
उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने चेन्नई में ‘इंडिया वाल्व्स 2026’ सम्मेलन में इंडिया वाल्व रजिस्ट्री का उद्घाटन किया, जिससे देश में दिल की बीमारियों के इलाज का डेटा तैयार होगा।
मुख्य बातें
- उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने चेन्नई में ‘इंडिया वाल्व्स 2026’ सम्मेलन के दौरान इंडिया वाल्व रजिस्ट्री का उद्घाटन किया।
- इस राष्ट्रीय पहल का मुख्य उद्देश्य भारत में ट्रांसकैथेटर वाल्व हस्तक्षेपों पर वास्तविक दुनिया का सुरक्षित और सटीक डेटा एकत्र करना है।
- कार्यक्रम में तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री थिरु के.जी. अरुणराज और देश के कई प्रमुख कार्डियोलॉजिस्ट उपस्थित रहे।
- उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्वस्थ भारत का निर्माण आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय शैक्षणिक सम्मेलन ‘इंडिया वाल्व्स 2026’ के दौरान इंडिया वाल्व रजिस्ट्री का आधिकारिक शुभारंभ किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश में वाल्वुलर और संरचनात्मक हृदय रोगों से पीड़ित रोगियों के उपचार को अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी बनाना है। पीआईबी के अनुसार, इस सम्मेलन में भारत और विदेश के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों, कार्डियक सर्जनों और चिकित्सा शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
इंडिया वाल्व रजिस्ट्री का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इंडिया वाल्व रजिस्ट्री भारत भर में ट्रांसकैथेटर वाल्व हस्तक्षेपों और हृदय वाल्व प्रक्रियाओं का एक व्यवस्थित, सुरक्षित और पहचान-रहित डेटाबेस है। यह राष्ट्रीय बहु-केंद्रित पहल भारत-विशिष्ट नैदानिक साक्ष्य तैयार करने, चिकित्सा निर्णयों को मजबूत करने और हृदय रोगियों के इलाज के परिणामों में सुधार करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि हर चिकित्सा प्रक्रिया और क्लिनिकल फैसले के पीछे एक मरीज होता है। मरीज की इच्छा केवल लंबे समय तक जीना ही नहीं, बल्कि एक सेहतमंद और सम्मानजनक जीवन बिताना भी होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर डेटा दर्ज होने से चिकित्सा जगत को अपने ही देश के मरीजों के इलाज के परिणामों को गहराई से समझने में मदद मिलेगी।
इंडिया वाल्व रजिस्ट्री से देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को कैसे मिलेगा लाभ?
भारत में अब तक ट्रांसकैथेटर वाल्व तकनीकों से जुड़े कई इलाज पश्चिमी देशों के आंकड़ों और अध्ययनों के आधार पर तय किए जाते रहे हैं। हालांकि, भारतीय आबादी की शारीरिक संरचना और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें अलग होती हैं। इस दिशा में इंडिया वाल्व रजिस्ट्री एक मजबूत पहल साबित होगी, क्योंकि इससे हमारे अपने देश का प्रामाणिक डेटा तैयार होगा।
इस सहयोगी पहल के माध्यम से विभिन्न अस्पतालों से वाल्व संबंधी सर्जरी कराने वाले मरीजों की जानकारी जुटाई जाएगी। इंडिया वाल्व रजिस्ट्री में दर्ज डेटा से डॉक्टर यह देख सकेंगे कि कौन-सी प्रक्रियाएं भारतीय परिस्थितियों में अधिक सफल हैं। इससे चिकित्सा समुदाय को भविष्य की चुनौतियों और कमियों की पहचान करने का अवसर मिलेगा।
चेन्नई सम्मेलन में जुटे देश-विदेश के प्रमुख विशेषज्ञ
‘इंडिया वाल्व्स 2026’ सम्मेलन में चिकित्सा जगत की कई वरिष्ठ हस्तियों ने भाग लिया। इस अवसर पर तमिलनाडु के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण मंत्री थिरु के.जी. अरुणराज मौजूद रहे। उनके साथ अपोलो अस्पताल चेन्नई के वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जी. सेंगोट्टुवेलु, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के कार्डियक साइंसेज अध्यक्ष डॉ. अशोक सेठ और मेदांता-द मेडिसिटी गुरुग्राम के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी अध्यक्ष डॉ. प्रवीण चंद्र ने भी अपने विचार रखे।
सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि इंडिया वाल्व रजिस्ट्री के माध्यम से भारत अपने चिकित्सा अनुसंधान को वैश्विक मानकों के समकक्ष ले जा सकता है। इससे नए सर्जनों और कार्डियोलॉजिस्टों के प्रशिक्षण में भी आसानी होगी।
विकसित भारत 2047 के लिए स्वस्थ भारत का विजन
उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने अपने भाषण में 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक विकसित भारत का निर्माण तब तक संभव नहीं है जब तक कि देश का हर नागरिक स्वस्थ न हो। स्वास्थ्य सेवा को एक बुनियादी मानवाधिकार बताते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आधुनिक चिकित्सा नवाचार का लाभ समाज के हर वर्ग तक आसानी से पहुँचना चाहिए।
उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के योगदान का भी स्मरण किया। भारत ने न केवल अपनी आबादी के लिए स्वदेशी टीके विकसित किए, बल्कि दुनिया के लगभग 100 देशों को वैक्सीन की आपूर्ति भी की। यह क्षमता दर्शाती है कि भारतीय डॉक्टर, वैज्ञानिक और स्वास्थ्य कर्मी विश्व स्तर पर अग्रणी हैं। इस संदर्भ में इंडिया वाल्व रजिस्ट्री की स्थापना देश की चिकित्सा अनुसंधान क्षमताओं को और मजबूत करेगी।
संरचनात्मक हृदय रोग और डेटा-संचालित चिकित्सा का महत्व
हृदय वाल्व से जुड़ी बीमारियां, जिन्हें वाल्वुलर और संरचनात्मक हृदय रोग कहा जाता है, एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई हैं। इन रोगों में दिल के वाल्व सही तरीके से काम नहीं करते या सिकुड़ जाते हैं। आधुनिक समय में ट्रांसकैथेटर वाल्व तकनीकों (जैसे TAVI/TAVR) ने बिना बड़ी ओपन-हार्ट सर्जरी के वाल्व बदलने की सुविधा दी है।
इन जटिल और आधुनिक प्रक्रियाओं में इंडिया वाल्व रजिस्ट्री जैसी व्यवस्था अत्यंत उपयोगी साबित होती है। जब विभिन्न चिकित्सा केंद्रों से इलाज का डेटा एक जगह सुरक्षित रूप से एकत्रित किया जाता है, तो उससे व्यक्तिगत अनुभव सामूहिक चिकित्सा ज्ञान में बदल जाते हैं।
इंडिया वाल्व रजिस्ट्री की प्रमुख विशेषताएं
- भारतीय डेटा संग्रह: यह इंडिया वाल्व रजिस्ट्री पूरी तरह से भारत-विशिष्ट नैदानिक साक्ष्य एकत्र करने के लिए तैयार की गई है।
- पहचान-रहित व सुरक्षित: मरीजों की गोपनीयता बनाए रखते हुए केवल इलाज और परिणामों का डेटा सुरक्षित रूप से दर्ज किया जाएगा।
- बहु-केंद्रित सहयोग: इसमें देश भर के प्रमुख कार्डियोलॉजी केंद्र और अस्पताल मिलकर काम करेंगे।
- गुणात्मक सुधार: दर्ज जानकारी से चिकित्सा समुदाय को उपचार की कमियों को दूर करने और मरीज देखभाल सुधारने में मदद मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: इंडिया वाल्व रजिस्ट्री का मुख्य काम क्या है?
उत्तर: इंडिया वाल्व रजिस्ट्री भारत में ट्रांसकैथेटर वाल्व उपचार और हृदय प्रक्रियाओं का सुरक्षित डेटा एकत्र करती है ताकि इलाज के परिणामों को बेहतर बनाया जा सके।
प्रश्न: इंडिया वाल्व रजिस्ट्री का शुभारंभ किसने और कहां किया?
उत्तर: भारत के उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया वाल्व्स 2026’ सम्मेलन के दौरान इंडिया वाल्व रजिस्ट्री का शुभारंभ किया।
प्रश्न: क्या इंडिया वाल्व रजिस्ट्री से मरीजों की गोपनीयता पर असर पड़ेगा?
उत्तर: नहीं, इंडिया वाल्व रजिस्ट्री में मरीजों की व्यक्तिगत पहचान को पूरी तरह गुप्त रखकर केवल नैदानिक डेटा ही सुरक्षित रूप से दर्ज किया जाता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






