़कियों की संस्थागत देखरेख और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम पर भी विचार साझा किए गए।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में मानवाधिकार आयोग ने राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। आयोग ने समय पर जांच रिपोर्ट न भेजने, पुलिस ज्यादतियों, बंधुआ मजदूरी की रोकथाम और शराब बंदी कानूनों के सही क्रियान्वयन जैसे विषयों पर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया। आयोग के अध्यक्ष ने पीड़ितों को न्याय दिलाने में राज्य प्रशासन के सहयोगात्मक रवैये की सराहना की।
मानवाधिकार आयोग की कार्यप्रणाली और शिविर बैठकों का महत्व
मानवाधिकार आयोग भारत में मानव अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए गठित एक स्वायत्त संस्था है। इसकी स्थापना मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत की गई थी। आयोग का मुख्य कार्य हिरासत में हिंसा, पुलिस प्रताड़ना, बंधुआ मजदूरी, और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मामलों की जांच करना है।
राज्य की राजधानी में शिविर बैठक (Camp Sitting) आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों को उनके अपने राज्य में त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। इससे शिकायतकर्ताओं को दिल्ली स्थित आयोग मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। मानवाधिकार आयोग राज्य के शीर्ष अधिकारियों और जिलाधिकारियों को सीधे समन भेजकर एक ही स्थान पर मामलों का निपटारा करता है, जिससे वर्षों से लंबित मामलों में त्वरित मुआवजा और कार्रवाई सुनिश्चित होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? मानवाधिकार आयोग की गांधीनगर बैठक में कुल कितने मामलों का निपटारा हुआ?
उत्तर। गांधीनगर की दो दिवसीय बैठक में मानवाधिकार आयोग ने 129 मामलों पर सुनवाई की, जिनमें से पहले दिन 27 और दूसरे दिन 46 मामलों को मुआवजा भुगतान और अनुपालन रिपोर्ट के आधार पर बंद कर दिया गया।
प्रश्न? गुजरात में औद्योगिक दुर्घटनाओं के पीड़ितों को कितना मुआवजा दिलाया गया?
उत्तर। दहेज के रासायनिक संयंत्र हादसे में मारे गए श्रमिकों के परिवारों को 2 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिलाया गया, जबकि भरूच कारखाने के पीड़ितों को भी वित्तीय सहायता प्रदान की गई। कुल मिलाकर 3.5 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान के प्रमाण आयोग को सौंपे गए।
प्रश्न? मानवाधिकार आयोग बंधुआ मजदूरी के मामलों में क्या कार्रवाई करता है?
उत्तर। मानवाधिकार आयोग बंधुआ मजदूरी की शिकायतों पर सीधे जिला मजिस्ट्रेटों से रिपोर्ट मांगता है, पीड़ितों के पुनर्वास के निर्देश देता है और दोषी नियोक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






