पेयजल और स्वच्छता विभाग ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों और विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
मुख्य बातें
- पेयजल और स्वच्छता विभाग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से किया आग्रह।
- स्थानीय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को बेस्ट प्रैक्टिस डॉक्यूमेंट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
- सितंबर 2026 के अंत तक हर जिले में एक स्टूडेंट टूर और एक केस स्टडी का लक्ष्य।
- स्कूली छात्रों के लिए जल उपचार संयंत्रों और परीक्षण प्रयोगशालाओं के दौरे आयोजित होंगे।
जल जीवन मिशन के अंतर्गत फील्ड-आधारित सीखने और ज्ञान-साझा करने की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया है कि वे स्थानीय कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत उभरने वाले सर्वोत्तम तरीकों को डॉक्यूमेंट करने और प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित करें। इस दिशा में प्रशासन तेजी से काम कर रहा है ताकि जमीनी स्तर पर शिक्षा और तकनीकी अनुभव को जोड़ा जा सके।
जल जीवन मिशन और ग्रामीण विकास की पृष्ठभूमि
शुरुआत के बाद से ही जल जीवन मिशन ग्रामीण पेयजल क्षेत्र में एक बेहद महत्वपूर्ण विकासात्मक पहल के रूप में उभरा है। इसके परिणामस्वरूप देश भर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामुदायिक भागीदारी, स्रोत की स्थिरता, जल गुणवत्ता प्रबंधन, संचालन और रखरखाव, आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाना तथा विकेंद्रीकृत शासन जैसे क्षेत्रों में कई उल्लेखनीय और बेहतरीन तरीके सामने आए हैं। इन सभी पहलुओं ने ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है और अब सरकार इसे शैक्षणिक स्तर पर भी ले जाना चाहती है ताकि युवा और छात्र इन नवाचारों से सीधे तौर पर जुड़ सकें।
शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी और कार्य योजना
इन फील्ड-आधारित नवाचारों के महत्व को पूरी तरह पहचानते हुए, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष रूप से कई कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार स्थानीय स्तर पर ठोस कदम उठाए जाने हैं।
- जल जीवन मिशन 2.0 के तहत चुनिंदा केस स्टडीज़ और सर्वोत्तम तरीकों का अध्ययन और डॉक्यूमेंटेशन करने के लिए स्थानीय कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को शामिल करना।
- साक्ष्य-आधारित ज्ञान-साझाकरण और प्रतिकृति को सुविधाजनक बनाने के लिए शैक्षणिक पत्रिकाओं, संस्थागत रिपोर्टों, न्यूज़लेटर्स, शोध पत्रों, वेबसाइटों और अन्य उपयुक्त प्लेटफार्मों के माध्यम से इन अध्ययनों के निष्कर्षों का प्रसार करना।
- उपयुक्त केस स्टडीज़ और टूर साइटों की पहचान करना और स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों, स्कूलों, जिला जल और स्वच्छता मिशनों तथा ग्राम पंचायतों के साथ आवश्यक समन्वय को सुविधाजनक बनाना।
- पास के स्कूलों के हायर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी छात्रों के लिए मल्टी विलेज स्कीम, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, इनटेक वेल, आधुनिक तकनीकों जैसे स्काडा और आईओटी, तथा एनएबीएल-मान्यता प्राप्त जल परीक्षण प्रयोगशालाओं के दौरे आयोजित करना।
लक्ष्य और भविष्य की रूपरेखा
इस पूरी पहल का मुख्य लक्ष्य यह है कि सितंबर 2026 के आखिर तक देश के हर एक ज़िले में स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर कम से कम एक स्टूडेंट टूर और एक पब्लिश्ड केस स्टडी या बेस्ट प्रैक्टिस का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जाए। इस अनूठी पहल के ज़रिए जल जीवन मिशन 2.0 का यह उद्देश्य है कि ज़मीनी स्तर से सीखने की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए, नए नवाचारों को प्रोत्साहित किया जाए और ग्रामीण जल आपूर्ति के सफल तरीकों को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाया जाए। इससे ग्रामीण जल सुरक्षा को लगातार मज़बूत करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी और देश का युवा वर्ग जल संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक हो सकेगा।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






