
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर देश भर के शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और शिक्षण पद्धतियों में आधुनिक तकनीक को अपनाने पर जोर दिया।
मुख्य बातें
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 4 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर देश के सभी शिक्षकों को बधाई संदेश दिया।
- राष्ट्रपति ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
- शिक्षकों से पठन-पाठन में नई तकनीकों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया गया।
- विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच और जिज्ञासा की भावना विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।
शिक्षक दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश भर के सभी शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। नई दिल्ली में जारी अपने संदेश में राष्ट्रपति ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और सहयोग से उनकी प्रतिभा को निखारते हैं और उनका चरित्र निर्माण करते हैं।
शिक्षक दिवस 2026 पर राष्ट्रपति ने शिक्षकों के लिए क्या संदेश दिया?
शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षकों से शिक्षण की नवीन पद्धतियों और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि समर्पित शिक्षक विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच और जिज्ञासा विकसित कर उन्हें चरित्रवान नागरिक बनाते हैं। राष्ट्रपति ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि देते हुए सभी शिक्षकों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।
शिक्षक दिवस 2026 और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का योगदान
शिक्षक दिवस 2026 का आयोजन भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। पीआईबी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. राधाकृष्णन एक महान लेखक, विचार और अतुल्य शिक्षक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा और ज्ञान के प्रसार में समर्पित कर दिया था।
भारत में प्रतिवर्ष 5 सितंबर को उनकी स्मृति में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि डॉ. राधाकृष्णन के विचार आज भी शिक्षा जगत को नई राह दिखाते हैं। शिक्षक दिवस 2026 के इस अवसर पर राष्ट्रपति ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे डॉ. राधाकृष्णन के आदर्शों पर चलते हुए समाज के निर्माण में अपनी सहभागिता बढ़ाएं।
शिक्षण में तकनीक और आधुनिक पद्धतियों का समावेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संदेश में शिक्षकों से डिजिटल युग की जरूरतों के अनुसार खुद को ढालने का आग्रह किया है। शिक्षक दिवस 2026 के संदेश में उन्होंने कहा कि शिक्षकों को प्रौद्योगिकी को अपनाते हुए निरंतर ज्ञान अर्जित करते रहना चाहिए। आधुनिक समय में शिक्षण की नवीन पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य हो गया है।
राष्ट्रपति के अनुसार, एक समर्पित और संवेदनशील शिक्षक विद्यार्थियों की विशिष्ट क्षमता की पहचान करता है। वह विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है और उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने में सक्षम बनाता है। शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति ने बल दिया कि अध्यापकों को कक्षा में ऐसा माहौल तैयार करना चाहिए, जिससे छात्रों में सवाल पूछने और नया सीखने की उत्सुकता बढ़े।
चरित्र निर्माण और भावी पीढ़ियों का मार्गदर्शन
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि विद्यार्थी को एक अच्छे व्यक्ति के रूप में रूपांतरित करना भी है। शिक्षक दिवस 2026 के इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक अपने सही मार्गदर्शन से बच्चों के चरित्र का निर्माण करते हैं।
विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर जारी संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि जब तक विद्यार्थियों में जिज्ञासा का भाव विकसित नहीं होगा, तब तक उनकी वास्तविक क्षमता बाहर नहीं आ सकती। शिक्षक ही वह धुरी हैं जो प्रबुद्ध पीढ़ियों का निर्माण कर देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सक्षम हैं।
शिक्षक दिवस 2026 के मुख्य बिंदु
- तिथि और अवसर: 4 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बधाई संदेश जारी किया।
- डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन: राष्ट्रपति ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति और दार्शनिक डॉ. राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि दी।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग: अध्यापकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और नई तकनीक को अपनाने का सुझाव दिया गया।
- स्वतंत्र सोच को प्रोत्साहन: कक्षाओं में विद्यार्थियों के भीतर जिज्ञासा और स्वतंत्र विचारों को विकसित करने पर जोर दिया गया।
- राष्ट्र निर्माण में योगदान: प्रबुद्ध पीढ़ियों का निर्माण कर देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने की कामना की गई।
भारत में शिक्षक दिवस का इतिहास और महत्व
शिक्षक दिवस 2026 का ऐतिहासिक संदर्भ बेहद महत्वपूर्ण है। भारत में वर्ष 1962 से प्रतिवर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। जब डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने, तब उनके कुछ शिष्यों और मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई थी। डॉ. राधाकृष्णन ने सुझाव दिया कि उनके जन्मदिन को व्यक्तिगत उत्सव के रूप में मनाने के बजाय यदि देश भर के शिक्षकों के सम्मान के रूप में मनाया जाए, तो उन्हें अधिक प्रसन्नता होगी।
तभी से 5 सितंबर का दिन शिक्षक दिवस के रूप में समर्पित कर दिया गया। शिक्षक दिवस 2026 इस महान परंपरा की निरंतरता का प्रतीक है। गुरु-शिष्य परंपरा भारत की सांस्कृतिक जड़ों में गहराई से समाई हुई है। प्राचीन आश्रमों से लेकर आज के आधुनिक डिजिटल क्लासरूम तक, शिक्षक की भूमिका हमेशा से समाज को दिशा देने वाली रही है।
शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित भी किया जाता है। राष्ट्रपति भवन और शिक्षा मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह का आयोजन होता है, जिसमें नवाचार और समर्पित शिक्षण कार्य करने वाले अध्यापकों को राष्ट्रपति पदक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: शिक्षक दिवस 2026 कब मनाया जाता है?
उत्तर: भारत में प्रतिवर्ष 5 सितंबर को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
प्रश्न: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस 2026 के संदेश में शिक्षकों से क्या आह्वान किया?
उत्तर: राष्ट्रपति ने शिक्षकों से पठन-पाठन में आधुनिक तकनीक अपनाने, निरंतर नया ज्ञान अर्जित करने और विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच विकसित करने का आह्वान किया।
प्रश्न: भारत में पहली बार शिक्षक दिवस कब मनाया गया था?
उत्तर: भारत में पहली बार 5 सितंबर 1962 को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया गया था।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






