शुक्रवार, अगस्त 28, 2026

अशोक सहकारी बैंक पर आरबीआई ने लगाई पाबंदियां, ग्राहक नहीं निकाल सकेंगे पैसे

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भारतीय रिज़र्व बैंक ने अहम कदम उठाते हुए अहमदनगर स्थित अशोक सहकारी बैंक लिमिटेड पर कई तरह के वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए हैं, जो 28 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गए हैं।

मुख्य बातें

  • आरबीआई के निर्देशों के अनुसार 28 अगस्त 2026 के बाद से बैंक बिना अनुमति कोई नया कर्ज या निवेश नहीं कर सकेगा।
  • बैंक के खातों से ग्राहकों द्वारा पैसे की निकासी पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
  • योग्य जमाकर्ता डीआईसीजीसी (DICGC) के नियमों के तहत 5,00,000 रुपये तक की बीमा दावा राशि पाने के हकदार होंगे।
  • ये पाबंदियां छह महीने की अवधि के लिए लागू रहेंगी और इनकी समीक्षा की जाएगी।

अशोक सहकारी बैंक पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्तीय स्थिति और पर्यवेक्षी चिंताओं को देखते हुए कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, अहमदनगर स्थित इस बैंक पर यह कार्रवाई बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 35ए के तहत की गई है। नए निर्देशों के बाद बैंक के कामकाज पर कई तरह की सीमाएं तय कर दी गई हैं, जिससे खाताधारकों और आम जनता के बीच चर्चा तेज हो गई है। यह आदेश 28 अगस्त 2026 को कारोबार की समाप्ति से प्रभावी हो चुका है और शुरुआती तौर पर यह छह महीने तक लागू रहेगा।

अशोक सहकारी बैंक पर आरबीआई की पाबंदियों का दायरा

आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक, अशोक सहकारी बैंक लिमिटेड अब केंद्रीय बैंक की पूर्व लिखित अनुमति के बिना न तो किसी नए ऋण या अग्रिम का नवीनीकरण कर सकेगा और न ही कोई नया निवेश कर पाएगा। इसके अलावा बैंक किसी भी तरह की नई देनदारी स्वीकार नहीं कर सकता है, जिसमें धन उधार लेना और ताजा जमा स्वीकार करना शामिल है। बैंक की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी खाते से सामान्य निकासी की अनुमति न दी जाए, हालांकि कुछ विशेष मामलों में ऋणों को जमा के साथ समायोजित करने की छूट दी गई है।

बैंक के जरूरी खर्चों और संचालन पर असर

हालांकि बैंक के सामान्य व्यावसायिक कामकाज पर रोक लगा दी गई है, लेकिन इसके बावजूद संस्थान अपने कुछ बेहद जरूरी और अनिवार्य खर्चों का भुगतान कर सकता है। इनमें कर्मचारियों के वेतन, दुकान या कार्यालय का किराया, और बिजली के बिल जैसे बुनियादी खर्च शामिल हैं। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इन प्रतिबंधों का यह मतलब बिल्कुल भी नहीं निकाला जाना चाहिए कि बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार होने तक इन तमाम निर्दिष्ट प्रतिबंधों के दायरे में ही अपना अस्तित्व बनाए रखेगा और केंद्रीय बैंक स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।

खाताधारकों के लिए डीआईसीजीसी बीमा सुरक्षा

अशोक सहकारी बैंक के ग्राहकों के मन में अपनी गाढ़ी कमाई को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। ऐसे में केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि पात्र जमाकर्ता डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अंतर्गत अपनी जमा राशि पर 5,00,000 रुपये (पांच लाख रुपये) तक के मौद्रिक आवरण के हकदार होंगे। इसके लिए संबंधित ग्राहकों को अपनी सहमति और जरूरी विवरण जमा करने होंगे, जिसके बाद सत्यापन प्रक्रिया पूरी करके भुगतान किया जाएगा। ग्राहक इस संबंध में बैंक अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं या डीआईसीजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

भविष्य की संभावनाएं और केंद्रीय बैंक की निगरानी

भारतीय रिज़र्व बैंक ने यह कड़ा कदम उठाने से पहले बैंक के बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ कई दौर की चर्चाएं की थीं। लेकिन प्रबंधन की ओर से पर्यवेक्षी चिंताओं को दूर करने के लिए पर्याप्त और ठोस कदम न उठाए जाने के कारण यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया। सहकारिता क्षेत्र के बैंकों में इस तरह के नियंत्रण का मुख्य उद्देश्य आम जनता की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। आने वाले समय में बैंक की वित्तीय सेहत और सुधार के प्रयासों को देखते हुए आरबीआई इन निर्देशों में संशोधन या ढील देने पर भी विचार कर सकता है, बशर्ते परिस्थितियां अनुकूल हों।

यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका के समाचार संपादक हैं और अर्थव्यवस्था, बाज़ार, रोज़गार तथा शिक्षा से जुड़ी खबरें देखते हैं।

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