
आरबीआई ने ग्राहकों को मुआवजा देने के नियमों का पालन न करने पर इक्विफैक्स क्रेडिट इंफॉर्मेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ यह कार्रवाई की है।
मुख्य बातें
- भारतीय रिज़र्व बैंक ने इक्विफैक्स क्रेडिट पर 1,19,400 रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है।
- यह कार्रवाई 31 अगस्त 2026 के आदेश के तहत की गई है।
- कंपनी पर यह दंड ग्राहकों के बैंक खातों में निर्धारित समय सीमा के भीतर मुआवजा राशि जमा न करने के कारण लगाया गया है।
- निरीक्षण के दौरान वित्तीय स्थिति का आकलन 31 मार्च 2025 के संदर्भ में किया गया था।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा नियमों के उल्लंघन के मामलों में लगातार कड़ी कार्रवाई की जा रही है, जिसके तहत हाल ही में इक्विफैक्स जुर्माना लगाया गया है। केंद्रीय बैंक ने 31 अगस्त 2026 को जारी एक आदेश के माध्यम से इक्विफैक्स क्रेडिट इंफॉर्मेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर 1,19,400 रुपये का मौद्रिक दंड लगाया है। यह शास्ति क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी (रेगुलेशन) एक्ट, 2005 की धारा 25(1)(iii) के साथ पठित धारा 23(4) के तहत प्रद शक्तियों का उपयोग करते हुए लगाई गई है।
इक्विफैक्स जुर्माना और इसके पीछे की मुख्य वजह
इक्विफैक्स जुर्माना मुख्य रूप से केंद्रीय बैंक के उन निर्देशों का पालन न करने के कारण लगाया गया है जो ग्राहकों को क्रेडिट जानकारी के विलंबित अद्यतन या सुधार के लिए मुआवजा देने के ढांचे से संबंधित हैं। रिजर्व बैंक के अनुसार, कंपनी ने कुछ पात्र शिकायतकर्ताओं के बैंक खातों में निर्धारित अवधि के भीतर मुआवजा राशि जमा नहीं की थी। इस तरह की लापरवाही वित्तीय संस्थानों और क्रेडिट ब्यूरो के कामकाज पर सवाल खड़े करती है, जिससे ग्राहकों को सीधे तौर पर परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नियामक निरीक्षण और कारण बताओ नोटिस की प्रक्रिया
केंद्रीय बैंक ने कंपनी की वित्तीय स्थिति का आकलन करने के लिए 31 मार्च 2025 के संदर्भ में एक वैधानिक निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के दौरान नियामक निर्देशों के अनुपालन में कमियां पाई गईं, जिसके बाद कंपनी को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि निर्धारित नियमों का पालन करने में विफल रहने पर क्यों न उनके खिलाफ दंडनात्मक कार्रवाई की जाए। कंपनी द्वारा दिए गए लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद केंद्रीय बैंक ने इस आरोप को सही पाया।
आरबीआई की विनियामक कार्रवाई का दायरा
भारतीय रिज़र्व बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि इक्विफैक्स जुर्माना पूरी तरह से विनियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर कोई टिप्पणी करना नहीं है। इसके अलावा, यह मौद्रिक दंड कंपनी के खिलाफ केंद्रीय बैंक द्वारा शुरू की जा सकती है अन्य किसी भी कार्रवाई के अधिकार को प्रभावित किए बिना लगाया गया है। वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस तरह के कड़े कदम बेहद जरूरी माने जाते हैं।
क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों की जवाबदेही
भारत में क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियां (CIC) नागरिकों के सिबिल स्कोर और वित्तीय इतिहास को प्रबंधित करने में अहम भूमिका निभाती हैं। ऋण दाताओं और आम जनता के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य करने वाली इन संस्थाओं के लिए नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होता है। जब कभी डेटा अपडेट करने में देरी होती है या सुधार समय पर नहीं होता है, तो ग्राहकों को नया लोन लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी असुविधा की भरपाई के लिए केंद्रीय बैंक ने मुआवजा देने का स्पष्ट ढांचा तैयार किया है, जिसकी अनदेखी करने पर सख्त दंड भुगतना पड़ता है।
- जुर्माने की कुल राशि: 1,19,400 रुपये
- कारवाई की तारीख: 31 अगस्त 2026
- संबद्ध कंपनी: इक्विफैक्स क्रेडिट इंफॉर्मेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड
- निरीक्षण का आधार वर्ष: 31 मार्च 2025
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? इक्विफैक्स पर जुर्माना क्यों लगाया गया है? उत्तर। कंपनी द्वारा ग्राहकों को मुआवजा राशि समय पर न देने के कारण यह जुर्माना लगाया गया है।
प्रश्न? यह कार्रवाई किस कानून के तहत की गई है? उत्तर। यह कार्रवाई क्रेडिट Information Companies (Regulation) Act, 2005 के तहत की गई है।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






