सोमवार, अक्टूबर 12, 2026

मध्य प्रदेश में 4.2 टन पोस्ता भूसा ज़ब्त, सीबीएन ने 3 को किया गिरफ्तार

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पोस्ता भूसा

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की मध्य प्रदेश इकाई ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 4,209 किलोग्राम से अधिक अवैध पोपी स्ट्रॉ, दो ट्रक और 100 गेहूं की बोरियां ज़ब्त कीं।

मुख्य बातें

  • सीबीएन मध्य प्रदेश इकाई ने दो कार्रवाइयों में कुल 4,209.80 किलोग्राम पोस्ता भूसा बरामद किया।
  • पहली कार्रवाई 5 अक्टूबर 2026 को उदयपुर-चित्तौड़गढ़ हाईवे पर हरियाणा नंबर के कंटेनर ट्रक पर हुई।
  • दूसरी कार्रवाई 9 अक्टूबर 2026 को मंदसौर के गांधीसागर-भानपुरा मार्ग पर हुई, जहां 100 गेहूं की बोरियों के नीचे नशा छिपा था।
  • दोनों मामलों में एनडीपीएस अधिनियम 1985 के तहत कुल तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया।

मध्य प्रदेश में मादक पदार्थों के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) की टीम ने 4,209 किलोग्राम से अधिक पोस्ता भूसा ज़ब्त किया है। सीबीएन की मध्य प्रदेश इकाई ने पिछले सप्ताह दो अलग-अलग अभियानों के दौरान यह कार्रवाई की। इस मामले में एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम 1985 की धाराओं के तहत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, तस्कर गेहूं की बोरियों और कंटेनर ट्रक का इस्तेमाल करके नशीले पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने की कोशिश कर रहे थे।

पोस्ता भूसा जब्ती मामले में क्या कार्रवाई हुई?

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने मध्य प्रदेश के नीमच और मंदसौर जिलों में दो गुप्त कार्रवाइयां करके 4.2 टन से अधिक पोस्ता भूसा ज़ब्त किया है। सीबीएन अधिकारियों ने खुफिया जानकारी के आधार पर दो ट्रकों को रोककर गेहूं के ढेरों में छिपाकर रखी गई अवैध खेप बरामद की और तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया।

उदयपुर-चित्तौड़गढ़ मार्ग पर सीबीएन की पहली पोस्ता भूसा जब्ती

पहली कार्रवाई 5 अक्टूबर 2026 को सीबीएन नीमच की टीम द्वारा की गई। गुप्त सूचना के आधार पर अधिकारियों ने उदयपुर-चित्तौड़गढ़ राजमार्ग पर एक संदिग्ध कंटेनर ट्रक को रोका। इस वाहन का पंजीकरण हरियाणा राज्य का था। जब टीम ने वाहन की विस्तृत तलाशी ली, तो उसमें 39 अलग-अलग रंगों की प्लास्टिक बोरियों में छिपाकर रखा गया प्रतिबंधित पोस्ता भूसा मिला।

इस ट्रक से कुल 929.08 किलोग्राम अवैध पदार्थ बरामद हुआ। जब्त किए गए माल में चीरा लगा हुआ भूसा, बिना चीरा लगा हुआ पोस्ता भूसा (यूपीएस) तथा बारीक पिसा हुआ पोस्ता पाउडर शामिल था। सीबीएन ने मौके पर ही पूरे माल और ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया तथा वाहन चालक को एनडीपीएस कानून के तहत हिरासत में ले लिया।

मंदसौर में गेहूं की आड़ में पोस्ता भूसा की बड़ी खेप पकड़ी

दूसरी कार्रवाई 9 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में हुई। सीबीएन की टीम को सटीक जानकारी मिली थी कि एक टाटा ट्रक में कवर कार्गो के रूप में भारी मात्रा में नशीला पदार्थ ले जाया जा रहा है। अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गांधीसागर-भानपुरा मार्ग पर राजस्थान नंबर वाले एक टाटा ट्रक को रोक लिया।

संदेह के आधार पर वाहन को गरोठ स्थित सीबीएन कार्यालय लाया गया। वहां जब पूरे ट्रक को खाली कराकर तलाशी ली गई, तो ऊपर रखी 100 गेहूं की बोरियों के नीचे छिपाकर रखी गई 3,280.72 किलोग्राम पोस्ता भूसा की विशाल खेप मिली। नारकोटिक्स अधिकारियों ने माल, गेहूं की बोरियों और ट्रक को जब्त कर लिया तथा वाहन में सवार दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया।

सीबीएन द्वारा की गई जब्ती के प्रमुख आंकड़े

  • कुल जब्त पोस्ता भूसा: 4,209.80 किलोग्राम (4.2 टन से अधिक)
  • जब्त किए गए वाहन: 02 (एक हरियाणा नंबर का कंटेनर ट्रक और एक राजस्थान नंबर का टाटा ट्रक)
  • छिपाने के लिए प्रयुक्त कवर कार्गो: 100 बोरियां गेहूं
  • गिरफ्तार आरोपियों की संख्या: 03 व्यक्ति
  • कार्रवाई का स्थान: उदयपुर-चित्तौड़गढ़ हाईवे तथा मंदसौर का गांधीसागर-भानपुरा मार्ग
  • संबद्ध कानून: स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ (NDPS) अधिनियम, 1985

पोस्ता भूसा क्या है और यह क्यों प्रतिबंधित है?

पोस्ता भूसा या पोपी स्ट्रॉ, अफीम के पौधे (पॉपॉवर सोम्निफेरम) के डोडे से अफीम निकालने के बाद बचा हुआ सूखा भाग होता है। हालांकि इसमें अफीम के दूध से कम सांद्रता होती है, फिर भी इसमें मॉर्फिन, कोडीन और थीबेन जैसे एल्कलॉइड मौजूद होते हैं। इस कारण इसका सेवन नशे के रूप में किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक और जानलेवा हो सकता है।

भारत में अफीम की खेती केवल लाइसेंस प्राप्त किसानों द्वारा ही की जा सकती है, और इसका प्रबंधन सीधे केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो करता है। अफीम निष्कर्षण के बाद पोस्ता भूसे की बिक्री, परिवहन, भंडारण या प्रसंस्करण बिना वैध अनुमति के पूरी तरह अवैध है। स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act, 1985) के तहत पोस्ता भूसा रखना या बेचना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना जाता है।

मालवा और मेवाड़ क्षेत्र में सीबीएन की सख्ती का असर

मध्य प्रदेश का मंदसौर-नीमच क्षेत्र और उससे सटा राजस्थान का चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ इलाका भारत में वैध अफीम खेती का मुख्य केंद्र है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण तस्कर इस इलाके से अवैध पोस्ता भूसा एकत्र कर देश के अन्य राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के अंदरूनी इलाकों में भेजने की कोशिश करते हैं।

सीबीएन की हालिया कार्रवाई से अंतरराज्यीय नशीले पदार्थों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। ब्यूरो अब जब्त माल के स्रोत और इसे कहां भेजा जा रहा था, इसका पता लगाने में जुटा है। इसके अलावा, वित्तीय संपर्कों और बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंकेज की जांच की जा रही है ताकि गिरोह के मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: सीबीएन ने मध्य प्रदेश में कुल कितना पोस्ता भूसा ज़ब्त किया है?
उत्तर: सीबीएन की मध्य प्रदेश इकाई ने दो अलग-अलग छापों में कुल 4,209.80 किलोग्राम (4.2 टन से अधिक) पोस्ता भूसा ज़ब्त किया है।

प्रश्न: तस्करों ने नशीले पदार्थों को छिपाने के लिए किस तरीके का इस्तेमाल किया था?
उत्तर: तस्करों ने 3,280 किलो से अधिक माल छिपाने के लिए 100 गेहूं की बोरियों का इस्तेमाल किया था, जिन्हें कवर कार्गो के रूप में ऊपर रखा गया था।

प्रश्न: गिरफ्तार आरोपियों पर किस कानून के तहत कार्रवाई की गई है?
उत्तर: गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्तियों पर स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act), 1985 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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