
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने भारी उद्योग मंत्रालय और बीएचईएल, सीसीआई जैसी सीपीएसई में एसटी वर्ग के संवैधानिक सुरक्षा उपायों की समीक्षा की।
मुख्य बातें
- एनसीएसटी अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने नई दिल्ली में भारी उद्योग मंत्रालय के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
- बैठक में भारी उद्योग सचिव कामरान रिज़वी और बीएचईएल, सीसीआई, ईपीआईएल के सीएमडी शामिल हुए।
- आरक्षण रोस्टर, भर्ती प्रक्रियाओं, संपर्क अधिकारियों की कार्यप्रणाली और शिकायत निवारण तंत्र की समीक्षा हुई।
- आयोग ने एसटी युवाओं के लिए सीपीएसई के माध्यम से सुव्यवस्थित कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर जोर दिया।
अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने नई दिल्ली स्थित कौस्तुभम, जीपीओए-3, नेताजी नगर में भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) तथा इसके अधीन आने वाले सार्वजनिक उपक्रमों में अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक सुरक्षा उपायों की समीक्षा की। 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में एसटी कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व, आरक्षण नीति के पालन, भर्ती प्रक्रियाओं और शिकायत निवारण तंत्र की वर्तमान स्थिति का ब्योरा लिया गया।
अनुसूचित जनजाति आयोग ने भारी उद्योग मंत्रालय की समीक्षा में क्या निर्देश दिए?
अनुसूचित जनजाति आयोग ने भारी उद्योग मंत्रालय और उसके सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को एसटी कर्मचारियों की शिकायतों के समयबद्ध समाधान के लिए नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया है। आयोग ने बीएचईएल जैसी कंपनियों के माध्यम से अनुसूचित जनजाति के युवाओं के लिए सुव्यवस्थित कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने पर विशेष जोर दिया।
समीक्षा बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी और सीपीएसई
इस समीक्षा बैठक में भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कामरान रिज़वी सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCI) और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड (EPIL) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) और स्वायत्त निकायों (ABs) में एसटी वर्ग के प्रतिनिधित्व, आरक्षण रोस्टर के रख-रखाव और सीधी भर्ती की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण किया गया। मंत्रालय ने आयोग को बताया कि आरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुपालन के लिए संपर्क अधिकारियों (Liaison Officers) को तैनात किया गया है और शिकायतों की निरंतर निगरानी की जा रही है।
इसका असर: एसटी कर्मचारियों और युवाओं को क्या लाभ मिलेगा?
अनुसूचित जनजाति आयोग की इस पहल से भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन विभिन्न कंपनियों में काम करने वाले जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को प्रशासनिक स्तर पर न्याय मिलना आसान होगा। नियमित समीक्षा होने से रोस्टर में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम होती है और खाली पड़े पदों को समय पर भरने में मदद मिलती है।
इसके साथ ही, सार्वजनिक उपक्रमों के माध्यम से संचालित होने वाले कौशल विकास कार्यक्रमों का दायरा बढ़ेगा। इससे जनजाति बहुल क्षेत्रों के युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे वे देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार पाने के योग्य बन सकेंगे।
अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रमुख निर्देश और सुझाव
समीक्षा के दौरान आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने संवैधानिक सुरक्षा उपायों को धरातल पर उतारने के लिए कई ठोस दिशा-निर्देश दिए:
- आरक्षण रोस्टर का अद्यतन: भारी उद्योग मंत्रालय और उसके तहत आने वाले सभी सीपीएसई भर्ती और पदोन्नति में पारदर्शी रोस्टर बनाए रखें।
- कौशल विकास तंत्र: बीएचईएल, सीसीआई और ईपीआईएल जैसी प्रमुख कंपनियां एसटी युवाओं के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की सुव्यवस्थित योजना बनाएं।
- समयबद्ध शिकायत निवारण: एसटी कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए प्राप्त आवेदनों और शिकायतों का एक निश्चित समय सीमा के भीतर निपटारा किया जाए।
- नियमित निगरानी: मंत्रालय अपने स्वायत्त संस्थानों और सीपीएसई के साथ नियमित अंतराल पर बैठकें कर आरक्षण अनुपालन की जांच करे।
संपर्क अधिकारियों की भूमिका और संस्थागत तंत्र
सरकारी उपक्रमों में आरक्षण नीतियों के सही क्रियान्वयन के लिए संपर्क अधिकारी का पद महत्वपूर्ण होता है। भारी उद्योग मंत्रालय ने बैठक में स्पष्ट किया कि सीपीएसई में तैनात संपर्क अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि आरक्षण रोस्टर नियमों के अनुसार तैयार हो। यदि किसी कर्मचारी को पदोन्नति या सेवा से जुड़ी कोई समस्या होती है, तो संपर्क अधिकारी उसके निवारण में मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस बात की सराहना की कि मंत्रालय ने आरक्षण अनुपालन के लिए सुरक्षात्मक उपाय लागू किए हैं। आयोग ने कहा कि संस्थागत तंत्र को और मजबूत बनाने के लिए आयोग और मंत्रालय के बीच लगातार संवाद बना रहना चाहिए।
एनसीएसटी का संवैधानिक जनादेश और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338ए (Article 338A) के तहत गठित राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग एक उच्चस्तरीय संवैधानिक निकाय है। इसका मुख्य कार्य देश के अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा करना, उनके लिए तय सुरक्षा उपायों की जांच करना और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास की योजनाओं पर सरकार को सलाह देना है।
भारी उद्योग मंत्रालय के पास देश के बड़े विनिर्माण और इंजीनियरिंग उपक्रमों का नियंत्रण है। बीएचईएल जैसी महारत्न कंपनी और सीसीआई जैसी इकाइयां देश के बुनियादी ढांचे में बड़ा योगदान देती हैं। इन सार्वजनिक संस्थानों में विविधता और सामाजिक समानता बनाए रखने के लिए अनुसूचित जनजाति आयोग समय-समय पर इस तरह की समीक्षा बैठकें आयोजित करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के अध्यक्ष कौन हैं?
उत्तर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य हैं, जिन्होंने भारी उद्योग मंत्रालय की इस समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
प्रश्न? समीक्षा बैठक में भारी उद्योग मंत्रालय के कौन से उपक्रम शामिल हुए?
उत्तर। इस समीक्षा बैठक में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCI) और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड (EPIL) के सीएमडी और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
प्रश्न? अनुसूचित जनजाति आयोग ने सीपीएसई को क्या नया निर्देश दिया है?
उत्तर। आयोग ने सीपीएसई को एसटी वर्ग के युवाओं के लिए सुव्यवस्थित कौशल विकास कार्यक्रम चलाने और कर्मचारियों की शिकायतों के निपटारे के लिए नियमित समीक्षा बैठकें करने का निर्देश दिया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






