शनिवार, अगस्त 29, 2026

प्रधानमंत्री जन-धन योजना के 12 साल: 59 करोड़ खाते और 3.1 लाख करोड़ जमा

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केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के 12 वर्ष पूरे होने पर 59 करोड़ खातों और ₹53 लाख करोड़ डीबीटी अंतरण के आंकड़े साझा किए।

मुख्य बातें

  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत देश में 59 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं।
  • कुल जन-धन खातों में से 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के और 78 प्रतिशत ग्रामीण व छोटे कस्बों के हैं।
  • इन खातों में कुल जमा राशि 3.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है।
  • जेएएम (JAM) व्यवस्था के जरिए लाभार्थियों के खातों में 53 लाख करोड़ रुपये सीधे डीबीटी के जरिए भेजे गए हैं।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे होने के अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने देशव्यापी वित्तीय समावेशन अभियान की सराहना की है। पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक संदेश जारी करते हुए कहा कि यह पहल महज बैंक खाते खोलने का अभियान नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के गरिमामय और सुरक्षित जीवन की परिवर्तनकारी यात्रा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना ने औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से दूर रहे करोड़ों लोगों को देश की मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना के 12 वर्ष पूरे: उपलब्धियों का लेखा-जोखा

केंद्रीय मंत्री द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 59 करोड़ से भी अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में आम जनता की कुल जमा राशि 3.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति ने भी अपनी बचत को औपचारिक बैंकिंग ढांचे में सुरक्षित रखना शुरू कर दिया है।

वर्ष 2014 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश के हर परिवार को कम से कम एक बुनियादी बचत बैंक खाता (BSBD) प्रदान करना था। बिना किसी न्यूनतम शेष (जीरो बैलेंस) की शर्त के खोले जाने वाले इन खातों ने बैंकिंग सेवाओं की पहुंच को देश के कोने-कोने तक पहुंचा दिया है। इसके साथ ही खाताधारकों को बिना किसी शुल्क के रूपे (RuPay) डेबिट कार्ड और दुर्घटना बीमा जैसी कई महत्वपूर्ण वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को अप्रत्याशित संकटों के समय आर्थिक सुरक्षा मिलती है।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना में महिलाओं की 56% भागीदारी

वित्तीय समावेशन के इस पूरे सफर में सबसे उल्लेखनीय बात यह रही है कि इसमें देश की नारी शक्ति ने केंद्रीय भूमिका निभाई है। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि खोले गए कुल 59 करोड़ से अधिक जन-धन खातों में से 56 प्रतिशत से ज्यादा खाते महिलाओं के हैं। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी और सक्षम बनाने में कितनी बड़ी भूमिका निभाई है।

पहले जहां ग्रामीण और छोटे शहरों की महिलाओं के पास अपनी व्यक्तिगत बचत रखने के लिए स्वतंत्र माध्यम नहीं थे, वहीं अब बैंक खाता होने से उनकी वित्तीय स्वतंत्रता में जबरदस्त इजाफा हुआ है। महिलाएं न केवल अपनी बचत सुरक्षित रख पा रही हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं की सब्सिडी और अन्य वित्तीय लाभ सीधे अपने खाते में प्राप्त कर रही हैं। इससे परिवारों के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी महिलाओं की स्थिति मजबूत हुई है और वे आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।

जाम (JAM) त्रिमूर्ति और 53 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष अंतरण

भारत के वित्तीय और डिजिटल परिवर्तन में जन धन, आधार और मोबाइल यानी जेएएम (JAM) त्रिमूर्ति ने एक क्रांतिकारी परिवर्तन की नींव रखी है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने जानकारी दी कि जेएएम के तीन स्तंभों के जरिए अब तक 53 लाख करोड़ रुपये की विशाल राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित (DBT) की जा चुकी है।

इस व्यवस्था ने मध्यस्थों और बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। सरकारी कल्याणकारी योजनाओं जैसे किसान सम्मान निधि, एलपीजी सब्सिडी, छात्रवृत्ति, और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ अब बिना किसी लीकेज या देरी के सीधे सही हकदार के खाते में पहुंचता है। इससे न केवल सरकारी धन के रिसाव को रोका गया है, बल्कि पारदर्शी शासन और प्रशासनिक दक्षता में भी अभूतपूर्व सुधार आया है। वित्तीय समावेशन के इस डिजिटल मॉडल की सराहना आज वैश्विक स्तर पर भी की जा रही है।

ग्रामीण भारत में प्रधानमंत्री जन-धन योजना का व्यापक प्रभाव

बैंकिंग सुविधाओं के इस अभूतपूर्व प्रसार का सबसे बड़ा लाभ देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को मिला है। पीआईबी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल जन-धन खातों में से 78 प्रतिशत खाते गांवों और छोटे कस्बों में खोले गए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि योजना का दायरा बड़े शहरों से निकलकर देश के दूर-दराज के इलाकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचा है।

ग्रामीण भारत में बैंकिंग सेवाओं की कमी के कारण लोग लंबे समय तक अनौपचारिक और असुरक्षित वित्तीय साधनों तथा महाजनों पर निर्भर रहने के लिए मजबूर थे। हालांकि, प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने इस स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। गांवों में बैंकिंग संवाददाताओं (बैंक मित्रों) और माइक्रो-एटीएम के नेटवर्क के माध्यम से अब ग्रामीणों के घर तक वित्तीय सेवाएं पहुंच रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह सुधरा है और छोटे किसानों, कारीगरों तथा स्थानीय उद्यमियों के लिए ऋण प्राप्त करने के अवसर सुलभ हुए हैं।

वित्तीय समावेशन की मुख्य विशेषताएं

पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, 12 वर्षों की इस सफल यात्रा में निम्नलिखित प्रमुख उपलब्धियां दर्ज की गई हैं:

  • कुल खाते: योजना के तहत 59 करोड़ से अधिक बुनियादी बैंकिंग खाते खोले गए।
  • महिलाओं की हिस्सेदारी: कुल खोले गए जन-धन खातों में से 56% खाते महिलाओं के नाम पर हैं।
  • ग्रामीण पहुंच: लगभग 78% खाते ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में स्थापित किए गए हैं।
  • कुल जमा राशि: इन जन-धन खातों में जमा कुल राशि ₹3.1 लाख करोड़ से अधिक पहुंच गई है।
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT): जेएएम (JAM) व्यवस्था के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में ₹53 लाख करोड़ से अधिक सीधे भेजे गए हैं।

सशक्तिकरण और भावी संभावनाओं की दिशा

बैंकिंग प्रणाली के इस एकीकरण से देश की समग्र आर्थिक स्थिरता को भी बल मिला है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना केवल वित्तीय समावेशन का साधन नहीं रही, बल्कि इसने सामाजिक सुरक्षा, सूक्ष्म बीमा (जैसे प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और जीवन ज्योति बीमा योजना) तथा पेंशन योजनाओं (अटल पेंशन योजना) के लिए एक मजबूत मंच प्रदान किया है।

जब किसी गरीब परिवार के पास अपना बैंक खाता और बीमा कवर होता है, तो वह आकस्मिक वित्तीय झटकों का सामना करने में अधिक सक्षम होता है। केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में सही ही कहा है कि यह यात्रा केवल खाता खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों लोगों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की गारंटी है। भविष्य में इस आधारभूत ढांचे का उपयोग सूक्ष्म ऋण वितरण, डिजिटल साक्षरता और महिलाओं के नेतृत्व वाले सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए और अधिक व्यापक स्तर पर किया जाना निश्चित है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

राघव यादव
राघव यादव
राघव यादव आज पत्रिका के राष्ट्रीय संपादक हैं और देश भर की प्रमुख खबरों तथा आम मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं।

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