
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पंजाब में 1,013 लेक्चरर पदों की भर्ती के दौरान एससी आरक्षण का लाभ न दिए जाने की शिकायत पर मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है।
मुख्य बातें
- पंजाब शिक्षा विभाग की 1,013 लेक्चरर पदों की भर्ती का मामला।
- राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में की थी शिकायत।
- पंजाब के मुख्य सचिव को सात दिनों के भीतर सभी रिकॉर्ड और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।
- समय पर जवाब न मिलने पर आयोग सिविल कोर्ट की शक्तियों का कर सकता है इस्तेमाल।
लेक्चरर पदों की भर्ती में अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलने के मामले पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। पीआईबी के अनुसार, राज्यसभा सांसद तरुण चुघ की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पंजाब शिक्षा विभाग द्वारा घोषित रिक्तियों में नियमों की अनदेखी हुई है।
लेक्चरर पदों की भर्ती प्रक्रिया पर एनसीएससी का कड़ा नोटिस
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने पंजाब में 1,013 लेक्चरर पदों की भर्ती प्रक्रिया में एससी वर्ग के आरक्षण नियमों की अनदेखी करने की शिकायत पर संज्ञान लिया है। पीआईबी द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को आधिकारिक नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर पूरे मामले से जुड़े तथ्य और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है।
आयोग को दी गई शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि पंजाबी, वाणिज्य, गणित, भौतिकी, अर्थशास्त्र, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भूगोल जैसे कई विषयों के शिक्षण पदों पर रोस्टर प्रणाली का सही ढंग से पालन नहीं किया गया। इससे योग्य उम्मीदवारों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित होना पड़ा है।
संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत मिली शक्तियां
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त हैं। यदि पंजाब सरकार की ओर से निर्धारित सात दिनों की समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं भेजा जाता है, तो आयोग व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी करने का कानूनी अधिकार रखता है।
- पंजाब शिक्षा विभाग द्वारा कुल 1,013 पदों पर निकाली गई है विज्ञप्ति।
- सांसद तरुण चुघ ने की थी आयोग से औपचारिक शिकायत।
- आरक्षण रोस्टर और भर्ती अधिसूचना का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है।
- अध्यक्ष किशोर मकवाना ने मामले को अत्यंत गंभीर बताया है।
आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने इस विषय पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकारी सेवाओं में आरक्षण के प्रावधानों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि आयोग अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और न्याय दिलाने हेतु कानून के दायरे में रहकर सभी कदम उठाए जाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने किस मामले में नोटिस जारी किया है?
उत्तर। आयोग ने पंजाब में लेक्चरर पदों की भर्ती के दौरान एससी उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ न मिलने की शिकायत पर मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है।
प्रश्न? जवाब देने के लिए कितना समय दिया गया है?
उत्तर। नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर सभी संबंधित रिकॉर्ड और तथ्य आयोग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






