
राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) ने ऑडिट गुणवत्ता, आश्वासन और प्रौद्योगिकी पर सलाह देने के लिए नई सलाहकार समिति गठित की है।
मुख्य बातें
- राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण ने एनएफआरए सलाहकार समिति का गठन किया।
- एनएफआरए नियम 2018 के नियम 15 और 16 के तहत इस समिति को बनाया गया है।
- यह एनएफआरए द्वारा गठित तीसरी सलाहकार समिति है, इससे पहले 2020 और 2024 में समूह गठित हुए थे।
- समिति में सीएफओ, पेशेवर, स्वतंत्र निदेशक, नियामक और तकनीक विशेषज्ञ शामिल हैं।
राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) ने ऑडिट की गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एनएफआरए सलाहकार समिति का गठन किया है। पीआईबी के अनुसार, यह समिति वित्तीय रिपोर्टिंग क्षेत्र में ऑडिट गुणवत्ता, आश्वासन और नई प्रौद्योगिकियों के प्रभाव से जुड़े मुद्दों पर प्राधिकरण को विशेषज्ञ सुझाव प्रदान करेगी।
एनएफआरए सलाहकार समिति क्या है?
एनएफआरए सलाहकार समिति राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण द्वारा गठित एक विशेषज्ञ निकाय है, जो ऑडिट की गुणवत्ता, आश्वासन और तकनीकी उपयोग पर परामर्श देती है। इस एनएफआरए सलाहकार समिति में उद्योग, लेखा परीक्षा और नियामकों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं, जो वित्तीय ढांचे को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में मदद करते हैं।
एनएफआरए सलाहकार समिति का कानूनी ढांचा और अधिकार
राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण ने इस समिति का निर्माण राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण नियम 2018 के प्रावधानों के अंतर्गत किया है। इन नियमों का नियम 15 और नियम 16 प्राधिकरण को अपने कर्तव्यों के प्रभावी निष्पादन के लिए विशेष समितियों, अध्ययन समूहों और कार्य बलों का गठन करने का वैधानिक अधिकार देता है। इन प्रावधानों के तहत प्राधिकरण ऑडिट मानकों, लेखा मानकों और ऑडिट गुणवत्ता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाता है।
इसी वैधानिक शक्ति का प्रयोग करते हुए एनएफआरए सलाहकार समिति को यह दायित्व सौंपा गया है कि वह ऑडिट गुणवत्ता पर असर डालने वाले प्रमुख विषयों पर अपने इनपुट पेश करे। प्राधिकरण का मानना है कि वित्तीय बाजारों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ऑडिट प्रक्रिया में निरंतर सुधार आवश्यक है।
समिति में शामिल सदस्य और प्रतिनिधित्व
इस एनएफआरए सलाहकार समिति में विभिन्न हितधारक समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले नामचीन विशेषज्ञों को जगह दी गई है। इसमें कॉर्पोरेट जगत के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ), पेशेवर लेखा परीक्षक, ऑडिट समितियों के सदस्य और स्वतंत्र निदेशक शामिल हैं।
- पेशेवर और लेखा परीक्षक: ऑडिट की व्यावहारिक चुनौतियों और जमीनी वास्तविकताओं की समझ रखने वाले विशेषज्ञ।
- सीएफओ और उद्योग प्रतिनिधि: कॉर्पोरेट प्रशासन और वित्तीय रिपोर्टिंग के औद्योगिक पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य।
- प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ: ऑडिट में डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक डिजिटल उपकरणों के प्रयोग पर मार्गदर्शन देने वाले विशेषज्ञ।
- नियामक और स्वतंत्र निदेशक: कॉर्पोरेट जवाबदेही और निवेशकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले प्रतिनिधि।
विभिन्न क्षेत्रों के इन विशेषज्ञों का समावेश यह सुनिश्चित करेगा कि एनएफआरए सलाहकार समिति के सुझाव संतुलित और व्यावहारिक हों।
एनएफआरए सलाहकार समिति का इतिहास और पिछला रिकॉर्ड
यह एनएफआरए सलाहकार समिति प्राधिकरण द्वारा गठित इस तरह की तीसरी समिति है। एनएफआरए ने इससे पहले भी ऑडिट और लेखा मानकों में सुधार के लिए विशेषज्ञ समूहों का सहारा लिया है।
प्राधिकरण ने सबसे पहली तकनीकी सलाहकार समिति का गठन वर्ष 2020 में किया था। इस पहली समिति का कार्यकाल दिसंबर 2022 में पूरा हुआ था। इसके बाद जुलाई 2024 में एनएफआरए ने लेखा परीक्षक और लेखा परीक्षा समिति के संसाधनों पर सलाह देने के लिए विशेषज्ञों का एक सलाहकार समूह गठित किया। उस सलाहकार समूह ने ऑडिट समितियों तथा स्वतंत्र निदेशकों के साथ आउटरीच गतिविधियों और विचार-विमर्श श्रृंखलाओं का संचालन किया था।
अब 2026 में गठित यह नई एनएफआरए सलाहकार समिति पिछले समूहों के अनुभवों को आगे बढ़ाते हुए ऑडिट में प्रौद्योगिकी के सीधे उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेगी। इस समिति का विवरण और इसके कार्यों की जानकारी प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट nfra.gov.in पर भी उपलब्ध कराई गई है।
ऑडिट गुणवत्ता और प्रौद्योगिकी का बढ़ता प्रभाव
आज के दौर में कॉर्पोरेट धोखाधड़ी रोकने और वित्तीय विवरणों की सत्यता जांचने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग अनिवार्य हो गया है। एनएफआरए सलाहकार समिति इस बात पर ध्यान केंद्रित करेगी कि ऑडिट प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल टूल्स का सुरक्षित प्रयोग कैसे किया जाए।
नियामक संस्थाओं के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे लेखा परीक्षकों द्वारा अपनाई जाने वाली पद्धतियों पर नजर रखें। जब एनएफआरए सलाहकार समिति ऑडिट मानकों में सुधार के उपाय सुझाएगी, तो इससे भारतीय कंपनियों की वित्तीय रिपोर्टिंग विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप बन सकेगी। देश में निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए मजबूत ऑडिट व्यवस्था बहुत जरूरी मानी जाती है।
कंपनी प्रशासन और निवेशकों पर इस निर्णय का असर
राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण का यह निर्णय भारतीय शेयर बाजार और वित्तीय प्रणाली को मजबूती प्रदान करेगा। जब कंपनियां अपनी ऑडिट गुणवत्ता में सुधार करेंगी, तो शेयरधारकों और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। एनएफआरए सलाहकार समिति के इनपुट से ऐसी नीतियां बनाने में मदद मिलेगी, जो वित्तीय गड़बड़ियों को शुरुआती चरण में ही पकड़ सकें।
ऑडिट की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखना इस समिति का एक मुख्य ध्येय है। स्वतंत्र निदेशकों और सीएफओ के अनुभव का लाभ उठाकर एनएफआरए सलाहकार समिति ऑडिट रिपोर्टों में पारदर्शिता लाने के लिए मानक तय करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? एनएफआरए सलाहकार समिति का गठन किस नियम के तहत किया गया है?
उत्तर। इस समिति का गठन राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण नियम 2018 के नियम 15 और नियम 16 के तहत किया गया है।
प्रश्न? क्या यह एनएफआरए द्वारा गठित पहली सलाहकार समिति है?
उत्तर। नहीं, यह प्राधिकरण द्वारा गठित तीसरी समिति है। पहली समिति 2020 में बनी थी और दूसरी 2024 में सलाहकार समूह के रूप में गठित हुई थी।
प्रश्न? एनएफआरए सलाहकार समिति के मुख्य सदस्य कौन हैं?
उत्तर। इसमें सीएफओ, पेशेवर लेखा परीक्षक, स्वतंत्र निदेशक, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, नियामक और उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






