
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर मुलाकात की और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
मुख्य बातें
- वर्ष 2026 के लिए कुल 82 शिक्षकों और शिक्षाविदों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया गया है।
- विद्यालय शिक्षा विभाग से 48, उच्च शिक्षण संस्थानों से 21 और कौशल विकास मंत्रालय से 13 प्रशिक्षक शामिल हैं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर विजेताओं से सीधी बातचीत की।
- स्क्रीन टाइम और बच्चों की आदतों जैसे गंभीर विषयों पर शिक्षकों के साथ प्रधानमंत्री ने चर्चा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से अपने आधिकारिक आवास पर मुलाकात की और देश की शिक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की। पीआईबी के अनुसार, इस वर्ष कुल 82 शिक्षकों और शिक्षाविदों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है, जो देश के अलग-अलग कोनों से ताल्लुक रखते हैं। इस विशेष संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों ने अपने शिक्षण अनुभवों और कक्षा में अपनाए जाने वाले नए तौर-तरीकों को साझा किया।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से पीएम मोदी की मुलाकात
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले इन शिक्षकों में विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के 48 शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक से 21 शिक्षक व संकाय सदस्य इस सूची में जगह बनाने में कामयाब रहे। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले 13 कौशल प्रशिक्षकों को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है। प्रधानमंत्री ने सभी शिक्षकों से बातचीत के दौरान उनके द्वारा कक्षाओं में किए जा रहे नवाचारों की सराहना की और बच्चों को पढ़ाने के नए तरीकों के बारे में विस्तार से जाना।
शिक्षकों की बदलती और बढ़ती जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज के समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी केवलता किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं रह गई है। पारंपरिक संयुक्त परिवारों की घटती संख्या के दौर में बच्चों के मानसिक और व्यावहारिक विकास में शिक्षकों का दायित्व और अधिक बढ़ गया है। शिक्षकों को विद्यार्थियों के शैक्षणिक अंकों से आगे बढ़कर उनके दैनिक व्यवहार और आदतों पर भी पैनी नजर रखनी चाहिए ताकि उन्हें एक बेहतर इंसान बनाया जा सके।
स्क्रीन टाइम और बच्चों की बढ़ती लत
आज के दौर में बच्चों द्वारा स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताया जाना एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से आग्रह किया कि वे अभिभावकों के साथ मिलकर इस समस्या पर गंभीरता से चर्चा करें। शिक्षकों को यह देखना चाहिए कि कहीं छात्र देर रात तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हैं। खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों को बढ़ावा देकर बच्चों को स्क्रीन की लत से बाहर निकाला जा सकता है।
नशे की समस्या और बच्चों की मासूमियत
बच्चों में नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि छात्र के व्यवहार में कोई अचानक बदलाव नजर आए, तो शिक्षकों को तुरंत उसके कारणों का पता लगाना चाहिए। बचपन की मासूमियत को बचाए रखना और बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा को सही दिशा देना ही एक सच्चे शिक्षक की असली पहचान है। पाठ्यक्रम से परे जाकर श्रम की गरिमा जैसे मूल्य भी बच्चों को सिखाए जाने चाहिए।
शिक्षा नीति और व्यावहारिक ज्ञान
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों का जिक्र करते हुए यह बताया गया कि बच्चों को किताबी दुनिया से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन के कौशल सिखाना क्यों आवश्यक है। कार्य के विभिन्न रूपों से छात्रों को जोड़ने से उनका बौद्धिक विकास तेजी से होता है।
- विद्यालय शिक्षा विभाग के 48 शिक्षकों को मिला सम्मान।
- उच्च शिक्षण संस्थानों के 21 संकाय सदस्य भी सूची में शामिल।
- कौशल विकास मंत्रालय के 13 प्रशिक्षकों का चयन।
- कुल 82 शिक्षकों और शिक्षाविदों को किया गया सम्मानित।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? इस वर्ष कितने शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला है? उत्तर। इस वर्ष कुल 82 शिक्षकों और शिक्षाविदों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है।
प्रश्न? कार्यक्रम का आयोजन कहां किया गया था? उत्तर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर विजेताओं से बातचीत की।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






