
विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग द्वारा विशेष अभियान 6 के अंतर्गत कर्तव्य भवन में अभिलेख प्रबंधन पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
मुख्य बातें
- विधायी विभाग द्वारा 13 अक्टूबर 2026 को कार्यशाला का आयोजन किया गया।
- यह आयोजन कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली के सम्मेलन कक्ष में हुआ।
- विधायी विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि के मार्गदर्शन में कार्यशाला संपन्न हुई।
- सचिवालय प्रशिक्षण और प्रबंधन संस्थान के पूर्व संकाय सदस्य श्री रंजन कुमार रिसोर्स पर्सन रहे।
विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग द्वारा विशेष अभियान 6 के तहत अभिलेख प्रबंधन पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता लाने के उद्देश्य से इस विशेष सत्र का आयोजन 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में किया गया, जिसमें विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
अभिलेख प्रबंधन कार्यशाला क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
अभिलेख प्रबंधन किसी भी सरकारी कार्यालय के सुचारू संचालन, प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने में अत्यंत आवश्यक भूमिका निभाता है। कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली के सम्मेलन कक्ष में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सरकारी फाइलों और दस्तावेजों के व्यवस्थित रख-रखाव के तरीकों को बेहतर बनाना था। विधायी विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ, जहाँ विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ संबद्ध कार्यालयों राजभाषा खंड और विधि साहित्य प्रकाशन के कर्मियों ने भी शिरकत की।
कार्यशाला के दौरान सचिवालय प्रशिक्षण और प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व संकाय सदस्य श्री रंजन कुमार ने बतौर रिसोर्स पर्सन हिस्सा लिया। उन्होंने फाइलों और दस्तावेजों के उचित वर्गीकरण, इंडेक्सिंग और उनकी समय पर समीक्षा करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों के तहत रिकॉर्ड का संरक्षण या उनकी छंटाई की जानी चाहिए।
विशेष अभियान 6 और सरकारी कार्यालयों में रिकॉर्ड रखरखाव के नियम
सरकारी कार्यालयों में फाइलों का अंबार न लगे और जरूरी दस्तावेज समय पर आसानी से मिल सकें, इसके लिए रिकॉर्ड रिटेंशन शेड्यूल का पालन करना अनिवार्य होता है। इस कार्यशाला में वक्ताओं ने रिकॉर्ड रिटेंशन शेड्यूल के पालन और लागू प्रक्रियाओं के अनुसार पुराने रिकॉर्ड के सही निपटान को सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।
- कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली में आयोजित की गई कार्यशाला।
- विधायी विभाग के जेएस एवं एलसी श्री जी. पनमेई ने किया कार्यशाला का नेतृत्व।
- राजभाषा खंड और विधि साहित्य प्रकाशन के कर्मियों की भी रही उपस्थिति।
- प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने पर दिया गया विशेष जोर।
विधायी विभाग के संयुक्त सचिव एवं विधायी परामर्शदाता श्री जी. पनमेई ने कार्यशाला का नेतृत्व करते हुए सभी कर्मचारियों को सरकारी रिकॉर्ड के व्यवस्थित रख-रखाव के लिए प्रेरित किया। उन्होंने श्री रंजन कुमार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सत्रों से कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार होता है। उन्होंने अधिकारियों से रिकॉर्ड छंटाई से संबंधित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की।
अभिलेख प्रबंधन का आम कामकाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?
किसी भी विभाग में फाइलों का डिजिटल या भौतिक रूप से सही प्रबंधन होने से आम जनता से जुड़ी फाइलों के निपटारे में तेजी आती है। जब सरकारी रिकॉर्ड व्यवस्थित होते हैं, तो ऑडिट और प्रशासनिक जांच के दौरान जवाबदेही तय करना आसान हो जाता है। इस प्रकार के विशेष अभियानों से फाइलों के अनावश्यक ढेर को हटाने में मदद मिलती है, जिससे कार्यालय का स्थान और कार्यकुशलता दोनों बेहतर होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? विधायी विभाग द्वारा अभिलेख प्रबंधन कार्यशाला कहाँ आयोजित की गई थी?
उत्तर। यह कार्यशाला कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली के सम्मेलन कक्ष में आयोजित की गई थी।
प्रश्न? इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता या रिसोर्स पर्सन कौन थे?
उत्तर। सचिवालय प्रशिक्षण और प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व संकाय सदस्य श्री रंजन कुमार इस कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन के रूप में उपस्थित रहे।
प्रश्न? यह आयोजन किस अभियान के अंतर्गत किया जा रहा है?
उत्तर। यह आयोजन विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान 6 के तहत किया जा रहा है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






