शुक्रवार, अगस्त 28, 2026

परमाणु ऊर्जा क्षमता 2047 तक होगी 100 GW, जानिए भारत का मास्टर प्लान

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भारत सरकार ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। PIB के अनुसार, देश में वर्तमान में 24 रिएक्टर संचालित हैं और SMR तकनीक के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

मुख्य बातें

  • भारत में वर्तमान में 24 परमाणु रिएक्टर संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 8.78 गीगावाट है।
  • 7.5 गीगावाट की संयुक्त क्षमता वाले 9 नए परमाणु रिएक्टरों का निर्माण कार्य जारी है।
  • सरकार ने 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
  • अप्रैल 2026 में कलपक्कम स्थित PFBR ने प्रथम क्रिटिकैलिटी हासिल कर दूसरे चरण की शुरुआत की।
  • स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) के अनुसंधान और विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

भारत ने वर्ष 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट (GW) तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए एक सुरक्षित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान में देश में 8.78 गीगावाट की कुल स्थापित क्षमता वाले 24 परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों का सफल संचालन किया जा रहा है, जबकि 7.5 गीगावाट की संयुक्त क्षमता वाली नौ नई रिएक्टर इकाइयां निर्माणाधीन हैं।

भारत में परमाणु ऊर्जा क्षमता और तीन-चरणीय कार्यक्रम

भारत का परमाणु कार्यक्रम तकनीकी आत्मनिर्भरता की रणनीति पर आधारित है। डॉ. होमी जे. भाभा द्वारा 1954 में परिकल्पित भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम देश के विशाल थोरियम भंडारों का उपयोग करने और ऐतिहासिक ईंधन प्रतिबंधों से निपटने के लिए तैयार किया गया था। भारत ने अप्रैल 2026 में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया, जब कलपक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने अपनी प्रथम क्रिटिकैलिटी प्राप्त की। इसने भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत की निशानदेही की है।

इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) ने भारतीय उद्योगों के सहयोग से PFBR का डिजाइन और विकास किया है, जिसमें लगभग 90 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी रूप से निर्मित किए गए हैं। भारत का तीन-चरणीय कार्यक्रम इस प्रकार काम करता है:

  • पहला चरण: प्रेशराइज्ड हेवी Water रिएक्टर (PHWRs) प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग करके बिजली पैदा करते हैं। इससे प्राप्त स्पेंट फ्यूल से प्लूटोनियम हासिल किया जाता है।
  • दूसरा चरण: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBRs) प्लूटोनियम का उपयोग करके बिजली और अतिरिक्त विखंडनीय सामग्री बनाते हैं। ये थोरियम को यूरेनियम-233 में बदलते हैं।
  • तीसरा चरण: थोरियम-आधारित रिएक्टर यूरेनियम-233 का उपयोग करके भारत की प्रचुर थोरियम संपदा से निरंतर ऊर्जा प्राप्त करेंगे।

स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) के लिए 20,000 करोड़ का बजट

अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने के क्रम में भारत सरकार स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) के विकास को तेजी से आगे बढ़ा रही है। SMR आमतौर पर 300 MWe तक बिजली पैदा करते हैं और इनका मॉड्यूलर डिजाइन त्वरित निर्माण को संभव बनाता है। ‘परमाणु ऊर्जा मिशन (2025-26)’ के तहत स्वदेशी SMR के अनुसंधान, डिजाइन और तैनाती के लिए 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) संयुक्त रूप से 220 MWe क्षमता वाले ‘भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर’ (BSMR-200), 55 MWe क्षमता वाले SMR-55 और उच्च-तापमान गैस-कूल्ड रिएक्टर (HTGR) विकसित कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी SMR चालू करना है, जिससे देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को नई ताकत मिलेगी।

फ्लीट मोड और नीतिगत सुधारों से विस्तार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने फ्लीट मोड में 10 स्वदेशी PHWRs और दो 500 मेगावाट के फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों (FBR) के लिए पूर्व-परियोजना गतिविधियों को मंजूरी दी है। ‘परमाणु ऊर्जा मिशन 2025-26’ और ‘शांति (SHANTI) अधिनियम 2025’ जैसी नीतिगत पहलों के माध्यम से क्षमता विस्तार को गति दी जा रही है। ये कानून घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाने और निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी को सक्षम करने के लिए बनाए गए हैं, जिससे दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा क्षमता में गुणात्मक वृद्धि संभव हो सके।

बंद ईंधन चक्र और विट्रीफिकेशन तकनीक

विश्व के कई देश लाइट वाटर रिएक्टरों में लो-एनरिच्ड यूरेनियम (LEU) का उपयोग करते हैं, जबकि भारत मुख्य रूप से PHWRs में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग करता है। भारत के पास निम्न ग्रेड के यूरेनियम भंडार हैं, जिन्हें आयात से पूरा किया जाता है। हालांकि, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड की तटीय रेत में थोरियम (Th-232) का विशाल भंडार मौजूद है। भारत एक क्लोज्ड न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल का पालन करता है। उच्च-स्तरीय रेडियोधर्मी कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए भारत ‘विट्रीफिकेशन प्रौद्योगिकी’ का उपयोग करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल है, जो कचरे को एक स्थिर कांच के रूप में बदल देती है।

बेसबोर्ड बिजली और 2047 का दृष्टिकोण

परमाणु ऊर्जा ग्रिड को स्थिर रखने के लिए चौबीसों घंटे बेसलोड बिजली प्रदान करती है। यह अस्पतालों, उद्योगों, रक्षा प्रतिष्ठानों और संचार तंत्र के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करती है। 2047 तक 100 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य भारत की आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करेगा। भारत का परमाणु कार्यक्रम स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी नवाचार और आत्मनिर्भरता का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करता है, जो देश के सतत विकास को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

राघव यादव
राघव यादव
राघव यादव आज पत्रिका के राष्ट्रीय संपादक हैं और देश भर की प्रमुख खबरों तथा आम मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं।

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