
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 सितंबर 2026 को पणजी में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
मुख्य बातें
- केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 07 सितम्बर 2026 को गोवा के पणजी में बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
- पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद में गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, दादरा एवं नगर हवेली और दमन-दीव शामिल हैं।
- राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 की धारा 15 से 22 के तहत देश में 5 क्षेत्रीय परिषदों का गठन किया गया था।
- जून 2014 से अब तक विभिन्न क्षेत्रीय परिषदों और स्थायी समितियों की कुल 70 बैठकें आयोजित हो चुकी हैं।
- बैठक में महिला सुरक्षा, ERSS-112, ग्रामीण बैंकिंग, साइबर अपराध और बिजली सुधारों पर चर्चा होगी।
पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक सोमवार, 07 सितम्बर 2026 को गोवा की राजधानी पणजी में आयोजित की जा रही है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा गोवा सरकार की मेज़बानी में यह आयोजन किया जा रहा है। इस बैठक में पश्चिमी क्षेत्र के सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, वरिष्ठ मंत्री, मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी एक मंच पर जुटेंगे।
पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र और पश्चिमी राज्यों के बीच आपसी समन्वय को बढ़ावा देना तथा अंतर-राज्यीय विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान खोजना है। केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सुरक्षा, बैंकिंग सेवाओं के विस्तार, साइबर अपराध और बुनियादी ढांचे से जुड़े विषयों पर विस्तार से निर्णय लिए जाएंगे।
पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद का ढांचा और संवैधानिक आधार
भारत में क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 से 22 के तहत की गई थी। इस कानून के माध्यम से देश को पांच अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर क्षेत्रीय परिषदों का गठन किया गया। पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद के अंतर्गत गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र राज्य शामिल हैं। इसके अलावा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव संघ राज्यक्षेत्र भी इस परिषद का अभिन्न हिस्सा हैं।
संवैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री इस पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष होते हैं। मेजबान राज्य के मुख्यमंत्री को परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में नामित किया जाता है। इस प्रकार गोवा के मुख्यमंत्री इस 28वीं बैठक में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाएंगे। नियम के अनुसार सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को हर साल बारी-बारी से एक-एक वर्ष के लिए उपाध्यक्ष बनाया जाता है।
परिषद की संरचना में प्रत्येक सदस्य राज्य से मुख्यमंत्री के अलावा दो वरिष्ठ मंत्रियों को भी नामित किया जाता है। इसके साथ ही भारत सरकार के मंत्रालयों और संबंधित राज्यों के सचिव स्तर के अधिकारी भी इस परामर्श प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
स्थायी समिति और बैठकों की कार्यप्रणाली
पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित रखने के लिए मुख्य सचिवों के स्तर पर एक स्थायी समिति काम करती है। किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश द्वारा उठाए गए मुद्दों को सबसे पहले इस स्थायी समिति के सामने विचार के लिए रखा जाता है।
स्थायी समिति में सदस्य राज्यों के मुख्य सचिव और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रस्तावित मामलों की तकनीकी और व्यावहारिक जांच करते हैं। जिन मुद्दों पर प्रशासनिक स्तर पर सहमति नहीं बन पाती, केवल उन्हीं शेष जटिल मुद्दों को पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की मुख्य बैठक में मंत्रियों और गृह मंत्री के समक्ष निर्णय हेतु प्रस्तुत किया जाता है। इस दो-स्तरीय समीक्षा प्रणाली से परिषद का समय बचता है और महत्वपूर्ण नीतियों पर ठोस प्रगति संभव होती है।
पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के मुख्य एजेंडा बिंदु
यद्यपि क्षेत्रीय परिषदों का स्वरूप मुख्य रूप से सलाहकारी है, परंतु बीते वर्षों में इन संस्थाओं ने अंतर-राज्यीय सहयोग बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की इस 28वीं बैठक में आम नागरिकों से जुड़े कई बुनियादी और विकासत्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा:
- महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों की त्वरित जांच तथा Fast Track Special Courts (FTSC) का तेजी से कार्यान्वयन।
- आपातकालीन स्थिति में त्वरित मदद के लिए Emergency Response Support System (ERSS-112) का दायरा बढ़ाना।
- खाद्य सुरक्षा मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करना और राज्यों में खाद्य गुणवत्ता की नियमित निगरानी।
- प्रत्येक गांव के निर्धारित दायरे के भीतर ब्रिक-एंड-मोर्टार बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करना ताकि वित्तीय समावेशन को गति मिले।
- पोषण अभियान, प्राथमिक शिक्षा, जन स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण।
- बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधार (Power Reforms) और शहरों के व्यवस्थित विकास के लिए Urban Planning की समीक्षा।
- सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देना, साइबर अपराध से सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना।
सहकारी संघवाद और क्षेत्रीय परिषदों का 12 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘टीम भारत’ (TEAM BHARAT) के विचार को आगे बढ़ाते हुए देश में सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद को मजबूत करने का आह्वान किया है। इस सोच के पीछे मुख्य दर्शन यह है कि मजबूत राज्यों के सहयोग से ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद जैसे मंच केंद्र और राज्यों को साझा चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यवस्थित संवाद तंत्र प्रदान करते हैं।
गृह मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून 2014 से लेकर अब तक पिछले 12 वर्षों के दौरान विभिन्न क्षेत्रीय परिषदों और उनकी स्थायी समितियों की कुल 70 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों के माध्यम से केंद्र सरकार और राज्यों ने आपसी बातचीत से सैकड़ों लंबित मुद्दों का निस्तारण किया है।
तटीय राज्यों के लिए पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद का यह मंच विशेष महत्व रखता है। महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा जैसे राज्य देश के प्रमुख औद्योगिक और समुद्री व्यापारिक केंद्र हैं। इसलिए इन राज्यों के बीच लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा और ढांचागत समन्वय से पूरे देश की आर्थिक प्रगति को गति मिलती है।
पणजी में होने वाली इस बैठक के दौरान राज्यों के बीच डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साझा इस्तेमाल, साइबर सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत करने तथा सहकारी क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गृह मंत्रालय का मानना है कि क्षेत्रीय बैठकों के नियमित आयोजन से न केवल राज्यों के बीच आपसी विश्वास बढ़ता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करने में भी आसानी होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद में कौन-कौन से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं?
उत्तर: इसमें गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र राज्य तथा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव संघ राज्यक्षेत्र शामिल हैं।
प्रश्न: पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की अध्यक्षता कौन करता है?
उत्तर: भारत के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री इस परिषद के अध्यक्ष होते हैं, जबकि सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री बारी-बारी से उपाध्यक्ष बनते हैं।
प्रश्न: पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद का गठन किस कानून के तहत हुआ है?
उत्तर: इसका गठन राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 से 22 के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में किया गया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






