उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ज्ञानी एआई द्वारा निर्मित संप्रभु ‘ज्ञानी अर्थ एआई स्टैक’ का अनावरण किया, जिसमें इवोन 3.3 और प्लेक्सस शामिल हैं।
मुख्य बातें
- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में संप्रभु एआई स्टैक ‘ज्ञानी अर्थ’ लॉन्च किया।
- इस स्टैक में लार्ज लैंग्वेज मॉडल ‘इवोन 3.3’ और व्यावहारिक एआई प्लेटफॉर्म ‘प्लेक्सस’ शामिल हैं।
- ज्ञानी एआई के सीईओ गणेश गोपालन और सीटीओ अनंत नागराज के नेतृत्व में यह स्वदेशी मॉडल विकसित किया गया है।
- संसदीय कार्यों में एआई का उपयोग बढ़ाते हुए 8 भाषाओं में अनुवाद सेवा शुरू की गई, जिसे जल्द सभी अनुसूचित भाषाओं में लागू किया जाएगा।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में ज्ञानी अर्थ एआई स्टैक का औपचारिक शुभारंभ किया है। पीआईबी के अनुसार, यह स्वतंत्र और संप्रभु एआई स्टैक ज्ञानी एआई द्वारा विकसित किया गया है, जिसमें ‘इवोन 3.3’ और ‘प्लेक्सस’ जैसे अत्याधुनिक घटक शामिल हैं। इवोन 3.3 एक विशाल भाषा मॉडल (LLM) है, जबकि प्लेक्सस एक विशेष प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता को वास्तविक दुनिया के दैनिक कार्यों और विभिन्न संस्थानों के साथ जोड़ता है। इस अवसर पर ज्ञानी एआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) गणेश गोपालन तथा सह-संस्थापक एवं मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) अनंत नागराज भी उपस्थित रहे।
ज्ञानी अर्थ एआई स्टैक की मुख्य विशेषताएं और तकनीक
भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह नया एआई मॉडल देश के आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, ज्ञानी अर्थ एआई स्टैक का विकास यह प्रमाणित करता है कि भारतीय इंजीनियर न केवल दुनिया की आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने में सक्षम हैं, बल्कि वे स्वयं भी ऐसी उच्च स्तरीय तकनीकों का निर्माण कर सकते हैं। इस स्टैक के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:
- इवोन 3.3 (Evon 3.3): यह एक संप्रभु और उच्च क्षमता वाला बड़ा भाषा मॉडल (Large Language Model) है जो जटिल भाषाई और विश्लेषणात्मक कार्यों को निष्पादित करने में सक्षम है।
- प्लेक्सस (Plexus): यह एक एकीकृत प्लेटफॉर्म है जो एआई की बुद्धिमत्ता को व्यावहारिक संस्थानों, प्रशासनिक प्रणालियों और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों से जोड़ने का काम करता है।
- स्वदेशी विकास: ज्ञानी एआई के सीईओ गणेश गोपालन और सीटीओ अनंत नागराज के नेतृत्व में तैयार किया गया यह ढांचा भारत को तकनीकी स्वायत्तता प्रदान करता है।
- संसदीय अनुप्रयोग: संसद के डिजिटल पोर्टल पर एआई आधारित अनुवाद सेवाओं के विस्तार में ऐसी तकनीकें सहायक सिद्ध हो रही हैं।
उपराष्ट्रपति ने क्यों बताया ज्ञानी अर्थ एआई स्टैक को ऐतिहासिक
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने प्रौद्योगिकी के क्रमिक विकास का उल्लेख किया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि एक समय था जब टाइपराइटर और सीमित कंप्यूटरों का दौर हुआ करता था, लेकिन आज दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लार्ज लैंग्वेज मॉडल के युग में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने इस बात का भी स्मरण कराया कि जब पहली बार कंप्यूटर आए थे, तब लोगों के मन में बड़े पैमाने पर नौकरियों के जाने का डर था। हालांकि, समय ने साबित किया कि आईटी क्षेत्र ने भारत और विदेशों में लाखों नए रोजगार के अवसर उत्पन्न किए।
उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ज्ञानी अर्थ एआई स्टैक जैसी स्वदेशी पहल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विस्तार देश में रोजगार तथा आर्थिक विकास के नए द्वार खोलेगा। उन्होंने कहा कि एआई की मदद से भारत की आर्थिक प्रगति एक नए और ऊंचे स्तर पर पहुंचेगी। देश को केवल विदेशी तकनीकों का उपभोक्ता बने रहने के बजाय स्वयं नवाचारों का निर्माता बनना होगा, ताकि पूरा विश्व भारतीय प्रौद्योगिकी का लाभ उठा सके।
भारत का एआई मिशन और डिजिटल क्रांति का प्रभाव
उपराष्ट्रपति ने देश में चल रहे तकनीकी परिवर्तन में ‘इंडियाएआई मिशन’ और ‘एआई उत्कृष्टता केंद्रों’ की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। पीआईबी के अनुसार, भारत के तकनीकी परिदृश्य को मजबूती देने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, ‘भारत प्रथम’ दृष्टिकोण और राजनीतिक इच्छाशक्ति की अहम भूमिका रही है। उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमता लगातार बढ़ रही है और ज्ञानी अर्थ एआई स्टैक का शुभारंभ इसी राष्ट्रीय यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक उपयोग का उदाहरण देते हुए उपराष्ट्रपति ने संसद में एआई के प्रयोग पर प्रकाश डाला। डिजिटल संसद पोर्टल के माध्यम से अब संसदीय बहसों और आधिकारिक दस्तावेजों को कई भारतीय भाषाओं में सुलभ बनाया गया है। हाल ही में संपन्न हुए संसद सत्र के दौरान आठ प्रमुख भारतीय भाषाओं में एआई-आधारित अनुवाद सेवा शुरू की गई थी। जल्द ही इसे संविधान की सभी अनुसूचित भाषाओं में लागू करने की योजना है, जिससे आम नागरिक अपनी मातृभाषा में संसदीय गतिविधियों से जुड़ सकेंगे।
विकसित भारत @2047 और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा
तकनीकी और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने के लिए संप्रभु एआई क्षमताओं का निर्माण अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है। सेमीकंडक्टर विनिर्माण का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत यदि बहुत पहले चिप्स का निर्माण शुरू कर देता, तो आज वह इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी होता। हालांकि, वर्तमान सरकार के प्रयासों के कारण सेमीकंडक्टर और एआई क्षेत्र को अभूतपूर्व गति मिली है।
ज्ञानी अर्थ एआई स्टैक का अनावरण ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। 2047 तक भारत को एक पूर्ण रूप से विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में तकनीकी क्षमता एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर रही है। केवल दूसरों द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर या मॉडल का इस्तेमाल करने से भारत विश्व का नेतृत्व नहीं कर सकता। स्वदेशी एआई स्टैक के जरिए भारत न केवल अपने आंकड़ों और डिजिटल संप्रभुता की सुरक्षा कर सकता है, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान भी बना सकता है।
रोजगार और आर्थिक प्रगति पर एआई का प्रभाव
जब भी कोई नई तकनीक आती है, तो शुरुआती दौर में रोजगार विस्थापन को लेकर चिंताएं उत्पन्न होती हैं। ज्ञानी अर्थ एआई स्टैक के लॉन्च के अवसर पर उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि एआई इंसानों को प्रतिस्थापित करने के बजाय उनके काम को आसान और अधिक उत्पादक बनाएगा। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, शासन और वित्त जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एआई आधारित समाधानों के लागू होने से उत्पादकता में तेजी से सुधार होगा।
यह एआई स्टैक भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी विभागों को एक सुरक्षित और स्वदेशी विकल्प प्रदान करेगा। जब स्थानीय भाषाओं और भारतीय संदर्भों के अनुसार एआई मॉडल प्रशिक्षित किए जाते हैं, तो उनका सामाजिक प्रभाव अत्यधिक व्यापक होता है। ज्ञानी अर्थ एआई स्टैक जैसी तकनीकें भारत को न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएंगी, बल्कि आने वाले वर्षों में नवाचार और वैश्विक नेतृत्व के शिखर पर स्थापित करने में भी सहायक होंगी।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






